मंदिरों के हित संरक्षण के लिए मंदिर विश्वस्त आयुक्त और जिल्हाधिकारी के कार्यालय में

अमरावती जिले के सैकड़ों मंदिरों के विश्वस्त, पदाधिकारी और भक्तगण स्वप्रेरणा से उपस्थित

देवस्थान संरक्षण के लिए एकजुटता
अमरावती /दि.6- विश्वस्तों द्वारा दिए गए निवेदन के माध्यम से मंदिरों के विभिन्न लंबित मुद्दों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया गया. इसमें निम्न प्रमुख मांगें रखी गईं. इस निवेदन के बारे में श्री निलेश टवलारे ने जानकारी देते हुए कहा कि 1. मंदिरों को दान में मिली या खरीदी गई कृषि भूमि का मूल्यांकन कंपनी या संस्था के दर से न करके कृषि दर के अनुसार किया जाए. साथ ही मंदिरों के दान और खरीद दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ की जाए. 2. मंदिरों की कृषि भूमि को प्राकृतिक आपदा, बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा या अन्य कारणों से नुकसान होने पर सामान्य किसानों की तरह मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाए. 3. मंदिरों की कृषि भूमि को कुल कानून और अधिकतम भूमि धारण (सिलिंग) कानून के तहत मिली छूट बरकरार रखी जाए और इसके लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के छूट प्रमाणपत्रों की शर्तें रद्द की जाएं.
इस निवेदन के दूसरे विषय पर आशीष मारुडकर ने कहा कि मंदिर और तीर्थक्षेत्र विकास निधि खर्च करते समय संबंधित मंदिर संस्था, विश्वस्त मंडल और स्थानीय प्रबंधन समितियों को विश्वास में लेकर निर्णय लिया जाए. मंदिर और तीर्थक्षेत्र विकास के लिए तय की गई जगह को संबंधित विकास एजेंसी को हस्तांतरित करने की शर्त रद्द की जाए, ऐसा प्रशासन और सरकार को दिए गए निवेदन में कहा गया.
इस अवसर पर श्री कैलास पनपालिया ने बताया कि राज्य शासन के राजस्व और वन विभाग द्वारा प्रस्तावित महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम, 2026 के मसौदे के खिलाफ अमरावती जिले के विभिन्न देवस्थान, मंदिर संस्था, विश्वस्त मंडल और धार्मिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराकर शासन को विस्तृत निवेदन सौंपे. मंदिरों की जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि समाज द्वारा धर्मकार्य के लिए दान की गई है. इसलिए ऐसी जमीनों पर अधिकार अक्षुण्ण रखना शासन की जिम्मेदारी है. देवस्थान इनाम जमीनों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा, ऐसा चेतावनी भी इस समय दी गई. प्रस्तावित अधिनियम से देवस्थान इनाम जमीनों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और कई मंदिरों की मालकी और पारंपरिक अधिकार समाप्त होने की आशंका जताई गई. राजस्व और वन विभाग द्वारा तैयार इस मसौदे से देवस्थान इनाम जमीनों पर मंदिरों की मालकी नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है.
मंदिरों की आर्थिक व्यवस्था, धार्मिक कार्य, पूजा-अर्चना, उत्सव और सामाजिक उपक्रमों का मुख्य आधार इन जमीनों की रक्षा के लिए उक्त प्रारूप अधिनियम तुरंत वापस लेकर रद्द किया जाए, ऐसी मांग की गई. शासन को मंदिर विश्वस्त, धार्मिक संस्था और समाज प्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा करके ही कोई निर्णय लेना चाहिए, अन्यथा राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने की चेतावनी उपस्थित लोगों ने दी. इस अवसर पर अमरावती जिले के विभिन्न मंदिरों के विश्वस्त, पदाधिकारी, धर्मप्रेमी नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे.
उपस्थित लोगों में पद्मश्री जनार्दन पंत बोथे – सरचिटणीस, अखिल भारतीय गुरुदेव सेवा मंडल गुरुकुंज आश्रम; दीपक सब्जीवाले – एकवीरा देवी मंदिर अमरावती; मीना पाठक – अंबादेवी संस्थान अमरावती; राजेंद्र टेंबे – अध्यक्ष, एकवीरा देवी मंदिर अमरावती; संजय मेने – दत्तात्रेय देवस्थान; योगधर्म हरिनाम – इस्कॉन कोंडणपूर; सुनील काळमेग – गजानन महाराज ट्रस्ट साईनगर अमरावती; रवींद्र भोयर – नागेश्वर महादेव संस्थान धामंत्री; विजयराव करडे – नागेश्वर महादेव संस्थान; अनिल मापले – गजानन महाराज संस्थान तिवसा; साहेबरावजी – जगदंबा देवी मुरादेवी; श्रीकृष्ण मावले – रुक्मिणी विदर्भपीठ कोंडणपूर; अतुलजी ठाकरे – विठ्ठल रुक्मिणी संस्थान कोंडणपूर; विनोदराव वानखडे – मारुती संस्थान मार्डी; शुभम – गुरुदेव सेवा मंडल; रामकृष्ण लांडोरे – कोंडेश्वर महादेव संस्थान; सुरेश वामनराव – कोंडेश्वर संस्थान; शंकरराव येवले – श्री मारुती संस्थान; कृष्णाजी मारुडकर – दत्तात्रेय देवस्थान; मयूर महंत – श्रीराम मंदिर संस्थान वरुड; गजानन मुदगल – मारुती संस्थान मार्डी; अनिल वानखडे – दत्त मंदिर मार्डी; मोहन इंगले – नागेश्वर महादेव संस्थान; युग धर्म प्रभुजी – इस्कॉन मंदिर कोंडणपूर; वेंकटेश बालाजी ट्रस्ट – वैकुंठ धाम अमरावती; धीरज इंगळे – गुरुदेव मंडल मोझरी; सोपान करडे – काशी विश्वेश्वर संस्थान धामंत्री; कैलास भाऊ गिरोलकर – महादेव मंदिर चांदुर रेल्वे; गिरी दत्त मंदिर संस्थान बडनेरा; प्रशांत इंगोले – गजानन महाराष्ट्र साईनगर; तथा सुनील कालमेघ, विकास वैद्य, अविनाश देशमुख – गजानन महाराज ट्रस्ट साईनगर अमरावती आदि शामिल थे.

Back to top button