राज्यसभा के लिए राजेंद्र जैन ने भरा नामांकन पत्र
महायुति के शक्ति प्रदर्शन के बीच भरा पर्चा

* प्रफुल्ल पटेल के ’राइट हैंड’ राजेंद्र जैन अब राज्यसभा की दहलीज पर
मुंबई /दि. 8- महाराष्ट्र की राज्यसभा उपचुनाव के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के उम्मीदवार राजेंद्र जैन ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. महायुति के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति में यह नामांकन भरा गया, जिससे राज्यसभा चुनाव के निर्विरोध होने की संभावना और मजबूत हो गई है.
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद रिक्त हुई राज्यसभा सीट के लिए 18 जून को उपचुनाव होगा. इस सीट के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस ने राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया है. इससे पहले छगन भुजबल का नाम राज्यसभा के लिए चर्चा में था, लेकिन पार्टी के भीतर चर्चा के बाद अंततः राजेंद्र जैन के नाम पर मुहर लगी. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इसकी आधिकारिक घोषणा की थी. उन्होंने संगठन में भी लंबे समय तक काम किया है, इसी कारण उनके नाम पर विचार किया गया. राज्यसभा में जाने वाले अगले सदस्य के रूप में उनका नाम लगभग तय माना जा रहा है.
महाराष्ट्र में राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारी की घोषणा के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के नेता राजेंद्र जैन अचानक राज्य की राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं. विदर्भ के बाहर उनका नाम भले ही कम चर्चा में रहा हो, लेकिन भंडारा-गोंदिया और पूर्वी विदर्भ की राजनीति में राजेंद्र जैन का शब्द आज भी वजनदार माना जाता है. किसी समय पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल के निजी सहायक के रूप में काम करने वाले जैन अब राज्यसभा की दहलीज पर पहुंच गए हैं. इसलिए पार्लियामेंट तक का उनका सफर फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. राजेंद्र जैन की पहचान केवल राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता के रूप में नहीं, बल्कि प्रफुल्ल पटेल के अत्यंत निकटवर्ती और विश्वासपात्र सहयोगी के रूप में भी है. राजनीति के कई महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर भूमिका निभाई है. पूर्वी विदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस का संगठन खड़ा करना, स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना और चुनाव रणनीति तैयार करने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है. विदर्भ में राष्ट्रवादी की कई राजनीतिक लड़ाइयों की योजना शांत रहकर बनाने वाले उन्हें ’चाणक्य’ के रूप में जाना जाता है.
* पर्दे के पीछे के कार्यकर्ता से विधान परिषद सदस्य तक
संगठनात्मक कार्य के आधार पर राष्ट्रवादी कांग्रेस ने उन पर बड़ा भरोसा जताया. पार्टी ने उन्हें भंडारा-गोंदिया स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद में भेजा. विधान परिषद सदस्य के रूप में उन्होंने स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया. ग्रामीण विकास, सिंचाई, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से संबंधित मुद्दों पर उन्होंने निरंतर अपना पक्ष रखा.
* 2016 की हार, लेकिन राजनीतिक वजन कायम
2016 में भंडारा-गोंदिया स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद का चुनाव विदर्भ की सबसे कड़े मुकाबलों में से एक माना जाता है. इस चुनाव में भाजपा के परिणय फुके ने उन्हें मामूली अंतर से हराया था. हालांकि, इस हार के बाद भी जैन का राजनीतिक महत्व कम नहीं हुआ. इसके विपरीत, पार्टी संगठन में उनका प्रभाव बना रहा और राष्ट्रवादी ने उन्हें पूर्वी विदर्भ की जिम्मेदारी सौंपना जारी रखा.
* विदर्भ में राष्ट्रवादी के ’संकटमोचक’
पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रवादी कांग्रेस में कई राजनीतिक उथल-पुथल हुई. पार्टी विभाजन, नेताओं के दल-बदल और संगठनात्मक चुनौतियों के दौर में पूर्वी विदर्भ में पार्टी की ताकत बनाए रखने में राजेंद्र जैन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. भंडारा, गोंदिया और नागपुर जिलों में कार्यकर्ताओं का जाल मजबूत बनाए रखना, स्थानीय स्तर की नाराजगी को संभालना और कार्यकर्ताओं को पार्टी से जोड़कर रखना उनका बड़ा योगदान माना जाता है. इसी कारण विदर्भ में उन्हें राष्ट्रवादी का आधारस्तंभ माना जाता है.
* शिक्षा क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति
राजनीति के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में भी राजेंद्र जैन का प्रभाव है. विदर्भ की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं में से एक, गोंदिया एजुकेशन सोसाइटी के सचिव के रूप में उन्होंने लंबे समय तक काम किया है. इस संस्था के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने पहल की है. इसलिए उनकी छवि केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े एक प्रशासनिक नेतृत्व की भी है.
* राज्यसभा की उम्मीदवारी क्या निष्ठा का फल है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा के लिए उनका चयन केवल एक सीट का चयन नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी में उनकी दीर्घकालिक निष्ठा और संगठनात्मक कार्य की पहचान है. जब छगन भुजबल का नाम चर्चा में था, तब अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने राजेंद्र जैन पर भरोसा जताया. इसके पीछे प्रफुल्ल पटेल के साथ उनकी निकटता, विदर्भ में संगठनात्मक पकड़ और पार्टी के लिए किए गए लंबे समय के काम को प्रमुख कारण माना जा रहा है.
* राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण
राजेंद्र जैन को राज्यसभा भेजकर राष्ट्रवादी कांग्रेस ने विदर्भ को बड़ा प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया है. महाराष्ट्र की राजनीति में पश्चिम महाराष्ट्र, मुंबई और मराठवाड़ा के नेताओं का वर्चस्व रहा है, ऐसे में पूर्वी विदर्भ के एक संगठनात्मक नेता को दिल्ली में अवसर देना पार्टी का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय माना जा रहा है. अब राज्यसभा तक पहुंचे राजेंद्र जैन का सफर संयम, निष्ठा और पर्दे के पीछे रहकर की गई राजनीति का एक उदाहरण है. प्रसिद्धि से दूर रहकर संगठन खड़ा करने वाले इस नेता को अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी छाप छोड़ने का अवसर मिलेगा.





