वैद्यकीय क्षेत्र को कलंकित करने वाला मामला उजागर
नाबालिग की डिलीवरी, नवजात को बेचने की कोशिश

* 4 डॉक्टरों समेत 11 के खिलाफ एफआईआर
* पूर्व चिकित्सा अधीक्षक भी जांच के घेरे में
* मालेगांव में सनसनीखेज खुलासा, अज्ञात फोन कॉल से सामने आया मामला
मालेगांव/ दि. 8 – नासिक जिले के मालेगांव शहर में मानवता और चिकित्सा पेशे को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. एक 16 वर्षीय नाबालिग गर्भवती लड़की की कथित रूप से बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए निजी अस्पताल में सिजेरियन प्रसूति कराए जाने और उसके नवजात शिशु को बेचने की कोशिश किए जाने के आरोप में पुलिस ने चार डॉक्टरों सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस घटना से स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा जगत में भारी खलबली मच गई है.
सबसे गंभीर बात यह है कि मामले का मुख्य आरोपी बताया जा रहा डॉक्टर पहले मालेगांव सामान्य अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत रह चुका है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
* नाबालिग होने के बावजूद नहीं दी गई प्रशासन को सूचना
पुलिस के अनुसार 16 वर्षीय किशोरी गर्भवती थी. उसे प्रसव के लिए मालेगांव के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों को लड़की के नाबालिग होने की जानकारी होने के बावजूद न तो पुलिस को सूचना दी गई और न ही स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी गई. शिकायत के मुताबिक आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं और अनिवार्य दस्तावेजी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए अस्पताल में उसका सिजेरियन ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया. इस मामले में डॉ. किशोर डांगे, डॉ. किशोरी डांगे, डॉ. अनुजा शेवाले और डॉ. प्रीति जाधव के नाम सामने आए हैं.
* प्रसूति के बाद नाबालिग लड़की हुई लापता
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रसव के बाद संबंधित किशोरी अस्पताल से गायब हो गई. वहीं उसने जिस नवजात शिशु को जन्म दिया, उसका भी कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है. इसी दौरान नवजात शिशु को बेचने का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आने से मामले ने और गंभीर रूप धारण कर लिया. पुलिस को आशंका है कि पूरे प्रकरण में मानव तस्करी अथवा अवैध दत्तक प्रक्रिया जैसे कोण भी हो सकते हैं. इसी वजह से मामले की बहुआयामी जांच की जा रही है.
* अज्ञात फोन कॉल से हुआ खुलासा
पूरे मामले का खुलासा एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा किए गए फोन कॉल के बाद हुआ. बताया जाता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने मालेगांव सामान्य अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जितेंद्र डोलारे को फोन कर इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी दी थी. सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने प्राथमिक जांच शुरू की. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर डॉ. डोलारे की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया.
* 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस ने चार डॉक्टरों के अलावा नवसीन रफीक शेख, मोहम्मद फईम मोहम्मद शफीक, सार्थक प्रवीण जगताप समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया है. नाबालिग को गर्भवती करने वाले अज्ञात व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नाबालिग लड़की को अस्पताल तक कौन लेकर आया, प्रसव की व्यवस्था किसने की और नवजात को कथित रूप से बेचने की योजना में कौन-कौन लोग शामिल थे.
* मुख्य आरोपी डॉक्टर की विवादित पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार आरोपी डॉ. किशोर डांगे पूर्व में मालेगांव सामान्य अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक रह चुके हैं. उनके कार्यकाल के दौरान भी कई विवाद सामने आने की चर्चा रही है. इसी कारण इस प्रकरण ने चिकित्सा क्षेत्र में और अधिक सनसनी फैला दी है.
* 12 जून तक पुलिस हिरासत
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने रविवार सुबह डॉ. किशोर डांगे समेत कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया. बाद में उन्हें न्यायालय में पेश किया गया. न्यायालय ने प्राथमिक जांच की गंभीरता को देखते हुए डॉ. डांगे को 12 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
* कई सवालों के जवाब बाकी
यह मामला सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यदि लड़की नाबालिग थी तो अस्पताल प्रशासन ने अनिवार्य सूचना क्यों नहीं दी, नवजात शिशु फिलहाल कहां है, नाबालिग मां का पता क्यों नहीं चल पा रहा है और क्या वास्तव में शिशु की बिक्री का प्रयास हुआ था. इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस जांच से सामने आने की उम्मीद है. फिलहाल मालेगांव पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से मामले की गहन जांच कर रहे हैं. यह प्रकरण चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही, नैतिकता और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है.





