महिला कर्मचारी के मानसिक उत्पीड़न का मामला पहुंचा मंत्री स्तर तक
पालकमंत्री बावनकुले ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से की सीधी चर्चा

* पीड़ित महिला ने न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या की चेतावनी दी थी
* ऑडियो क्लिप, पेन ड्राइव और दस्तावेज पुलिस को सौंपे, जांच शुरू
अमरावती/ दि. 8- अमरावती स्थित राज्य उत्पादन शुल्क विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी द्वारा विभाग के ही एक वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न, अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए जाने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. मामला अब केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे राज्य सरकार के उच्च स्तर तक पहुंच गया है. प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्वयं हस्तक्षेप करते हुए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से दूरभाष पर चर्चा की है.
आबकारी विभाग में वाहन चालक के रूप में कार्यरत महिला कर्मचारी ने आज अमरावती के दौरे पर आए राजस्व मंत्री व पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात करते हुए उन्हें अपना निवेदन सौंपा तथा आरोप लगाया है कि आबकारी विभाग में कार्यरत संतोष वायाल नामक एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा लंबे समय से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. महिला का कहना है कि उस पर उसकी इच्छा के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए दबाव बनाया जाता रहा और विरोध करने पर उसे मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. लगातार बढ़ते दबाव और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर महिला ने संबंधित मामले की शिकायत वरिष्ठ स्तर पर पहुंचाई. इतना ही नहीं, न्याय नहीं मिलने की स्थिति में उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाने की चेतावनी भी दी थी. पीड़ित महिला ने पालकमंत्री बावनकुले को यह भी बताया कि उसने राजापेठ पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि अधिकारी द्वारा उसके साथ लगातार ऐसा व्यवहार किया गया, जिससे उसे मानसिक पीड़ा और असुरक्षा की भावना का सामना करना पड़ा.
उक्त महिला ने अपनी शिकायत के समर्थन में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराने की बात पालकमंत्री बावनकुले से कही. इनमें कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, पेन ड्राइव में सुरक्षित डिजिटल सामग्री तथा अन्य दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं. पुलिस इन साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके. पुरे मामले की जानकारी को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद जिला पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इसे अत्यंत गंभीर विषय मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सीधे उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से संपर्क कर पूरे प्रकरण की जानकारी दी तथा पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया.
बताया जा रहा है कि पालकमंत्री को महिला की स्थिति और उसके द्वारा व्यक्त की गई आत्महत्या की चेतावनी की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी. वहीं उपमुख्यमंत्री स्तर पर भी मामले की जानकारी लिए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में इस प्रकरण को लेकर गंभीरता बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार मामले की जांच दो स्तरों पर आगे बढ़ सकती है. एक ओर पुलिस शिकायत के आधार पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर भी पूरे घटनाक्रम की समीक्षा किए जाने की संभावना है. यदि प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध कराए गए डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा. इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य वातावरण और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी को न्याय के लिए आत्महत्या जैसी चेतावनी देने की नौबत आ रही है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन, पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व की नजर बनी हुई है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के लिए संबंधित विभाग तथा प्रशासन क्या कदम उठाते हैं.





