हवामान के गलत पूर्वानुमान से संतरा उत्पादक किसान संकट में

सूखने लगे बगीचे, कृषि विभाग से उचित मार्गदर्शन की मांग

अमरावती /दि.11 – मौसम विशेषज्ञों द्वारा समय से पहले बारिश होने के पूर्वानुमान पर भरोसा कर मृग बहार की तैयारी करने वाले संतरा उत्पादक किसान अब गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. अपेक्षित बारिश नहीं होने से तनाव (ताण) पर छोड़े गए संतरे के पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे हजारों किसानों की चिंता बढ़ गई है.
संतरा उत्पादन में मृग बहार का विशेष महत्व होता है. बेहतर बहार के लिए किसान कुछ समय तक बागों में सिंचाई बंद कर पेड़ों को तनाव की स्थिति में रखते हैं. इसके बाद मानसून के आगमन के अनुसार सिंचाई और प्रबंधन की योजना बनाई जाती है. इस वर्ष मौसम विशेषज्ञों ने मानसून के जल्द आने का अनुमान जताया था, जिसके आधार पर किसानों ने अपनी बागों को अप्रैल से ही तनाव पर छोड़ दिया. लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से संतरे के पेड़ों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है. कई बागों में पत्तियां झड़ने लगी हैं, शाखाएं सूख रही हैं और बहार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. हालात संभालने के लिए किसानों को अब अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे बिजली, डीजल और मजदूरी का खर्च भी बढ़ गया है. किसानों का कहना है कि मौसम पूर्वानुमान पर आधारित उनका पूरा कृषि नियोजन गलत साबित हुआ है. पहले से बढ़ी उत्पादन लागत के बीच इस स्थिति ने आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है.
संतरा उत्पादक किसान रुपेश वालके ने कहा कि मौसम विशेषज्ञों के पूर्वानुमान पर भरोसा कर किसानों ने मृग बहार की तैयारी की थी, लेकिन बारिश नहीं होने से लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई बागें संकट में आ गई हैं. उन्होंने कृषि विभाग से मांग की है कि संतरा बागों को बचाने के लिए तत्काल मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जाए. कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौसम पूर्वानुमान जारी करते समय स्थानीय परिस्थितियों और संभावित बदलावों का अधिक सटीक आकलन किया जाना चाहिए, क्योंकि गलत अनुमान का सबसे अधिक नुकसान फल उत्पादक किसानों को उठाना पड़ता है.

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