हर्षजीत देशमुख को किसने लाया था अमरावती ?
जिला बैंक के साथ हर्षजीत का ‘सॉफ्टवेयर’ कनेक्शन

* वर्च्युअल गैलेक्सी इम्फोटे के सॉफ्टवेयर जिला बैंक में कार्यरत
* सन 2019-20 से जिला बैंक के साथ देशमुख के व्यवहार
* बबलू देशमुख व वीरेंद्र जगताप के साथ हैं पुराने संबंध
* कांग्रेस प्रत्याशी देशमुख के यू-टर्न से पार्टी के स्थानीय नेता फंसे
* अब हर्षजीत देशमुख की उम्मीदवारी पर उठ रहे सवाल
* जिला बैंक से जुड़े पुराने संबंधों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
अमरावती/ दि. 12- अमरावती स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव से पहले कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है. कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय नेताओं का एक वर्ग यह पूछ रहा है कि आखिर नागपुर के उद्योगपति हर्षजीत देशमुख को अमरावती की राजनीति में आगे बढ़ाने के पीछे कौन लोग थे और उन्हें टिकट दिलाने में किसकी भूमिका रही. वहीं चुनाव प्रचार के बीच देशमुख के सक्रिय नहीं रहने और अस्पताल में भर्ती होने की खबरों ने विवाद को और बढ़ा दिया है.
* टिकट मिलने के बाद से ही बना रहा विवाद
बता दें कि कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार एवं पूर्व मंत्री प्रवीण पोटे के मुकाबले नागपुर के सॉफ्टवेयर उद्यमी हर्षजीत देशमुख को उम्मीदवार बनाया था. पार्टी नेतृत्व ने इसे रणनीतिक फैसला बताया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शुरुआत से ही इस चयन पर असहमति जताई थी. इसके बावजूद प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर कार्यकर्ता प्रचार में जुट गए थे. हालांकि चुनाव प्रचार के महत्वपूर्ण दौर में हर्षजीत देशमुख के स्वास्थ्य कारणों से नागपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती होने तथा कई दिनों तक स्थानीय नेताओं के संपर्क में नहीं रहने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन में असहजता बढ़ गई.
* जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक से जुड़े पुराने संबंध चर्चा में
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि हर्षजीत देशमुख की कंपनी वर्चुअल गैलेक्सी इन्फोटेक लिमिटेड का अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक से कई वर्षों से व्यावसायिक संबंध रहा है. हर्षजीत देशमुख के नागपुर स्थित वर्च्युअल गैलेक्सी इन्फोटेक लि. नामक कंपनी तथा जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के बीच विगत 6 वर्षो से करार चला आ रहा है और उस करार के अनुसार वर्च्युअल गैलेक्सी इन्फोटेक कंपनी के सॉफ्टवेयर आज भी जिला बैंक में कार्यरत है. जिस समय देशमुख की कंपनी और जिला बैंक के बीच वर्ष 2019-20 में करार हुआ था. तब जिला बैंक के अध्यक्ष पद पर कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख हुआ करते थे. साथ ही कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप भी बैंक के संचालक हुआ करते थे. जानकारी के मुताबिक इन्हीं दोनों नेताओं ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के सामने हर्षजीत देशमुख का नाम रखा था. इसी आधार पर कुछ राजनीतिक वर्ग यह दावा कर रहे हैं कि विगत चुनाव में कांग्रेस की स्थिति एवं उस समय कांग्रेस प्रत्याशी अनिल माधोगढिया द्बारा लगाए गये आरोपों को देखते हुए पूरी संभावना है कि संभवत: पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल का रास्ता आसान करने के लिए यह पूरी फिल्डिंग लगाई गई थी. हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नेताओं की ओर से भी इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
* अमरावती में लाए कौन? बना राजनीतिक सवाल
कांग्रेस के भीतर अब यह प्रश्न प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि जिस उम्मीदवार का स्थानीय राजनीति से सीधा जुड़ाव सीमित माना जा रहा था, उसे टिकट दिलाने के पीछे किन नेताओं की भूमिका रही. पार्टी कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि स्थानीय दावेदारों की अनदेखी कर बाहरी चेहरे को मौका देना संगठन के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस की संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और चुनाव के अंतिम चरण में पार्टी को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है.
* पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने भी लगाए गंभीर आरोप
इधर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री धरीहेारींळ ढहरर्ज्ञीी ने भी चुनाव के दौरान गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि चुनाव में धनबल और कथित खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है. दूसरी ओर हर्षजीत देशमुख ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव मैदान में बने रहने की बात कही है.
* कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असमंजस
उम्मीदवार को लेकर पैदा हुए विवाद और प्रचार अभियान में आई सुस्ती के कारण कांग्रेस के स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है. कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि चुनाव के निर्णायक दौर में इस तरह की परिस्थितियों से पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है. वहीं भाजपा और महायुति खेमे का दावा है कि उनके पास पर्याप्त समर्थन है और विपक्ष के आरोप केवल आंतरिक असंतोष को छिपाने का प्रयास हैं.
* राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
अमरावती एमएलसी चुनाव अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन, नेतृत्व की रणनीति और संगठनात्मक समन्वय को लेकर भी बहस का विषय बन गया है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि हर्षजीत देशमुख को लेकर उठे सवालों का चुनावी परिणाम पर कितना असर पड़ता है.





