अधिक मास में चांदी की चप्पलों की भेंट बनी चर्चा का विषय

बारणे परिवार ने बेटियों और बहू को दिया अनोखा उपहार

पुणे/ दि. 13- अधिक मास के पावन अवसर पर जहां लोग अपनी बेटियों और दामादों को पारंपरिक रूप से उपहार एवं वाण भेंट करते हैं, वहीं पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ स्थित एक परिवार ने अपनी बेटियों और बहू के प्रति समान स्नेह का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है. बारणे परिवार ने अपनी दो बेटियों के साथ-साथ बहू को भी एक-एक जोड़ी चांदी की विशेष चप्पलें उपहार स्वरूप भेंट की हैं. इस अनोखे उपहार की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है.
परिवार प्रमुख सचिन बारणे ने अधिक मास के अवसर पर अपनी दोनों बेटियों को चांदी की चप्पलें वाण के रूप में देने का निर्णय लिया. लेकिन उन्होंने केवल बेटियों तक ही यह सम्मान सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी बहू को भी बेटी के समान मानते हुए उसे भी चांदी की चप्पलों की जोड़ी भेंट की. परिवार के इस कदम को सामाजिक समरसता और पारिवारिक समानता का सुंदर संदेश माना जा रहा है.
* एक जोड़ी की कीमत लगभग एक लाख रुपये
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक चांदी की चप्पल का वजन लगभग 250 ग्राम है. तीन जोड़ी चप्पलों का कुल वजन करीब 750 ग्राम बताया गया है. वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार प्रत्येक जोड़ी की कीमत लगभग एक लाख रुपये आंकी जा रही है.
इन चप्पलों को आकर्षक बनाने के लिए उनमें विशेष नक्काशी, रंगीन पत्थर तथा घुंघरू लगाए गए हैं. खास बात यह है कि ये केवल सजावटी वस्तु नहीं हैं, बल्कि इन्हें दैनिक उपयोग में भी पहना जा सकता है.
* राजस्थान के कारीगरों ने तैयार की विशेष चप्पलें
बारणे परिवार ने ये चांदी की चप्पलें पुणे के प्रसिद्ध आभूषण प्रतिष्ठान रांका ज्वेलर्स से बनवाई हैं. इन्हें राजस्थान के कुशल कारीगरों द्वारा लगभग आठ दिनों में तैयार किया गया. चप्पलों के डिजाइन और निर्माण में विशेष सावधानी बरती गई ताकि पहनने वाले को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
* बहू को बेटी समान सम्मान देने की मिसाल
परिवार के इस निर्णय की सबसे अधिक सराहना इस बात को लेकर हो रही है कि बहू को भी बेटियों के समान सम्मान और स्नेह दिया गया. समाज में जहां अक्सर बेटियों और बहुओं के बीच भेदभाव की चर्चा होती है, वहीं बारणे परिवार ने समानता और अपनत्व का प्रेरणादायी संदेश दिया है.
* अधिक मास में दान और उपहार का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है. इस दौरान दान, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान तथा बेटियों को वाण देने की परंपरा विशेष महत्व रखती है. मान्यता है कि इस माह में सोना-चांदी अथवा अन्य मूल्यवान वस्तुओं का दान और उपहार शुभ फलदायी होता है.
* ‘हौसले और स्नेह का कोई मूल्य नहीं’
आभूषण व्यवसायियों के अनुसार, अधिक मास के दौरान कई परिवार अपनी बेटियों और दामादों को विशेष उपहार देते हैं. इसी क्रम में एक ग्राहक ने अपने दामाद के लिए चांदी की मोजड़ी भी बनवाई है. यह मोजड़ी भी दैनिक उपयोग के योग्य बनाई गई है तथा उस पर आकर्षक मीनाकारी का कार्य किया गया है.
बारणे परिवार की यह पहल न केवल उनकी समृद्ध परंपरा और पारिवारिक संस्कारों को दर्शाती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि परिवार में बहू और बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए. यही कारण है कि लाखों रुपये मूल्य की इन चांदी की चप्पलों से अधिक चर्चा परिवार की सोच और संस्कारों की हो रही है.

Back to top button