हर्षजीत देशमुख ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
स्थानीय नेताओं की छवि धूमिल करने की साजिश की चर्चा

* पार्टी में मचा जबर्दस्त राजनीतिक घमासान
अमरावती/दि.16- अमरावती स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहे हर्षजीत देशमुख से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पार्टी के भीतर अब इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या पूरे घटनाक्रम के माध्यम से कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व को बदनाम करने और कार्यकर्ताओं व मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का कोई सुनियोजित प्रयास किया गया था.
जानकारी के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की घोषणा के बाद महाविकास आघाड़ी की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार के चयन को लेकर मंथन चल रहा था. इसी दौरान हर्षजीत देशमुख ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनील देशमुख से मुलाकात कर अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी. सूत्रों के मुताबिक डॉ. देशमुख ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया था कि उम्मीदवार चयन का निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है और इसके लिए उन्हें सांसद बलवंत वानखडे व पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी संपर्क करना चाहिए. इसके बाद हर्षजीत देशमुख ने सांसद बलवंत वानखडे व पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर पूर्व विधायक वीरेंद्र जगताप व कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख तथा अन्य कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की. बाद में उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से संपर्क साधा और उन्हें कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवारी प्रदान की गई. पार्टी की ओर से आवश्यक दस्तावेज दिए जाने के बाद उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया.
* प्रचार से दूरी ने बढ़ाए सवाल
नामांकन दाखिल होने के बाद अन्य दलों के उम्मीदवार चुनाव प्रचार में सक्रिय दिखाई दे रहे थे, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख सार्वजनिक रूप से कम नजर आए. इसी बीच नागपुर के एक अस्पताल से उनकी ओर से मीडिया को दिए गए बयान सामने आए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. उनकी तबीयत को लेकर अलग-अलग दावे किए गए. कभी थकान, कभी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और बाद में चिकित्सा उपचार को लेकर सामने आई जानकारियों ने पूरे मामले को और उलझा दिया. इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं फैलने लगीं.
* स्थानीय नेतृत्व पर आरोपों की कोशिश?
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि हर्षजीत देशमुख को अमरावती की राजनीति में लाने के पीछे कुछ स्थानीय नेताओं का हाथ होने की बातें जानबूझकर प्रचारित की गईं, जबकि संबंधित नेताओं का उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था. इसके बावजूद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चाएं फैलने से कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व की छवि प्रभावित हुई.
* समन्वय की कमी का उठा फायदा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूरे प्रकरण में कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी खुलकर सामने आई. इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए नेतृत्व के खिलाफ अविश्वास और भ्रम का माहौल तैयार हुआ. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी रही.
* पार्टी में मंथन शुरू
हर्षजीत देशमुख प्रकरण के बाद कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन शुरू हो गया है. कई नेताओं का मानना है कि उम्मीदवार चयन के दौरान पर्याप्त राजनीतिक पड़ताल नहीं किए जाने से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा. वहीं कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो. फिलहाल यह मामला अमरावती ही नहीं बल्कि प्रदेश कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है. आने वाले दिनों में इस प्रकरण को लेकर और नए खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है.





