सरकारी स्कूलों को गोद लेंगे अधिकारी

छात्रों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

अमरावती/दि.17– सरकारी और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने तथा घटते प्रवेश को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. अब विभाग के क्लास-1 और क्लास-2 अधिकारियों को जिले के स्कूल गोद लेने होंगे. इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और प्रवेश संख्या बढ़ाना है.
योजना के तहत अधिकारी वर्षभर अपने गोद लिए गए स्कूलों का नियमित दौरा करेंगे. वे विद्यालयों की शैक्षणिक स्थिति, भौतिक सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा कर शिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन देंगे. अमरावती जिले में वर्तमान में जिला परिषद के 1,575 स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 2.5 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए ये स्कूल शिक्षा का प्रमुख आधार हैं.
* ‘एक अधिकारी, एक स्कूल’ अभियान
घटती छात्र संख्या को रोकने के लिए शिक्षा विस्तार अधिकारी, समूह शिक्षा अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ‘एक अधिकारी, एक स्कूल’ के आधार पर एक वर्ष के लिए विद्यालयों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन समितियों को प्रवेश बढ़ाने के लक्ष्य दिए जाएंगे, ताकि क्षेत्र के अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में हो सके. साथ ही स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा.
* क्यों लिया गया यह फैसला?
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी तथा निजी स्कूलों के बढ़ते आकर्षण के कारण अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूरी बना रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में जिला परिषद और अन्य सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. अंग्रेजी माध्यम की सुविधाओं की कमी और निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान को इस स्थिति का प्रमुख कारण माना जा रहा है.
* नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता पर जोर
गोद लिए गए स्कूलों के दौरे के दौरान अधिकारी विद्यार्थियों की पढ़ने, लिखने और गणितीय क्षमता का मूल्यांकन करेंगे. शिक्षकों की समस्याओं को समझने के साथ स्कूल प्रबंधन और शैक्षणिक गतिविधियों की भी समीक्षा की जाएगी. शिक्षा विभाग का मानना है कि अधिकारियों की सीधी भागीदारी से स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा.
* समय पर मिलेंगी सभी सुविधाएं
अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध हो जाए. इसके अलावा डिजिटल क्लासरूम, स्वच्छ पेयजल और छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय जैसी सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा और विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट को रोकने में मदद मिलेगी.

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