20 साल पुराने पवनराजे हत्याकांड में सभी आरोपी बरी
सबूतों के अभाव में पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को मिली राहत

ओमराजे बोले- फैसला दुर्भाग्यपूर्ण, हाईकोर्ट में करेंगे चुनौती
मुंबई/धाराशिव/ दि. 20- महाराष्ट्र की राजनीति को दो दशक पहले झकझोर देने वाले बहुचर्चित पवनराजे निंबालकर दोहरे हत्याकांड में शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मुंबई सत्र न्यायालय ने पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. करीब 20 वर्षों तक चले इस चर्चित मुकदमे में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. फैसले के बाद जहां पाटिल समर्थकों ने राहत की सांस ली, वहीं दिवंगत नेता पवनराजे निंबालकर के परिवार ने इसे निराशाजनक बताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है.
* 3 जून 2006 को हुई थी सनसनीखेज हत्या
3 जून 2006 को नवी मुंबई के कलंबोली क्षेत्र में पवनराजे निंबालकर और उनके चालक समद काजी की अज्ञात हमलावरों ने गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी. उस समय इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक भूचाल ला दिया था. जांच के दौरान मामला स्थानीय पुलिस से होते हुए अंततः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया. सीबीआई ने दावा किया था कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते हत्या की साजिश रची गई थी और इसके लिए 25 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी.
* अदालत ने जांच और साक्ष्यों पर उठाए सवाल
विशेष न्यायाधीश एस. आर. नावंदर की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले का मुख्य आधार बने माफी के गवाह पारसमल जैन की गवाही भरोसेमंद नहीं पाई गई. न्यायालय ने टिप्पणी की कि गवाह ने कई मौकों पर अपने बयान बदले. हथियारों की खरीद, पैसों के लेन-देन और आरोपियों से मुलाकात संबंधी दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे. कथित रेल यात्रा, गेस्ट हाउस में ठहरने तथा अन्य घटनाक्रमों के ठोस प्रमाण पेश नहीं किए गए. मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सहित कई महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे. अदालत ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
* 127 गवाहों की हुई जांच
इस बहुचर्चित मामले में अदालत के समक्ष कुल 127 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. हालांकि लंबी सुनवाई के बावजूद अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया. न्यायालय ने यह भी कहा कि किसी लोकप्रिय जननेता की हत्या निश्चित रूप से अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन दोषसिद्धि के लिए कानूनी मानकों के अनुरूप ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं.
* ओमराजे निंबालकर ने जताई नाराजगी
फैसले के बाद सांसद ओमराजे निंबालकर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. उन्होंने कहा, यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है. हम न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं हैं. हम उच्च न्यायालय में अपील करेंगे और न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे. निंबालकर परिवार पिछले 20 वर्षों से इस मामले में न्याय की मांग कर रहा था.
* शिंदे बोले- फैसला स्वीकार, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी रहेगी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मामला बेहद गंभीर था और उन्हें भी आरोपियों के दोषी सिद्ध होने की उम्मीद थी. हालांकि अदालत के निर्णय का सम्मान करना होगा. उन्होंने कहा कि सीबीआई उच्च न्यायालय में अपील करने जा रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई आगे बढ़ेगी.
* पद्मसिंह पाटिल पक्ष ने फैसले का किया स्वागत
फैसले के बाद पद्मसिंह पाटिल के अधिवक्ता भूषण महाडिक ने कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन कर निष्पक्ष निर्णय दिया है. वहीं पाटिल के पुत्र राणा जगजितसिंह पाटिल ने दावा किया कि उनके पिता के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया था और आखिरकार न्यायालय ने उन्हें न्याय दिया है.
* राजनीति में भी बढ़ेगा असर
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल न्यायालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धाराशिव और राज्य की राजनीति पर भी पड़ेगा. खासकर ओमराजे निंबाळकर के संभावित राजनीतिक कदमों और आगामी चुनावी समीकरणों पर इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है. करीब दो दशक तक महाराष्ट्र की सबसे चर्चित राजनीतिक हत्या के रूप में चर्चा में रहे इस मामले का ट्रायल कोर्ट स्तर पर पटाक्षेप हो गया है, लेकिन हाईकोर्ट में संभावित अपील के कारण यह कानूनी लड़ाई अभी समाप्त होती नहीं दिख रही है.





