इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया में ‘एजेंट नेटवर्क’ का जाल!
साइबर कैफे और फर्जी काउंसिलिंग सेंटरों से छात्रों का भविष्य खतरे में

अमरावती /दि.7– बारहवीं और सीईटी/जेईई परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने के बाद राज्यभर में इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया तेज हो गई है. इसी बीच साइबर कैफे और अनधिकृत एडमिशन काउंसिलिंग सेंटरों का जाल भी तेजी से फैलता नजर आ रहा है. प्रवेश प्रक्रिया के नाम पर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर निजी कॉलेजों में दाखिला दिलाने के बदले मोटा कमीशन कमाने का खेल चल रहा है. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस कारण अनेक मेधावी छात्रों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप प्रतिष्ठित और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है.
* कमीशन के लिए छात्रों को गलत दिशा में मोड़ने का आरोप
इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी फॉर्म भरने, दस्तावेज सत्यापन और विकल्प (ऑप्शन) फॉर्म तैयार करने के लिए साइबर कैफे या निजी काउंसिलिंग सेंटरों का सहारा लेते हैं. आरोप है कि कुछ निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इन केंद्रों को प्रति विद्यार्थी हजारों रुपये का कमीशन देते हैं. इसके बदले छात्रों के ऑप्शन फॉर्म में उन कॉलेजों को प्राथमिकता दी जाती है, जहां एजेंटों को आर्थिक लाभ मिलता है. परिणामस्वरूप अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी अपनी पसंद के कॉलेज या शाखा से वंचित रह जाते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनके विकल्प उनकी जानकारी के बिना बदले गए थे.
* ऑप्शन फॉर्म में हेरफेर से बिगड़ रहा करियर
विशेषज्ञों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण ऑप्शन फॉर्म भरना होता है. इसमें कॉलेजों और शाखाओं की प्राथमिकता तय की जाती है. यदि यह सूची गलत भर दी जाए तो छात्र की मेरिट अच्छी होने के बावजूद उसे मनचाहा कॉलेज नहीं मिल सकता. कई मामलों में विद्यार्थियों की इच्छा के विपरीत निजी संस्थानों को प्राथमिकता देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है. प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्र और अभिभावक ठगी का एहसास होने पर भी कुछ नहीं कर पाते.
* मेधावी छात्रों में बढ़ रही निराशा
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि विद्यार्थी वर्षभर कड़ी मेहनत कर सीईटी और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करते हैं. लेकिन गलत मार्गदर्शन अथवा फर्जी काउंसिलिंग के कारण जब उन्हें अपेक्षित कॉलेज नहीं मिलता, तो वे मानसिक तनाव और निराशा का शिकार हो जाते हैं. अभिभावकों का कहना है कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया में हुई एक छोटी सी गलती पूरे करियर की दिशा बदल सकती है. कुछ मामलों में छात्रों के मानसिक रूप से टूट जाने और आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाएं भी सामने आने से चिंता बढ़ गई है.
* विश्वविद्यालय ने जारी की चेतावनी
इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. मिलिंद बारहाते ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को सावधान रहने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि प्रवेश फॉर्म भरने और दस्तावेज सत्यापन के लिए केवल राज्य सामाईक प्रवेश परीक्षा (सीईटी) कक्ष द्वारा अधिकृत सुविधा केंद्रों का ही उपयोग किया जाए. किसी भी साइबर कैफे संचालक, एजेंट या निजी व्यक्ति को अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड न दें. फॉर्म जमा करने से पहले कॉलेजों के कोड, शाखा और प्राथमिकता क्रम स्वयं जांचना आवश्यक है.
* अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सावधानियां
केवल अधिकृत सुविधा केंद्रों पर ही प्रवेश संबंधी प्रक्रिया पूरी करें. अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य को न दें. ऑप्शन फॉर्म सबमिट करने से पहले कॉलेज और शाखा की प्राथमिकता स्वयं जांचें. किसी एजेंट या काउंसिलिंग सेंटर के दबाव में आकर विकल्प न भरें. प्रवेश संबंधी जानकारी केवल अधिकृत सरकारी वेबसाइट और संस्थानों से प्राप्त करें. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तत्काल संबंधित अधिकारियों से करें.
* प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
शिक्षाविदों और अभिभावक संगठनों ने राज्य सरकार तथा सीईटी प्राधिकरण से अनधिकृत काउंसिलिंग सेंटरों और एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे नेटवर्क पर अंकुश लगाना समय की आवश्यकता है, ताकि मेधावी छात्रों को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर मिल सकें और प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे.





