अमरावती जीएमसी में शिक्षकों के 60 प्रतिशत पद रिक्त
डफरीन अस्पताल की अतिरिक्त जिम्मेदारी पर उठे सवाल

* नवजात शिशुओं की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था फिर कटघरे में
* 79 में से 48 अध्यापक पद खाली
अमरावती/दि.31– जिला महिला अस्पताल डफरीन के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद अमरावती की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. इस बीच एक और चिंताजनक तथ्य सामने आया है. डफरीन अस्पताल का प्रशासनिक नियंत्रण जल्द ही चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपे जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी संभालने वाला अमरावती शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसी) स्वयं भारी स्टाफ संकट से जूझ रहा है.
महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयूएचएस) की मार्च 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के तहत जीएमसी अमरावती में अध्यापकों के कुल 79 स्वीकृत पदों में से 48 पद रिक्त हैं. यानी संस्थान में करीब 60 प्रतिशत शिक्षकीय पद खाली हैं और केवल 40 प्रतिशत आवश्यक अध्यापक उपलब्ध हैं. ऐसे में डफरीन अस्पताल की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालने को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है.
* प्रोफेसर से लेकर सहायक प्राध्यापक तक पद खाली
रिपोर्ट के अनुसार प्रोफेसर के 16 पदों में से 13 रिक्त, एसोसिएट प्रोफेसर के 25 पदों में से 10 रिक्त, असिस्टेंट प्रोफेसर के 38 पदों में से 25 रिक्त है. पिछले दो वर्षों से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का कामकाज सीमित मानव संसाधनों के सहारे चल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है.
* 100 एमबीबीएस विद्यार्थियों का भविष्य भी चिंता का विषय
अमरावती जीएमसी में हर वर्ष 100 विद्यार्थियों को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाता है. चिकित्सा शिक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ अनुभवी अध्यापकों के मार्गदर्शन में व्यावहारिक प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन जब आवश्यक संख्या में शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं, तब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा कैसे मिलेगी, यह बड़ा प्रश्न बन गया है.
* बाल रोग विभाग में केवल दो अध्यापकों के भरोसे व्यवस्था
एमयूएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, एनएमसी मानकों के तहत बाल रोग विभाग में एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर और दो असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल चार अध्यापकों की आवश्यकता है. लेकिन वर्तमान में विभाग में केवल एक प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं. यही विभाग भविष्य में डफरीन अस्पताल के नवजात और बाल रोगियों की सेवाओं से भी जुड़ने वाला है. ऐसे में पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे विभाग पर अतिरिक्त भार पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
* प्रोत्साहन के अभाव में नहीं भर रहे पद
महाराष्ट्र राज्य चिकित्सा शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. समीर गोलावर ने कहा कि छोटे और नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों में योग्य अध्यापकों को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति ने विशेष प्रोत्साहन भत्ता (स्पेशल इंसेंटिव) देने की सिफारिश की थी. लेकिन अब तक इस सिफारिश को लागू नहीं किया गया है. उनके अनुसार, जब तक सरकार आर्थिक प्रोत्साहन और बेहतर सेवा सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराएगी, तब तक इन मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को भरना बेहद कठिन रहेगा.
* डफरीन हादसे के बाद बढ़ी चिंता
डफरीन अस्पताल में हुए अग्निकांड और तीन नवजातों की मौत के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन की उपलब्धता को लेकर गंभीर बहस शुरू हो गई है. ऐसे समय में जीएमसी अमरावती में शिक्षकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी सामने आने से यह सवाल और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या मौजूदा व्यवस्था डफरीन अस्पताल की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से संभाल पाएगी. स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि डफरीन को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने से पहले आवश्यक मानव संसाधन, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा मरीजों और विद्यार्थियों दोनों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.





