90 हजार पर्यावरणपूरक गणेश मूर्तियों से गूंजेगा गणेशोत्सव

कीमतों में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी

* शहर सहित जिलेभर में गणेशोत्सव की तैयारियां
अमरावती /दि.31- गणेशोत्सव के आगमन में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं और शहर सहित जिलेभर में तैयारियां तेज हो गई हैं. इस वर्ष गणेशोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला उत्सव बनने जा रहा है. अमरावती के मूर्तिकारों ने पिछले आठ महीनों की मेहनत से लगभग 90 हजार से 1 लाख तक पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है.
मूर्तिकारों के अनुसार, गणेश प्रतिमा निर्माण के लिए विशेष मिट्टी नागपुर जिले के सावरगांव क्षेत्र से मंगाई जाती है. मिट्टी को लाने के बाद उसकी शुद्धिकरण प्रक्रिया की जाती है और आधुनिक पगमिल मशीन की सहायता से उसे प्रतिमा निर्माण योग्य बनाया जाता है. इसके बाद विभिन्न आकारों के सांचों में मिट्टी भरकर गणेश प्रतिमाओं को आकार दिया जाता है.
इस वर्ष बाजार में 6 इंच से लेकर 3 फीट तक की 25 से 30 प्रकार की गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध रहेंगी. अधिकांश प्रतिमाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल रंगाई तथा सजावट का अंतिम चरण चल रहा है. मूर्तियों पर मुकुट, आभूषण, वस्त्र, नेत्र और अन्य कलात्मक सज्जा का कार्य तेजी से किया जा रहा है.
* 11 सितंबर से शुरू होगी बिक्री
मूर्तिकारों के अनुसार आगामी 11 सितंबर से गणेश प्रतिमाओं की बिक्री शुरू होगी. इसके चलते मूर्तिकारों और उनके परिवारों की व्यस्तता बढ़ गई है. प्रतिमाओं की कीमतें इस वर्ष पिछले साल की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी हैं, जिसका मुख्य कारण मिट्टी, रंग और अन्य निर्माण सामग्री की बढ़ी हुई लागत है. बाजार में इस वर्ष पर्यावरणपूरक गणेश प्रतिमाएं लगभग 200 रुपये से शुरू होकर विभिन्न आकारों और डिजाइनों में उपलब्ध होंगी.
* पांच पीढ़ियों से जीवित है परंपरा
अमरावती के मूर्तिकार एवं कुंभार माटीकाम सुधार समिति के सचिव कैलास रोटले ने बताया कि उनका परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से गणेश प्रतिमा निर्माण के कार्य से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि यह केवल व्यवसाय नहीं बल्कि एक कला, परंपरा और श्रद्धा का विषय है. नई पीढ़ी भी इस कला में रुचि ले रही है, जिससे इस पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है.
* पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गणेशोत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के बजाय मिट्टी की प्रतिमाओं को अपनाने की बढ़ती जागरूकता के कारण इस वर्ष पर्यावरण-अनुकूल गणेश मूर्तियों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. मूर्तिकारों का मानना है कि मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग से जल प्रदूषण कम होगा और गणेशोत्सव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश समाज तक पहुंचेगा. इस प्रकार इस वर्ष अमरावती में गणेशोत्सव श्रद्धा, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के संगम के रूप में मनाया जाएगा.

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