जिला पुस्तक महोत्सव की शानदार शुरुआत

ग्रंथ दिंडी के साथ दो दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ

अंधविश्वास और मनगढ़ंत कथाओं से बाहर निकलने के लिए वास्तविक साहित्य पढ़ने की अपील
अमरावती/दि.5 – अंधविश्वास और मनगढ़ंत कहानियों के प्रभाव से बाहर निकलने के लिए बहुजन समाज को संतों, समाज सुधारकों और विचारकों द्वारा लिखे गए वास्तविकता पर आधारित साहित्य का अध्ययन करना चाहिए. केवल किताबें पढ़ना ही नहीं, बल्कि उनमें दिए गए विचारों को अपने जीवन में उतारना भी जरूरी है. यह अपील लिटरेरी एंड टैलेंट लिटरेचर एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष विट्ठल कुलट ने की.
महाराष्ट्र सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत ग्रंथालय संचालनालय तथा जिला ग्रंथालय अधिकारी कार्यालय की ओर से राज्य सांस्कृतिक नीति के तहत 3 और 4 अक्टूबर को मोर्शी के पंजाब बाबा ऑडिटोरियम में जिला पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया गया. महोत्सव का उत्साहपूर्ण शुभारंभ ग्रंथ दिंडी के साथ हुआ.

* ग्रंथ दिंडी से हुआ शुभारंभ
जिला पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर ग्रंथ दिंडी निकाली गई. इस दौरान पुस्तक और साहित्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया. नायब तहसीलदार विनोद वानखेड़े ने ग्रंथ दिंडी की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में विट्ठल कुलट ने अपने अध्यक्षीय भाषण में पुस्तक वाचन के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि समाज में वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए संतों, समाज सुधारकों और विचारकों के साहित्य को पढ़ना आवश्यक है. पुस्तकों के माध्यम से समाज को दिशा देने वाले विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की भी जरूरत है.

* किताबों के महत्व पर रखे विचार
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य एवं ग्रंथालय क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तियों ने भी पुस्तकों के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए. वक्ताओं ने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ज्ञान, चिंतन और वैचारिक विकास के लिए पुस्तकों का महत्व आज भी कायम है. इस अवसर पर अमरावती संभाग ग्रंथालय संघ के अध्यक्ष प्रभाकर घुगे, अमरावती ग्रंथालय संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत चांग़दे तथा बुक फ्रेंड राजेश डांगटे सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे. उन्होंने पुस्तक वाचन की संस्कृति को मजबूत करने और अधिक से अधिक लोगों को पुस्तकों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया. दो दिवसीय पुस्तक महोत्सव के माध्यम से पाठकों को विविध साहित्य और पुस्तकों से परिचित कराने के साथ ही समाज में वाचन संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया.

 

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