टाइगर प्रोजेक्ट के मजदूरों की चार माह से बकाया मजदूरी

सांसद बलवंत वानखडे ने तत्काल भुगतान के दिए निर्देश

* जून से नहीं मिला वेतन, जंगल में जोखिम भरे काम करने वाले 520 दिहाड़ी मजदूर आर्थिक संकट में
अमरावती/दि.6– मेलघाट टाइगर रिजर्व के वाइल्डलाइफ विभाग में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है. पिछले चार महीनों से मजदूरी का भुगतान नहीं होने के कारण इन मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. जून से वेतन नहीं मिलने की जानकारी सामने आने के बाद मजदूरों में नाराजगी है. मामले को गंभीरता से लेते हुए सांसद बलवंत वानखड़े ने 5 अक्टूबर को मेलघाट टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक को पत्र भेजकर बकाया मजदूरी का तत्काल भुगतान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
मेलघाट टाइगर रिजर्व के गुगामल वन्यजीव विभाग में करीब 200, सिपना और अकोट वन्यजीव विभाग में 140-140 तथा मेलघाट वन्यजीव विभाग में करीब 40 दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं. ये मजदूर जंगल की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं. इनमें जंगल में नियमित गश्त करना, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग देना, कैंपों में वनरक्षक एवं वन कर्मचारियों के साथ रहना, वाहनों पर हेल्पर के रूप में काम करना, वन उपज जांच नाकों की सुरक्षा करना तथा वायरलेस सिस्टम के रखरखाव जैसे काम शामिल हैं. जंगल में वन्यजीवों के बीच और विषम परिस्थितियों में काम करने के बावजूद इन मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिलने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है.

* सांसद ने वन विभाग को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश
मजदूरों की चार महीने की बकाया मजदूरी का मुद्दा सामने आने के बाद सांसद बलवंत वानखड़े ने 5 अक्टूबर को मेलघाट टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक को लिखित पत्र भेजा. उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए दिहाड़ी मजदूरों की बकाया मजदूरी का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. मजदूरों का कहना है कि वे जंगल में विभाग के महत्वपूर्ण और जोखिमपूर्ण कार्यों को लगातार अंजाम दे रहे हैं. ऐसे में लंबे समय तक मजदूरी लंबित रहना उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है. अब वन विभाग द्वारा बकाया भुगतान कब तक किया जाता है, इस पर मजदूरों की नजरें टिकी हैं.

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