एक माह से प्रभारियों के भरोसे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था

जिले को स्थायी सीएस और डफरिन को एमएस कब मिलेगा?

भीषण अग्निकांड के बावजूद दोनों महत्वपूर्ण पद अब भी रिक्त
अमरावती/दि. 6 – जिला स्त्री अस्पताल (डफरिन) के एसएनसीयू अग्निकांड के बाद स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हुई कार्रवाई का असर अब जिले की स्वास्थ्य प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. चिकित्सा अधीक्षक के निलंबन के बाद डफरिन का चिकित्सा अधीक्षक पद और जिला शल्यचिकित्सक (सीएस) का महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गया है. दोनों पदों का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल प्रभारी अधिकारियों के पास है. करीब एक माह का समय बीत जाने के बावजूद इन दोनों पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
डफरिन के एसएनसीयू में हुए अग्निकांड के बाद तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई थी. जिला शल्यचिकित्सक डॉ. विनोद पवार के पास जिला शल्यचिकित्सक पद के साथ डफरिन के चिकित्सा अधीक्षक पद की भी जिम्मेदारी थी. उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के बाद जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक साथ दो प्रमुख प्रशासनिक पद रिक्त हो गए.
* जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सीएस की अहम भूमिका
बता दें कि जिला शल्यचिकित्सक जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद है. जिला अस्पताल, उपजिला अस्पतालों तथा अन्य शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं से संबंधित प्रशासनिक निर्णय, मनुष्यबल का नियोजन, चिकित्सा सेवाओं का संचालन और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में सीएस की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. ऐसे में जिला शल्यचिकित्सक का पद लंबे समय तक स्थायी अधिकारी के बिना रहना स्वास्थ्य प्रशासन के लिए चुनौती माना जा रहा है. वहीं डफरिन जैसे प्रमुख महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक का पद भी स्थायी अधिकारी के अभाव में प्रभार पर चल रहा है.
* अग्निकांड के बाद सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
डफरिन एसएनसीयू अग्निकांड के बाद अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पहले से ही चर्चा में है. ऐसे समय में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के दो प्रमुख पदों पर स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक स्तर पर चिंता बढ़ी है. फिलहाल प्रभारी अधिकारियों के माध्यम से कामकाज जारी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण निर्णयों, संस्थाओं के समन्वय और जवाबदेही के लिए स्थायी अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है. अब स्वास्थ्य विभाग इन दोनों पदों पर स्थायी नियुक्तियां कब करता है, इस पर सभी की नजर है.

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