शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जिले का कोई जनप्रतिनिधि नहीं डाल सकेगा वोट
दो सांसद व पूर्व सांसद सहित जिले का कोई भी विधायक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वोटर नहीं

* किसी भी जनप्रतिनिधि की पत्नी का नाम भी वोटर लिस्ट में शामिल नहीं
* अमरावती जिले में मौजूदा या भूतपूर्व जनप्रतिनिधियों में से कोई भी शिक्षक नहीं
* वोटर लिस्ट में नाम नहीं रहने के बावजूद सभी जनप्रतिनिधि व राजनेता शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार में सक्रिय
अमरावती/दि. 12 – इस समय अमरावती शहर व जिले सहित समूचे संभाग में विधान परिषद की सीट हेतु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की गहमागहमी चल रही है. निश्चित तौर पर शिक्षकों के बीच सीमित रहनेवाले इस निर्वाचन क्षेत्र में विगत कुछ वर्षों से मुख्य धारा की राजनीति करनेवाले राजनीतिक दलों, राजनेताओं तथा जनप्रतिनिधियों का दखल काफी अधिक बढ गया है. हालांकी एक सच्चाई यह भी है कि, मुख्य धारा की राजनीति करनेवाले अमरावती जिले के किसी भी मौजूदा या भूतपूर्व सांसद व विधायक का इस चुनाव के साथ सीधे तौर पर कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि इसमें से किसी भी जनप्रतिनिधि का नाम मतदाता के तौर पर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है. खास बात यह भी है कि, जिले के किसी मौजुदा या भूतपूर्व जनप्रतिनिधि के पती अथवा पत्नी का भी नाम शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज रहने की जानकारी नहीं है. जिसके चलते जिले के मौजूदा व भूतपूर्व जनप्रतिनिधियों के पास शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है. हालांकि इसके बावजूद शिक्षकों को इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग सभी जनप्रतिनिधियों व राजनेताओं की राजनीति जमकर हावी है.
बता दें कि, जिले की राजनीति में भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे व उनकी पत्नी डॉ. वसुधा बोंडे, शिवसेना उबाठा के नेता व पूर्व सांसद अनंत गुढे, भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा, विधायक सुलभा खोडके व संजय खोडके, युवा स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक व विधायक रवि राणा, भाजपा विधायक प्रवीण पोटे पाटिल, भाजपा विधायक राजेश वानखडे व उनकी पत्नी आरती वानखडे, शिंदे गुट के नेता विधायक बच्चू कडू व उनकी उच्च विद्याविभूषित पत्नी प्रा. नयना कडू, शिवसेना उबाठा के विधायक गजानन लवटे, भाजपा विधायक उमेश उर्फ चंदू यावलकर, भाजपा विधायक प्रताप अडसड एवं उनके पिता व पूर्व विधायक अरूण अडसड, पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख, यशोमति ठाकुर व वसुधा देशमुख, मेलघाट के भाजपा विधायक केवलराम काले, अचलपुर के भाजपा विधायक प्रवीण तायडे, पूर्व विधायक रावसाहेब शेखावत, प्रा. वीरेंद्र जगताप व प्रभुदास भिलावेकर आदि का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है. इन सभी नामों को लेकर की गई पडताल के बाद पता चला कि, इनमें से किसी का भी नाम शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है. हालांकि इसमें से अधिकांश जनप्रतिनिधि व राजनेता इस समय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में अलग-अलग प्रत्याशियों के प्रचार एवं समर्थन हेतु सक्रिय है.
बता दें कि, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची प्रत्येक 6 वर्ष के अंतराल पश्चात चुनाव से ठीक पहले नए सिरे से तैयार की जाती है. जिसमें केवल और केवल अध्यापन के कार्य से जुडे शिक्षकों व प्राध्यापकों के नामों का ही समावेश किया जाता है. यानी हर चुनाव से पहले शिक्षकों एवं प्राध्यापकों को बतौर मतदाता अपने नामों का पंजियन कराना होता है. इसमें भी खासबात यह है कि, जिन शिक्षकों व प्राध्यापकों की निर्धारित आयु पूर्ण होने के उपरांत सेवानिवृत्ती हुई है, या फिर जिन शिक्षकों व प्राध्यापकों ने स्वेच्छिक सेवानिवृत्ती ली है, ऐसे शिक्षकों व प्राध्यापकों को सेवानिवृत्त हुए यदि तीन वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो वे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अपने नाम का पंजीयन नहीं करा सकते. इसके साथ ही अध्यापन कार्य से जुडे रहनेवाले शिक्षकों के लिए भी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में अपने नाम का पंजीयन कराना अनिवार्य नहीं, बल्कि ऐच्छिक है. जिसके चलते शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने के इच्छूक शिक्षक व प्राध्यापक प्रति 6 वर्ष के अंतराल पश्चात अपनी स्वेच्छानुसार शिक्षक मतदाता सूची में अपने नाम का पंजियन करा सकते है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, किसी समय विधायक बच्चू कडू की पत्नी प्रा. नयना कडू तथा धामणगांव रेल्वे निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व कांग्रेसी विधायक प्रा. वीरेंद्र जगताप भी अध्यापन कार्य से जुडे हुए थे. जो संभवतः उस समय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता रहे हो, परंतु अब इन दोनों को अध्यापन क्षेत्र से निवृत्त एवं अलग हुए तीन साल से अधिक का समय हो चुका है. जिसके चलते प्रा. वीरेंद्र जगताप व प्रा. नयना कडू का नाम भी अब शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है.
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि, जिले के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इन दिनों मुख्य धारा की राजनीति हावी होने लगी है. परंतु हकिकत यह है कि, मुख्य धारा की राजनीति में कोई भी शिक्षक नहीं है और शिक्षा क्षेत्र का मुख्य धारा की राजनीति से कोई सीधा वास्ता भी नहीं है.
* विधायक सरनाईक व लिंगाडे भी शिक्षक मतदाता नहीं
जहां एक ओर अमरावती जिले के किसी भी मौजुदा अथवा भूतपूर्व सांसद या विधायक का नाम शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नहीं है. वहीं दूसरी ओर विधान परिषद में अमरावती संभाग के शिक्षक एवं स्नातक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे निवर्तमान शिक्षक विधायक किरण सरनाईक एवं स्नातक विधायक धिरज लिंगाडे के नाम भी अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है. अलबत्ता इन दोनों विधायकों के नाम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में जरूर शामिल है.





