तुकाराम मुंढे एमपीएससी अध्यक्ष की जांच कर ही नहीं सकते
सदावर्ते के दावे से मामले में आया बड़ा ट्विस्ट

मुंबई/दि.12 – एमपीएससी के आंदोलन को लेकर वरिष्ठ वकील गुणरत्न सदावर्ते ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार पर जमकर निशाना साधा है. इस दौरान उनके एक दावे से मामले में नया मोड़ आ गया है. एमपीएससी के आंदोलन को लेकर वरिष्ठ वकील गुणरत्न सदावर्ते ने कहा, आज मैं आपके सामने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे रख रहा हूं. महाराष्ट्र में संविधान के प्रति जागरूकता होने के बावजूद एमपीएससी के विद्यार्थियों के साथ धोखाधड़ी की गई. यह एक दयनीय प्रयास था. जिस तरह पानी से बाहर निकालने के बाद मछली तड़पती है, वैसी ही स्थिति रोहित पवार की हो गई है. हालांकि, इस आंदोलन से विद्यार्थियों को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला था. केवल राजनीति को बढ़ावा मिला. सदावर्ते ने ये बातें एक पत्रकार परिषद में कहीं.
* सदावर्ते का मुंढे पर सवाल
इस दौरान गुणरत्न सदावर्ते ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि एमपीएससी के अध्यक्ष भीमनवार की जांच तुकाराम मुंढे नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि भीमनवार की जांच में मुंढे शामिल नहीं हो सकते और उनकी नियुक्ति भी इस तरह नहीं की जा सकती. सदावर्ते के अनुसार, संविधान का अनुच्छेद 317 कहता है कि राज्यपाल को जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय से सिफारिश करनी होती है और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद ही जांच की जा सकती है. इसलिए मौजूदा समिति एमपीएससी के अध्यक्ष की जांच नहीं कर सकती, ऐसा दावा सदावर्ते ने किया. उन्होंने आगे कहा कि अब रोहित पवार को पीछे हटना पड़ेगा और विद्यार्थी उन्हें छोड़ने वाले नहीं हैं. एमपीएससी के अध्यक्ष की जांच मौजूदा समिति नहीं कर सकती. इस आंदोलन के माध्यम से विद्यार्थियों को आखिर क्या मिला? रोहित पवार जिस तरह आंदोलन के दौरान अपनी बात रख रहे थे, उससे स्पष्ट हो रहा था कि यह आंदोलन किस दिशा में चल रहा था.
* रोहित पवार पर विद्यार्थियों के इस्तेमाल का आरोप
गुणरत्न सदावर्ते ने आरोप लगाया कि रोहित पवार ने विवेकानंद जैसे विद्यार्थियों का इस्तेमाल किया. उन्हें डर था कि विद्यार्थी आंदोलन छोड़कर चले जाएंगे, लेकिन अंततः रोहित पवार खुद ही इसमें फंस गए. सदावर्ते ने यह दावा भी किया कि रोहित पवार के आंदोलन में शामिल कुछ विद्यार्थी उनसे आकर मिले थे.





