एकवीरा देवी मंदिर में नि:शुल्क चप्पल स्टैंड के नाम पर समाजसेवा का दिखावा
रैक खाली, बाहर सैकड़ों जोड़ी चप्पलों का ढेर

* रात होते ही कचरे में फेंकी जा रही श्रद्धालुओं की चप्पलें
* मंदिर परिसर में अतिक्रमण और गंदगी का अंबार
* मनपा प्रशासन और मंदिर संस्थान की चुप्पी पर सवाल
अमरावती/दि.12 – विदर्भ की कुलस्वामिनी मां एकवीरा देवी के दर्शन के लिए नवरात्रोत्सव में लाखों श्रद्धालु अमरावती पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अनेक सामाजिक संगठनों और सेवाभावी संस्थाओं द्वारा नि:शुल्क सेवाएं दी जा रही हैं. लेकिन इसी धार्मिक उत्सव के बीच नि:शुल्क चप्पल स्टैंड के नाम पर की जा रही व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. मंदिर परिसर के बाहर चप्पलें सुरक्षित रखने के लिए लगाया गया स्टॉल श्रद्धालुओं की सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बनता दिखाई दे रहा है. स्टॉल के भीतर रखे लोहे के रैक खाली पड़े रहते हैं, जबकि बाहर सैकड़ों जोड़ी चप्पलें और जूते लावारिस अवस्था में बिखरे नजर आते हैं. आरोप है कि रात के समय इन चप्पलों को पास के कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है. इससे मंदिर परिसर के आसपास गंदगी फैल रही है, लेकिन संबंधित प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही.
* स्टॉल पर रैक खाली, बाहर चप्पलों के ढेर!
नवरात्रोत्सव के दौरान अंबादेवी और एकवीरा देवी मंदिरों में दर्शन के लिए विदर्भ सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. सुबह से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. सुबह करीब 4 बजे से मध्यरात्रि तक आने वाले भक्तों की चप्पलें रखने के लिए लोकहित मंच सेवा फाउंडेशन की ओर से अंबानाले के समीप नि:शुल्क चप्पल स्टैंड लगाया गया है. इस स्टॉल पर चप्पलें और जूते रखने के लिए लोहे के बड़े-बड़े रैक लगाए गए हैं. लेकिन यहां की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. स्टॉल के रैक में चप्पलों की संख्या कम दिखाई देती है, जबकि उसके आसपास बड़ी संख्या में चप्पलें और जूते बिखरे पड़े रहते हैं. दर्शन करके लौटने वाले श्रद्धालु अपनी चप्पलें तलाशते रहते हैं. चप्पल नहीं मिलने पर कई भक्तों को नंगे पैर ही वापस लौटना पड़ता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब श्रद्धालुओं की चप्पलें सुरक्षित रखने के लिए स्टैंड बनाया गया है, तो बाहर चप्पलों के ढेर क्यों लगे हुए हैं? क्या इस व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा रही है?
* रात होते ही कचरे में फेंकी जाती हैं चप्पलें!
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्टॉल के बाहर पड़ी सैकड़ों जोड़ी लावारिस चप्पलों और जूतों को रात के समय सड़क पार स्थित कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है. यदि यह आरोप सही है, तो श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुरू की गई नि:शुल्क सेवा की कार्यप्रणाली की जांच आवश्यक है. चप्पलें बिखरी रहने और बाद में कचरे में फेंके जाने से मंदिर परिसर के आसपास गंदगी बढ़ रही है. धार्मिक स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए जहां विशेष प्रयास होने चाहिए, वहीं इस प्रकार की स्थिति श्रद्धालुओं के लिए असुविधाजनक बन रही है. इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि चप्पल स्टैंड का संचालन किस प्रकार किया जा रहा है, चप्पलों को सुरक्षित रखने की क्या व्यवस्था है और लावारिस चप्पलों के निपटारे के लिए कौन जिम्मेदार है. साथ ही, संबंधित आरोपों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना भी जरूरी है.
* चंद लोगों के भरोसे बड़ी व्यवस्था?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लोकहित मंच सेवा फाउंडेशन के नाम से संचालित इस चप्पल स्टैंड का संचालन गोविंद जोग से संबंधित बताया जाता है, जबकि वर्तमान में शैलेश जोग द्वारा इसे चलाए जाने की जानकारी सामने आई है. स्टॉल के लिए पर्याप्त जगह घेरी गई है और चप्पलें रखने के लिए बड़ी संख्या में रैक भी लगाए गए हैं. इसके बावजूद यहां सेवा देते हुए चंद लोग दिखाई देने की बात कही जा रही है. यदि नवरात्रोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखकर चप्पल स्टैंड संचालित किया जा रहा है, तो वहां पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था, चप्पलों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं को उनकी चप्पलें वापस दिलाने की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित होनी चाहिए. नि:शुल्क सेवा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुविधा देना है. ऐसे में केवल स्टॉल लगाने या जगह घेरने से सेवा की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती. व्यवस्था का वास्तविक लाभ भक्तों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा आवश्यक है.
* मंदिर परिसर में अतिक्रमण, गंदगी और अव्यवस्था
चप्पल स्टैंड के आसपास घूमंतू लोगों द्वारा अतिक्रमण कर अस्थायी स्टॉल लगाए जाने की भी शिकायत है. आरोप है कि कुछ लोग मंदिर परिसर के भीतर तक पहुंच गए हैं और वहां पलंग बिछाकर रहने के साथ गंदगी फैला रहे हैं. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही को देखते हुए ऐसी स्थिति स्वच्छता और व्यवस्था के लिहाज से चिंता का विषय है. इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने और परिसर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए मनपा प्रशासन तथा मंदिर संस्थान की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने की शिकायत की जा रही है. नवरात्रोत्सव के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात सुचारु रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिसकर्मियों को दिनभर मशक्कत करनी पड़ती है. ऐसे में सफाई, अतिक्रमण और चप्पल स्टैंड की अव्यवस्था का अतिरिक्त बोझ भी व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों पर पड़ता है. सवाल यह है कि जब नवरात्रोत्सव के लिए व्यापक तैयारियां की जाती हैं, तो मंदिर परिसर के आसपास सफाई और अतिक्रमण नियंत्रण के लिए समन्वित व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई देती? साथ ही लोगहित मंच सेवा फाउंडेशन का नि:शुल्क सेवा देने के नाम पर उद्देश्य क्या है, यह समझ में नहीं आ रहा है. उन्हें सचमुच ही जनहितार्थ अपनी सेवा देना है, तो अपनी व्यवस्था को सुधारना चाहिए और फैल रही गंदगी से सबक लेना चाहिए.
* गांधी चौक की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा कहां?
मौजूदा चप्पल स्टैंड की स्थिति को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि इसकी व्यवस्था मुख्य रूप से राजापेठ और रवि नगर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ही उपयोगी दिखाई देती है. गांधी चौक की ओर से मंदिर पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए इसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है. यदि उद्देश्य वास्तव में अधिक से अधिक भक्तों को नि:शुल्क सेवा देना है, तो गांधी चौक की ओर से आने वाले मार्ग पर भी चप्पल स्टैंड की व्यवस्था करने पर विचार किया जाना चाहिए. मंदिर की ओर आने वाले प्रमुख रास्तों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और जरूरतों का आकलन कर सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है. इसके अलावा, मंदिर परिसर में जहां लोग अस्थायी रूप से डेरा जमाए हुए हैं और चप्पल स्टैंड के आसपास खाली जगह उपलब्ध है, वहां भी सुव्यवस्थित चप्पल स्टैंड स्थापित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है. इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने के साथ चप्पलों के बिखरने और गंदगी फैलने की समस्या भी कम हो सकती है.
* इसके विपरीत सत्कर्म ग्रुप की 30 वर्षों से नि:शुल्क जलसेवा
एक ओर चप्पल स्टैंड की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्कर्म ग्रुप द्वारा अंबादेवी और एकवीरा देवी मंदिर परिसर में पिछले करीब 30 वर्षों से चलाई जा रही नि:शुल्क पानपोई की सराहना की जा रही है. नवरात्रोत्सव के दौरान यह ग्रुप सुबह करीब 4 बजे से मध्यरात्रि तक श्रद्धालुओं को पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य करता है. तेज धूप और गर्मी के बीच दर्शन के लिए आने वाले भक्त यहां अपनी प्यास बुझाते हैं. ग्रुप के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस बात का ध्यान रखते हैं कि पानपोई के आसपास गंदगी न फैले और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से पानी मिल सके. वर्तमान में कम बारिश के कारण पेयजल की उपलब्धता प्रभावित होने की बात भी सामने आई है. मंदिर संस्थान में महाप्रसाद की व्यवस्था के चलते पानी का भंडारण कम होने पर सत्कर्म ग्रुप को सुबह 9 बजे और दोपहर 3 बजे के बाद पानी भरने की सूचना दिए जाने की जानकारी मिली है. सोमवार 12 अक्टूबर को मंदिर संस्थान की ओर से अचानक जलापूर्ति नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को पेयजल के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा. इस संबंध में संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि नवरात्रोत्सव के दौरान महाप्रसाद की व्यवस्था के कारण पानी का भंडारण सीमित हो रहा है. इसलिए पानपोई के लिए निर्धारित समय पर पानी भरने का अनुरोध किया गया है. सत्कर्म ग्रुप की तीन दशकों से जारी जलसेवा और स्वच्छता पर दिए जाने वाले ध्यान से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक आयोजनों में नि:शुल्क सेवा तभी प्रभावी बनती है, जब उसके साथ जिम्मेदारी और उचित प्रबंधन भी हो.
* मनपा प्रशासन और मंदिर संस्थान कब लेंगे सुध?
एकवीरा देवी मंदिर परिसर में चप्पलों का बिखरना, कचरे का ढेर, अतिक्रमण और स्वच्छता संबंधी शिकायतें सामने आने के बाद अब मनपा प्रशासन, पुलिस प्रशासन और मंदिर संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है. प्रशासन को चप्पल स्टैंड की कार्यप्रणाली की जांच कर श्रद्धालुओं की चप्पलों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए. साथ ही, मंदिर परिसर के आसपास फैली गंदगी हटाने, कचरे का नियमित निपटारा करने और अतिक्रमण की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है. नवरात्रोत्सव में मां एकवीरा देवी के दर्शन के लिए दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना सभी संबंधित विभागों की साझा जिम्मेदारी है. अब देखना यह है कि श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर संचालित चप्पल स्टैंड की व्यवस्था में सुधार के लिए मनपा प्रशासन, पुलिस विभाग और मंदिर संस्थान कब ठोस कदम उठाते हैं.





