अमरावती जीएमसी की मंजूर जमीन का एडीबी टीम ने किया निरीक्षण
476.97 करोड़ रुपये की लागत से अलियाबाद में बनेगा शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल

निर्माण स्थल के सरकारी दस्तावेजों की जांच, ठेकेदार नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में
अमरावती/दि. 13 – अमरावती में प्रस्तावित शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल के निर्माण की दिशा में गतिविधियां तेज हो गई हैं. एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अधिकारियों ने अलियाबाद स्थित मंजूर निर्माण स्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान जमीन से संबंधित आवश्यक सरकारी दस्तावेजों की जांच की गई और परियोजना के संबंध में जरूरी जानकारियां ली गईं. इस दौरे के बाद परियोजना के लिए एडीबी से आर्थिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
एशियाई विकास बैंक की अधिकारी रायल्हाल्दा ससुलान और हॅना अरिएसगाडो ने परियोजना सलाहकार अंगद कारंडे के साथ अलियाबाद स्थित प्रस्तावित स्थल का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने शासकीय मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. अनिल बत्रा से मुलाकात की. अधिकारियों ने मौके पर जमीन का निरीक्षण करने के साथ ही परियोजना से जुड़ी आवश्यक जानकारियां प्राप्त कीं तथा संबंधित सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल की.
बता दें कि, अमरावती में शासकीय मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 476.97 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक से आर्थिक सहायता मिलने की संभावना के मद्देनजर बैंक के अधिकारियों का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है. निर्माण स्थल का निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है. मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की इमारत के निर्माण के लिए ठेकेदार नियुक्त करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी दी गई है. ऐसे में एडीबी से आर्थिक सहायता की प्रक्रिया और ठेकेदार नियुक्ति पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है.
* सुपर और डफरिन अस्पताल लेने का प्रस्ताव नहीं
शासकीय मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. अनिल बत्रा ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और डफरिन अस्पताल को अपने अधीन लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है. उन्होंने कहा कि शासन द्वारा मंजूर अलियाबाद की जमीन पर ही निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कर मेडिकल कॉलेज को वहां स्थानांतरित करने का प्रयास किया जा रहा है.डॉ. बत्रा के अनुसार, मंजूर स्थल पर ही आवश्यक निर्माण पूरा कर महाविद्यालय को स्थानांतरित करना प्राथमिकता है. अब आर्थिक सहायता और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद परियोजना के अगले चरण पर सबकी नजरें रहेंगी.





