‘रे कान्हा हू तने चाहूं…’

लोग आनंदित हैं, यह देखकर मिलता है समाधान

* युवा जस गायक कान्हा बगडाई का कहना
* नवरात्रि में परंपरागत गरबा रास की बने हैं शान
* परिश्रम से तराशी प्रतिभा, अल्पावधि में लोकप्रिय
अमरावती/दि.13 – गरबा रास में भक्ति गीतों की परंपरा लोगों को आदिशक्ति की आराधना के लिए प्रेरित करने की रही है. ऐसे में आज के आपाधापी के युग में भी भाविक अपनी पूजा-अर्चना, श्रद्धा समर्पित करने के लिए गरबा रास में आते हैं. सहभागी होते हैं. उन्हें अपने गरबा गीतों से आनंदित और झूमते हुए देखकर जो संतोष, सुकून मिलता है, वह शब्दों में बयां नहीं कर सकते. हमारी भी देवी के चरणों में भक्तिभाव समर्पित करने का यह अंदाज, शैली कह सकते हैं. इन शब्दों में युवा जस गायक, गरबा गीत गायक कान्हा बगडाई ने अमरावती मंडल से बातचीत में अपनी भावनाएं रख दी. अल्पावधि में कान्हा बगडाई ने अंबानगरी के प्रसिद्ध और परंपरागत गरबा आयोजनों में न केवल परिचय बनाया, अपितु वे युवा वर्ग में खासे लोकप्रिय भी हो चुके हैं. अपने कामकाज को संभालते हुए प्रतिभा को परिश्रमपूर्वक आपने तराशा है. विनम्रता आपकी एक और बडी पहचान कह सकते हैं.
* माता-पिता के प्रोत्साहन से निखारी प्रतिभा
कान्हा बगडाई बी. कॉम. तक शिक्षित है. उनके माता-पिता नानूभाई बगडाई और नीतादेवी बगडाई ने पुत्र की गायन में रुचि देखते ही उसे प्रेरित किया, प्रोत्साहन दिया. कान्हा ने बताया कि, वे बहुत सिद्धहस्त गायक नहीं थे. किंतु अपने स्वर को सरगम की लय में लाने का उन्होंने प्रयास किया. माता-पिता नानूभाई और नीतादेवी के साथ-साथ मित्र परिवार विशेषकर सक्करसाथ गुजराती नवरात्रि उत्सव मंडल के सभी लोगों ने काफी प्रेरित किया. उनकी बहन पुष्टि बुद्धदेव ने भी प्रोत्साहित किया. उनके प्रोत्साहन से ही गजानन गणपति सूंडाला रे… से प्रारंभ करते हुए कान्हा ने आवाज और स्वर को निखारा.
* अल्पावधि में लोकप्रिय
कान्हा को गरबा गीत गाते हुए 6-7 वर्ष हुए होंगे. आज वे समस्त अमरावती में गरबा गीतों के लिए विख्यात हो चले हैं. बल्कि यूथ में उनकी डिमांड बढ रही है. कई गीत तो अब अमरावती का युवा उन्हीं के मुख से सुनने आतुर और रोमांचित रहता है. जिसमें रे कान्हा हूं तने चाहूं…, आमे मैयारा रे… गोकुल गामना…, गरवो कराव्यों गगन गोठ मां रे…, आमे गुजराती लेरी लाला… का खास उल्लेख किया जा सकता हैं. उसी प्रकार एक बार रंग में आने के बाद कान्हा अपने स्वर और शैली से छा जाते हैं. उपस्थित उनके गीतों पर गरबा करने वाले झूम-झूम जाते हैं. मस्ती में सराबोर हो जाते हैं. देखने वाले भी थिरक उठते हैं. तथापि अपने स्वभाव से बेहद विनम्र और शांत कान्हा बगडाई इस सब का श्रेय माता रानी की कृपा और वाद्य कलाकारों के अद्भूत तालमेल, समन्वय को देते हैं. उनका यह भी कहना रहा कि, साथी गायक कलाकार का भी आपकी गायकी निखारने और प्रभावी बनाने में योगदान होता है.
* पासपडोस के नगरों से बुलावा
कान्हा बगडाई को ख्यातिलब्ध होने के साथ पासपडोस के नगरों, शहरों से गरबा गीतों के लिए आमंत्रण मिलते हैं. आपने अनेक स्थानों पर गरबा गीता गाये है. भजन-कीर्तनों में भी गायन किया है. वे परकोटे के भीतर कालाराम मंदिर गरबा रास और बडनेरा रोड के भक्तिधाम में वर्तमान नवरात्रि में सतत प्रस्तुति दे रहे हैं. यह क्रम कोजागिरी पूर्णिमा अर्थात शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा. कान्हा बगडाई ने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा-दीक्षा ग्रहण नहीं की. अपने सतत अभ्यास, परिश्रम और विनयशीलता से सहयोगी गायन और वाद्य कलाकारों संग तालमेल से कान्हा ने गायन प्रतिभा को तराशा है. जिसके कारण उनके मुख से कई गीत सुनने युवा वर्ग आतुर हो जाता है. अमरावती को उनसे एक उभरते, सिद्धहस्त गायक के रुप में पहचाने जाने की आशा जागी है.

Back to top button