इस साल सीताफल की मिठास होगी कम

देउरवाड़ा और बहिराम के जंगलों में पैदावार घटी

सूखे की मार
चांदूर बाजार से दिल्ली तक मशहूर जंगली सीताफल की आवक प्रभावित होने की आशंका
अमरावती/दि.13 – कम बारिश और सूखे जैसे हालात का असर अब जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले फलों पर भी दिखाई देने लगा है. सतपुड़ा की पहाड़ियों में बड़ी मात्रा में पैदा होने वाले देउरवाड़ा और बहिराम के मशहूर सीताफल की पैदावार इस साल प्रभावित हुई है. दशहरे के आसपास बाजार में पहुंचने वाले इस स्वादिष्ट जंगली फल की आवक अब तक अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुई है. ऐसे में सीताफल के शौकीनों को इस साल इसके स्वाद का आनंद लेने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है.
चांदूर बाजार तहसील के सीताफल की अपनी अलग पहचान है. प्राकृतिक वातावरण में उगने वाले ये फल अपने स्वाद, मिठास और रसीलेपन के लिए प्रसिद्ध हैं. स्थानीय बाजारों से लेकर पुणे, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों तक इनकी मांग रहती है. लेकिन इस साल बारिश की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने से ग्राहकों की उम्मीदों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है.
* दशहरे के आसपास शुरू होती है आवक
सतपुड़ा की पहाड़ियों और जंगलों में सीताफल के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. यहां प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीताफल का स्वाद सामान्य फलों से अलग माना जाता है. हर साल दशहरे के आसपास बाजार में इसकी आवक शुरू होती है. इसके बाद सर्दियों तक सीताफल के शौकीन बड़ी संख्या में इसकी खरीदारी करते हैं. हालांकि, इस साल कम बारिश के कारण फलों की पैदावार पर असर पड़ा है. सीताफल का मौसम शुरू होने के बावजूद बाजार में पर्याप्त मात्रा में फल नहीं पहुंच रहे हैं. इससे ग्राहकों को अपनी पसंद का जंगली सीताफल खरीदने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
* जंगली सीताफल की मिठास के शौकीन निराश
देउरवाड़ा और बहिराम के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले सीताफल की मांग हर साल रहती है. दशहरे से पहले ही ग्राहक इसकी आवक का इंतजार करने लगते हैं. कई लोग विशेष रूप से इन जंगलों के सीताफल का स्वाद चखने के लिए बाजार पहुंचते हैं. इस साल उत्पादन में कमी के कारण ग्राहकों को मनचाही मात्रा में फल मिलना मुश्किल हो सकता है. यदि आवक कम रही, तो लोगों को सीमित मात्रा में ही इस जंगली फल का स्वाद चखने का अवसर मिलेगा.
* सीताफल की बिक्री से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ी
सीताफल केवल स्वाद के शौकीनों की पसंद ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का साधन भी है. जंगलों से सीताफल एकत्र करने, उसकी बिक्री करना और ग्राहकों तक पहुंचाने से अनेक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है. ऐसे में उत्पादन कम होने का असर फल विक्रेताओं और इससे जुड़े अन्य लोगों के कारोबार पर भी पड़ सकता है. बाजार में पर्याप्त मात्रा में सीताफल उपलब्ध नहीं होने पर बिक्री के अवसर सीमित होने की आशंका है.
* चांदूर बाजार के सीताफल की दिल्ली तक मांग
चांदूर बाजार तहसील के सीताफल की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है. दशहरा और दीपावली के दौरान गांव आने वाले लोग बड़ी मात्रा में सीताफल खरीदते हैं. त्यौहारों के बाद पुणे, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में लौटते समय भी वे अपने साथ सीताफल लेकर जाते हैं. इस क्षेत्र के सीताफल के रसीलेपन और स्वाद के कारण इसकी अलग पहचान बनी हुई है. लेकिन इस साल बारिश की कमी से उत्पादन प्रभावित होने के कारण स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ दूरदराज के शहरों में रहने वाले सीताफल प्रेमियों को भी निराशा का सामना करना पड़ सकता है. कुल मिलाकर, कम बारिश का असर अब जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले फलों पर भी दिखाई देने लगा है. चांदूर बाजार के प्रसिद्ध सीताफल की कम पैदावार ने जहां ग्राहकों की चिंता बढ़ाई है, वहीं इससे जुड़े विक्रेताओं के कारोबार पर भी असर पड़ने की आशंका है.

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