मैं खुद शिक्षिका हूं, शिक्षकों की समस्याएं जानती हूं, इस बार संघर्ष सफल होगा
शिक्षक संघर्ष संगठन की संस्थापक अध्यक्ष संगीता शिंदे का दावा

* दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ की विशेष तौर पर बातचीत
* सड़क से शुरू हुई लड़ाई को विधानमंडल तक ले जाने की बात कही
* पुरानी पेंशन, नौकरी की सुरक्षा, रिक्त पदों पर भर्ती और भ्रष्टाचारमुक्त शिक्षा व्यवस्था प्रमुख मुद्दे
* निर्वाचित होने पर संभाग के पांचों जिलों में नियमित शिक्षक दरबार लगाने का संकल्प
अमरावती/दि.13 – मैं खुद शिक्षिका हूं. मैंने शिक्षकों की समस्याओं को न केवल करीब से देखा है, बल्कि स्वयं भी उनका सामना किया है. इसलिए शिक्षकों की पीड़ा, उनकी अपेक्षाओं और उनके संघर्ष को अच्छी तरह समझती हूं. इस बार शिक्षकों का संघर्ष सफल होगा और उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा, जो उनकी समस्याओं को सड़क से लेकर विधानमंडल तक पूरी ताकत के साथ उठाएगा. यह विश्वास अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव लड़ रहीं शिक्षक संघर्ष संगठन की संस्थापक अध्यक्ष संगीता शिंदे ने व्यक्त किया.
अपनी उम्मीदवारी, शिक्षकों के प्रश्नों, शिक्षा व्यवस्था की मौजूदा स्थिति, पुरानी पेंशन योजना, गैरअनुदानित विद्यालयों के अनुदान, शिक्षकों की सेवा सुरक्षा तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर संगीता शिंदे ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ विशेष बातचीत की. इस दौरान उन्होंने पिछले 17-18 वर्षों से शिक्षकों के लिए किए गए अपने कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि उनकी उम्मीदवारी केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान के लिए लंबे समय से जारी संघर्ष का अगला चरण है. शिक्षक परिषद ने भी संगीता शिंदे की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. शिक्षक परिषद के माध्यम से राज्य में कई प्रभावी शिक्षक विधायक निर्वाचित होते रहे हैं. ऐसे में संगीता शिंदे को उम्मीद है कि शिक्षक संगठन उनके संघर्ष और कार्यों को देखते हुए उन्हें अपना प्रतिनिधित्व सौंपेंगे.
* रिक्त पद खाली, फिर अतिरिक्त शिक्षकों की कटौती क्यों?
शिक्षा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए संगीता शिंदे ने कहा कि एक ओर विद्यालयों में शिक्षकों के अनेक पद रिक्त हैं और विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार भर्ती नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त शिक्षकों के नाम पर कार्यरत शिक्षकों की संख्या कम की जा रही है. इससे विद्यालयों में पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की जरूरतों के बीच संतुलन होना चाहिए. विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है. इसके बावजूद यदि रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और दूसरी ओर अतिरिक्त शिक्षकों की कटौती की जाती है, तो इसका प्रतिकूल असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ सकता है.
संगीता शिंदे ने यह भी कहा कि अनेक विद्यालयों में कला और क्रीड़ा शिक्षकों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मकता, प्रतिभा, शारीरिक क्षमता और व्यक्तित्व का विकास करना भी है. ऐसे में कला एवं क्रीड़ा शिक्षा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए. उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था को विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए आवश्यक है कि विद्यालयों में विषयानुसार शिक्षकों की नियुक्ति हो, अध्यापन का वातावरण बेहतर बने और शिक्षकों को गैरजरूरी प्रशासनिक कार्यों में उलझाने के बजाय विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए.
* पुरानी पेंशन का दर्द मैं खुद जानती हूं
पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा संगीता शिंदे की उम्मीदवारी के प्रमुख आधारों में शामिल है. उन्होंने बताया कि उनकी नियुक्ति भी वर्ष 2005 के बाद शिक्षक के रूप में हुई थी और उन्हें स्वयं भी पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलता. इसलिए पेंशन से वंचित शिक्षकों की चिंता और भविष्य की असुरक्षा को वे व्यक्तिगत रूप से महसूस करती हैं. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए पेंशन अत्यंत महत्वपूर्ण है. ऐसे में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर वे लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं और इस मुद्दे को आगे भी पूरी मजबूती से उठाती रहेंगी.
संगीता शिंदे ने गैरअनुदानित शैक्षणिक संस्थाओं के लिए अनुदान बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उनके अनुसार, अनुदान की समस्या के कारण अनेक शिक्षकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. यदि उन्हें विधान परिषद में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला, तो वे पुरानी पेंशन, अनुदान और वेतन संबंधी प्रश्नों को प्रमुखता से उठाएंगी.
* स्वयंवित्तपोषित संस्थाओं और आश्रमशालाओं के शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित करने का वादा
संगीता शिंदे ने स्वयंवित्तपोषित शैक्षणिक संस्थाओं और आश्रमशालाओं में कार्यरत शिक्षकों की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं में काम करने वाले अनेक शिक्षकों को नौकरी की स्थिरता और सेवा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है. कई जगह उन्हें बेहद कम वेतन पर काम करना पड़ता है. उनके अनुसार, शिक्षक से गुणवत्तापूर्ण अध्यापन की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यदि उसे अपनी नौकरी और परिवार के भविष्य की चिंता सताती रहे, तो उसके लिए पूरी एकाग्रता के साथ काम करना कठिन हो सकता है. इसलिए ऐसे शिक्षकों की नौकरी को सुरक्षित और स्थायी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा.
* पांचों जिलों में नियमित शिक्षक दरबार लगाने का संकल्प
विधान परिषद में शिक्षक विधायक के रूप में काम करने का अवसर मिलने पर संगीता शिंदे ने अमरावती संभाग के पांचों जिलों में नियमित रूप से शिक्षक दरबार आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया. उनका कहना है कि शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, इसके लिए एक प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शिक्षक दरबार के माध्यम से शिक्षकों की समस्याएं सीधे सुनी जाएंगी. सेवा संबंधी विवाद, वेतन, अनुदान, पेंशन, नियुक्ति, पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक प्रश्नों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर उनके समाधान के लिए प्रयास किया जाएगा.
* वचननामा के तौर पर जारी किया गारंटी पत्र
संगीता शिंदे ने अपनी उम्मीदवारी के साथ शिक्षकों के नाम एक हमीपत्र यानी गारंटीपत्र अथवा वचननामा भी जारी किया है. उन्होंने कहा कि इसमें शिक्षकों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगी. उनका दावा है कि वेतन के प्रत्येक हिस्से से स्वयं को शिक्षकों के प्रति जवाबदेह मानते हुए वे उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहेंगी.
* हर विद्यालय में छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं के लिए ‘पिंक रूम’
विद्यालयों में छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं की सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए संगीता शिंदे ने प्रत्येक विद्यालय में ‘पिंक रूम’ की व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि छात्राओं और महिला शिक्षिकाओं को विद्यालय में सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए. इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय में स्वतंत्र, स्वच्छ और व्यवस्थित स्वच्छतागृह उपलब्ध कराने पर उन्होंने जोर दिया. उनके अनुसार, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का असर छात्राओं की उपस्थिति, सहजता और शैक्षणिक वातावरण पर पड़ सकता है. इसलिए इन सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
* शिक्षा क्षेत्र को भ्रष्टाचारमुक्त और पारदर्शी बनाना प्राथमिकता
संगीता शिंदे ने शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसा क्षेत्र है, जो देश को दिशा देने और समाज की दशा सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए. उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में होने वाले कामकाज को पारदर्शी बनाना, शिक्षकों की समस्याओं का निष्पक्ष निपटारा करना और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है. यदि उन्हें शिक्षक विधायक के रूप में काम करने का अवसर मिलता है, तो शिक्षा क्षेत्र को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रयास करेंगी. उन्होंने शिक्षा को विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर भी जोर दिया. उनका कहना है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण ज्ञान देना, उनकी क्षमताओं का विकास करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है. इसलिए शिक्षा व्यवस्था की नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों में विद्यार्थियों का हित केंद्र में होना चाहिए.
* शिक्षकों को एसआईआर और बीएलओ जैसे गैरशैक्षणिक कामों से मुक्त रखा जाए
शिक्षकों पर बढ़ते गैरशैक्षणिक कार्यों का मुद्दा उठाते हुए शिंदे ने कहा कि अध्यापन का काम बोझरहित और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए. शिक्षकों पर एसआईआर और बीएलओ जैसे गैरशैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ डालने से उनका समय और ऊर्जा प्रभावित होती है. उन्होंने कहा कि शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को पढ़ाना, उनकी शैक्षणिक प्रगति पर ध्यान देना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है. यदि शिक्षकों को लगातार गैरशैक्षणिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, तो इसका असर कक्षा में पढ़ाई और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास पर पड़ सकता है.
* शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप बढ़ा
अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यधारा की राजनीति करने वाले दलों और नेताओं के बढ़ते प्रभाव पर भी संगीता शिंदे ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पहले यह निर्वाचन क्षेत्र मुख्य रूप से शिक्षक संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र हुआ करता था और शिक्षक ही अपने प्रतिनिधि के रूप में शिक्षक विधायक चुनते थे. संगीता शिंदे के अनुसार, वर्ष 2008 तक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक संगठनों की भूमिका प्रमुख थी. लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप बढ़ा और एक गैरशिक्षक उम्मीदवार निर्वाचित हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि उस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाए गए थे. उनके मुताबिक, वर्ष 2020 के चुनाव में भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे थे और कुछ गैरशिक्षकों के नाम शामिल किए जाने की बात सामने आई थी. उन्होंने कहा कि अब शिक्षक मतदाता इन घटनाओं और उनसे जुड़े विवादों को समझ चुके हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस बार शिक्षक अपने हितों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मतदान करेंगे तथा शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने वाले प्रतिनिधि को चुनेंगे.
* भाजपा से टिकट की अपेक्षा थी, समर्थक शिक्षकों के भरोसे चुनाव
संगीता शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस चुनाव में चर्चा का विषय है. वे भाजपा महिला मोर्चा और शिक्षक प्रकोष्ठ में सक्रिय रही हैं. उनके बड़े भाई डॉ. अनिल बोंडे भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद हैं. इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते संगीता शिंदे को उम्मीद थी कि अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उन्हें उम्मीदवार घोषित करेगी. हालांकि, महायुति के सीट बंटवारे में यह सीट एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हिस्से में चली गई. इसके बाद संगीता शिंदे ने अपनी स्वतंत्र दावेदारी प्रस्तुत करने का निर्णय लिया. इस कदम के बाद उन्हें भाजपा के सभी पदों से हटाए जाने और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किए जाने तथा निष्कासित किए जाने की कार्रवाई का सामना करना पड़ा. इस घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने कहा कि उन्होंने भाजपा में रहते हुए लंबे समय तक काम किया और इसी मंच से शिक्षकों के प्रश्नों को उठाया. इसलिए वे चाहती थीं कि पार्टी उन्हें इस निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित करे. लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्होंने अपने समर्थक शिक्षकों के भरोसे चुनाव लड़ने का फैसला किया.
* भाई डॉ. बोंडे पार्टी के प्रति निष्ठावान, मुझे उन पर गर्व है
संगीता शिंदे के चुनाव लड़ने की स्थिति में उनके बड़े भाई और भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे. उनसे पूछा गया कि क्या डॉ. बोंडे अपनी बहन का साथ देंगे या पार्टी के निर्देश के अनुसार महायुति के उम्मीदवार के लिए काम करेंगे? इस पर संगीता शिंदे ने कहा कि उनके बड़े भाई के लिए पार्टी सर्वोपरि है और वे ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत का पालन करते हैं. भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं के प्रति उनकी निष्ठा तथा ईमानदारी पर उन्हें पूरा भरोसा है. इसलिए डॉ. बोंडे गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बड़े भाई होने के नाते डॉ. बोंडे ने उन्हें विजयी होने का आशीर्वाद जरूर दिया है. चुनाव में भाई का राजनीतिक रूप से साथ नहीं होना उनके लिए परेशानी का विषय नहीं है. इसके विपरीत, उन्हें अपने भाई की पार्टी के प्रति निष्ठा पर गर्व है.
* संभाग की पहली महिला शिक्षक विधायक बनाने का अवसर
संगीता शिंदे ने अपने प्रचार अभियान के दौरान मिल रहे प्रतिसाद का उल्लेख करते हुए कहा कि अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अब तक किसी महिला को शिक्षक विधायक बनने का अवसर नहीं मिला है. उनके अनुसार, इस बार महिला उम्मीदवार के रूप में उन्हें समर्थन देने वाले शिक्षक एक नया इतिहास रचने की इच्छा रखते हैं. उन्होंने दावा किया कि संभाग के विभिन्न हिस्सों में उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और शिक्षक उनके संघर्ष, अनुभव तथा वचननामा को लेकर सकारात्मक हैं. इसी आधार पर उन्होंने अपनी जीत को लेकर विश्वास व्यक्त किया.





