अमरावती विधान परिषद के चुनाव में कल रात ऐसे हुआ बडा राजनीतिक उलटफेर
आखिर क्यों लगा विप्लव बाजोरिया की उम्मीदवारी पर लगा विराम?

* निर्वाचन अधिकारी येरेकर ने सात पृष्ठों के आदेश में बताई कानूनी वजहें
* बाजोरिया का नामांकन निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का लिया आधार
अमरावती/दि. 3 – अमरावती स्थानीय प्राधिकारी मतदार संघ निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के लिए होने जा रहे चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान कल रात एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी एवं जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने निर्दलीय उम्मीदवार विप्लव गोपीकिशन बाजोरिया का नामांकन पत्र निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया. नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान प्राप्त आपत्तियों पर विस्तृत सुनवाई के बाद पारित सात पृष्ठों के आदेश में जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र (फॉर्म-26) निर्वाचन नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया, जिसके कारण नामांकन को वैध नहीं ठहराया जा सकता. इस निर्णय के साथ ही स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है और चुनावी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है.
* चार उम्मीदवारों ने उठाए थे गंभीर सवाल
बता दें कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा प्रत्याशी प्रवीण रामचंद्र पोटे, कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत अनंतराव देशमुख, वंचित बहुजन आघाडी के प्रत्याशी डॉ. निलेश ताराचंद विश्वकर्मा एवं निर्दलीय प्रत्याशी प्रशांत श्रीधर महल्लेे ने पूर्व विधायक व निर्दलीय प्रत्याशी विप्लव बाजोरिया के नामांकन के खिलाफ औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं. आक्षेपकर्ताओं का कहना था कि उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र (फॉर्म-26) पूर्ण रूप से भरा नहीं गया है तथा निर्वाचन नियमों के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियां मूल फॉर्म में दर्ज करने के बजाय अलग-अलग परिशिष्ट (एनेक्शचर) के माध्यम से प्रस्तुत की गई हैं. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इन परिशिष्टों को वैधानिक रूप से शपथपत्र का हिस्सा नहीं माना जा सकता क्योंकि उन पर स्वतंत्र सत्यापन और शपथ की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है. आक्षेपकर्ताओं ने दावा किया कि शपथपत्र के कई अनिवार्य कॉलम रिक्त या अपूर्ण हैं, जिससे मतदाताओं को उम्मीदवार की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती. इसी आधार पर नामांकन को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी.
* बाजोरिया ने तकनीकी त्रुटि बताकर किया बचाव
सुनवाई के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार विप्लव बाजोरिया की ओर से अधिवक्ताओं ने विस्तृत पक्ष रखते हुए कहा कि शपथपत्र के साथ संलग्न सभी परिशिष्ट विधिवत हस्ताक्षरित, नोटरीकृत तथा प्रमाणित हैं, इसलिए उन्हें शपथपत्र का अभिन्न हिस्सा माना जाना चाहिए. बाजोरिया की ओर से यह तर्क भी दिया कि यदि कोई कमी है भी तो वह केवल तकनीकी प्रकृति की है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36(3) एवं 36(4) के अनुसार केवल तकनीकी या नगण्य त्रुटियों के आधार पर किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता. इसलिए नामांकन को वैध घोषित किया जाना चाहिए.
* निर्वाचन अधिकारी ने माना मामला ‘विवाद योग्य’ नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव आचरण नियम, 1961 के नियम 4-ए के तहत उम्मीदवार को निर्धारित प्रारूप वाले फॉर्म-26 में ही आवश्यक जानकारी देना अनिवार्य है. आदेश में कहा गया है कि उम्मीदवार ने निर्धारित कॉलमों में जानकारी दर्ज करने के बजाय अलग परिशिष्टों का सहारा लिया है. यह प्रश्न किसी विवादास्पद व्याख्या का विषय नहीं है, क्योंकि नियम स्पष्ट रूप से निर्धारित प्रारूप में जानकारी देने का निर्देश देते हैं. जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने माना कि शपथपत्र में मांगी गई जानकारी उसी प्रारूप में उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि मतदाता और निर्वाचन तंत्र उम्मीदवार के बारे में पूर्ण एवं स्पष्ट जानकारी प्राप्त कर सकें.
* नागपुर खंडपीठ के फैसले का उल्लेख
अपने आदेश में जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ द्वारा वर्ष 2007 में दिए गए एक निर्णय का उल्लेख किया. उस निर्णय में कहा गया था कि जहां कानून किसी विशेष प्रारूप में जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश देता है, वहां वैकल्पिक प्रारूप स्वीकार नहीं किया जा सकता. इसी सिद्धांत का हवाला देते हुए निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि फॉर्म-26 में मांगी गई जानकारी उसी फॉर्म में दर्ज होना आवश्यक है और उसे अलग परिशिष्टों के माध्यम से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता.
* सुप्रीम कोर्ट के ‘रिसर्जेन्स इंडिया’ फैसले का भी सहारा
जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने अपने आदेश में वर्ष 2012 के सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय रिसर्जेन्स इंडिया बनाम भारत निर्वाचन आयोग का भी उल्लेख किया. इस फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि उम्मीदवारों द्वारा अपनी शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति, देनदारियां और आपराधिक प्रकरणों जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का पूर्ण प्रकटीकरण चुनावी पारदर्शिता का अनिवार्य हिस्सा है. यदि आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती या अधूरी छोड़ी जाती है तो इसे केवल तकनीकी कमी नहीं माना जा सकता. निर्वाचन अधिकारी ने इसी निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित प्रारूप में जानकारी न देना एक सबटेंशियल इफेक्ट यानि मौलिक कमी की श्रेणी में आता है.
*‘कानून जिस तरीके से काम करने को कहे, उसी तरीके से होगा’
जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने अपने द्बारा जारी आदेश में न्यायालयों की ओर से समय-समय पर प्रतिपादित एक महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई कानून किसी कार्य को एक विशेष तरीके से करने का निर्देश देता है तो वह कार्य उसी तरीके से किया जाना चाहिए, अन्यथा उसे वैध नहीं माना जा सकता. निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि फॉर्म-26 के मामले में भी यही सिद्धांत लागू होता है और निर्धारित प्रारूप से हटकर दी गई जानकारी नियमों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं करती.
* शपथपत्र को माना गया अपूर्ण
जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि उम्मीदवार द्वारा आवश्यक जानकारियां निर्धारित फॉर्म-26 में समुचित रूप से उपलब्ध नहीं कराई गईं. इस कारण शपथपत्र को अपूर्ण माना गया तथा वैधानिक आवश्यकताओं का पूर्ण पालन न होने के कारण नामांकन पत्र को स्वीकार नहीं किया जा सकता. जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने यह भी रेखांकित किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना तथा मतदाताओं को उम्मीदवार संबंधी संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है. इसलिए निर्धारित प्रारूप का पालन अनिवार्य है.
* बाजोरिया का नामांकन निरस्त होने से बदले चुनावी समीकरण
सभी आपत्तियों, उम्मीदवार के जवाब, निर्वाचन नियमों, उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों पर विचार करने के बाद जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर ने निर्दलीय प्रत्याशी विप्लव गोपीकिशन बाजोरिया का नामांकन पत्र निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया. साथ ही आदेश की प्रमाणित प्रतियां संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए. ऐसे में बाजोरिया का नामांकन निरस्त होने के चलते अब चुनावी समीकरण बदल गये है.
* अब कानूनी लड़ाई पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन का सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है. निर्दलीय प्रत्याशी विप्लव बाजोरिया के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मुकाबले का पूरा समीकरण बदल गया है. अब राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बाजोरिया द्बारा इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है, और यदि ऐसा होता है, तो अदालत द्बारा इस मामले को लेकर क्या रूख अपनाया जाता है.
फिलहाल जिला निर्वाचन निर्णय अधिकारी आशीष येरेकर के विस्तृत आदेश ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों द्वारा निर्धारित प्रारूप और वैधानिक प्रावधानों का अक्षरशः पालन आवश्यक है. अमरावती की चुनावी राजनीति में आए इस घटनाक्रम ने आगामी दिनों की राजनीतिक सरगर्मियों को और तेज कर दिया है.





