मानसून की बेरुखी से अमरावती जिले में संकट के बादल

40 हजार हेक्टेयर में खरीफ बुवाई अटकी

* संतरे के बाग सूखने लगे बारिश का इंतजार कर रहे किसान
अमरावती/दि. 22- जून का तीसरा सप्ताह समाप्त होने के बाद भी अमरावती जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है. बारिश की लंबी प्रतीक्षा अब किसानों की चिंता का कारण बनती जा रही है. अचलपुर, चांदूर बाजार, खल्लार तथा आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. जिले में लगभग 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में तुअर, कपास और सोयाबीन की बुवाई बारिश के अभाव में अटक गई है. किसानों ने खेतों की तैयारी पूरी कर ली है, बीज और खाद की व्यवस्था भी कर ली है, लेकिन जमीन में पर्याप्त नमी नहीं होने से अधिकांश किसान बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं. जिन किसानों ने जोखिम उठाकर शुरुआती बुवाई कर दी है, उनकी निगाहें अब आसमान पर टिकी हुई हैं. यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो अंकुरण प्रभावित होने और दोबारा बुवाई की नौबत आने की आशंका बढ़ गई है.
* संतरे के बागों पर सबसे बड़ा संकट
अचलपुर तहसील संतरा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है. चमके, अचलपुर, बोपापुर, धोतरखेड़ा, गौरखेड़ा, एकलासपुर और खरपी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संतरे के बाग हैं. बारिश में देरी के कारण इन बागों को भारी नुकसान होने लगा है. किसानों के अनुसार कई बागों में 20 से 25 प्रतिशत तक पेड़ सूखने लगे हैं. जिन पेड़ों पर फल लगे हुए हैं, उनके आकार और गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. यदि जल्द वर्षा नहीं हुई तो संतरा उत्पादकों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
* कर्ज लेकर खरीदे बीज, अब बढ़ी चिंता
इस वर्ष खरीफ सीजन की तैयारी के लिए अनेक किसानों ने बैंक ऋण लिया है, जबकि कुछ किसानों ने गहने गिरवी रखकर बीज और कृषि सामग्री खरीदी है. कृषि विभाग ने पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी थी, लेकिन समय पर बारिश की उम्मीद में कुछ किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी. अब लगातार पड़ रही तेज धूप और नमी की कमी के कारण कई स्थानों पर अंकुरण प्रभावित होने लगा है. इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है. तहसील कृषि अधिकारी कार्यालय के अनुसार अचलपुर क्षेत्र में अब तक केवल लगभग 800 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है, जबकि शेष क्षेत्र बारिश की प्रतीक्षा में है.
* कपास और तुअर उत्पादक क्षेत्रों में भी चिंता
सावलापुर, कोल्हा, काकड़ा, शिंदी, असदपुर, चौताला, इसेगांव और इसापुर क्षेत्र कपास तथा तुअर उत्पादन के लिए जाने जाते हैं. इन क्षेत्रों में भी किसान खरीफ बुवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि बुवाई का उचित समय तेजी से निकलता जा रहा है. यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
* चांदूर बाजार में बादल, लेकिन बरसात नहीं
चांदूर बाजार तहसील में पिछले कई दिनों से बादल छाए रहने के बावजूद संतोषजनक बारिश नहीं हुई है. 17 जून को तेज हवा और हल्की बारिश जरूर हुई थी, लेकिन उससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन सकी. इसी दौरान बिजली गिरने की घटना में तीन मवेशियों की मौत भी हुई थी. किसानों ने खेत तैयार कर लिए हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश के अभाव में बुवाई का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है. मौसम विभाग की ओर से बारिश के संकेत दिए जाने के बावजूद मानसून अभी तक पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है.
* गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी असर
बुवाई में देरी का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है. कृषि कार्यों से जुड़े मजदूरों, ट्रैक्टर चालकों, बीज विक्रेताओं और कृषि सामग्री व्यवसायियों की आय भी प्रभावित होने लगी है. ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है.
* खल्लार और दर्यापुर क्षेत्र में भी किसानों की नजर आसमान पर
खल्लार तथा दर्यापुर क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जून का चौथा सप्ताह शुरू होने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की बुवाई ठप पड़ी है. खेत तैयार हैं, लेकिन नमी के अभाव में किसान इंतजार करने को मजबूर हैं. सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को यह चिंता सता रही है कि बीज, खाद, जुताई और अन्य कृषि कार्यों पर किया गया खर्च कहीं व्यर्थ न चला जाए. गांव-गांव में एक ही सवाल सुनाई दे रहा है-बारिश आखिर कब होगी?
* मौसम विभाग की उम्मीद पर टिकी नजरें
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होने और वर्षा की संभावना जताई है. हालांकि किसान अब भविष्यवाणियों से ज्यादा आसमान की ओर देख रहे हैं. समय पर बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

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