स्थानीय स्वराज्य संस्था के चुनाव रद्द करें
बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार की मांग

* चुनाव प्रक्रिया की पद्धति पर प्रश्न किए खडे
चंद्रपुर /दि.5- बारंबार लागू होनेवाली चुनाव आचार संहिता और उससे विकास कार्यो पर हो रहे परिणामों पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने चुनाव पद्धति पर ही सवाल उठाएं है. उन्होंने लोकल प्राधिकार क्षेत्र अर्थात पालिका, परिषद, पंचायत, मनपा से होनेवाले विधान परिषद चुनाव रद्द करने की मांग कर डाली.
गुरुवार को ही विधान परिषद चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार अरुण लखानी निर्विरोध चुने गए. यहां चर्चा सुनने मिली कि, कांग्रेस नगरसेवकों को 5-5 लाख रुपए देकर बीजेपी ने सैरसपाटे के लिए गोवा भेज दिया था. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर रही. ऐसे में भाजपा के ही वरिष्ठ नेता ने चुनाव रद्द करने की मांग कर दी है.
एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए मुनगंटीवार ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के माध्यम से होने वाले विधान परिषद चुनावों की आलोचना करते हुए कहा, देश के केवल कुछ राज्यों में ही यह व्यवस्था लागू है. इन चुनावों के कारण नगरसेवकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर अनावश्यक राजनीतिक दबाव बनता है. यदि विधायक बनना है तो सीधे जनता के बीच से चुना जाना चाहिए. जब स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनाव ही नहीं हुए हैं, तब ऐसे चुनाव कराना ग्रामीण जनता के साथ अन्याय है.
* पिछले पांच वर्षों में 315 दिन आचार संहिता
आचार संहिता के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न चुनावों के कारण कुल 315 दिन आचार संहिता लागू रही. इसमें साप्ताहिक और सार्वजनिक छुट्टियों को जोड़ दिया जाए तो प्रशासन का बड़ा समय वास्तविक कामकाज के बिना ही निकल जाता है. उन्होंने प्रश्न किया, यदि पूरे वर्ष आचार संहिता के ही प्रतिबंध रहेंगे, तो विकास कार्य कैसे किए जाएंगे?
उन्होंने दावा किया कि सिंदेवाही तहसील के गुंजेवाही गांव में बाघ के हमले में चार महिलाओं की मृत्यु के बाद आवश्यक उपायों पर बैठक आयोजित करने का प्रयास भी आचार संहिता के कारण अटक गया. उन्होंने कहा, यदि हर प्रशासनिक निर्णय के सामने आचार संहिता बाधा बन रही है, तो इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.
चंद्रपुर जिले में विधान परिषद चुनाव निर्विरोध होने का उल्लेख करते हुए मुनगंटीवार ने कहा, अब विकास कार्यों से जुड़ी बैठकों को फिर से शुरू किया जा सकेगा. लेकिन चुनाव आयोग का यह निर्णय लोकतंत्र की दृष्टि से उचित नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर केंद्र सरकार को भी पत्र भेजा जाएगा.





