जनगणना 2027: प्रगणकों के लिए सख्त निर्देश

लापरवाही पड़ेगी भारी

वर्धा /दि.3– जनगणना एक राष्ट्रीय कर्तव्य है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. केंद्र और राज्य सरकार ने इस संबंध में सख्त रुख अपनाया है. जनगणना कार्य निदेशालय, महाराष्ट्र की मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी डॉ. निरुपमा जे. डांगे ने राज्य के सभी महानगरपालिका आयुक्तों और जिलाधिकारियों को इस संबंध में कड़े आदेश जारी किए हैं.
* ’स्व-गणना’ के बारे में पूछना अनिवार्य
प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कई प्रगणक घर-घर जाकर सर्वे करते समय नागरिकों से ’स्व-गणना’ यानी ’एसई आईडी’ के बारे में कोई पूछताछ नहीं कर रहे हैं और जल्दबाजी में नई जानकारी भर रहे हैं. इससे नागरिकों द्वारा पहले से भरा गया वैध डेटा मुख्य डेटाबेस में शामिल होने से छूट रहा है. अब प्रत्येक परिवार से क्या आपके परिवार ने स्व-गणना की है? यह प्रश्न पूछना प्रगणकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है.
* ’एचएलओ’ मोबाइल ऐप
क्षेत्रीय कार्य के लिए 30 दिनों की समय-सीमा कुछ प्रगणक केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए जल्दबाजी में काम निपटा रहे हैं, जिससे जानकारी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. घर की सूची बनाने, मानचित्र तैयार करने और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें प्रगणकों को पर्याप्त समय देना आवश्यक है. निर्देश दिए गए हैं कि जानकारी केवल ’एचएलओ’ मोबाइल ऐप के माध्यम से ही एकत्रित की जाए. यदि अपरिहार्य परिस्थितियों में कागजी प्रपत्र का उपयोग किया जाता है, तो उसका तुरंत डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए.
* प्रगणकों में भ्रम की स्थिति
प्रश्नावली की त्रुटियों में सुधार के निर्देश प्रश्नावली के कुछ तकनीकी पहलुओं को लेकर प्रगणकों में भ्रम की स्थिति पाई गई है. पेयजल के मुख्य स्रोत, शौचालय की उपलब्धता और सीवर सफाई जैसे तकनीकी विषयों पर गलत प्रविष्टियाँ की जा रही हैं. इन त्रुटियों को सुधारने के लिए चार्ज अधिकारियों को ’सीएमएमएस’ पोर्टल के माध्यम से निगरानी करने और ’एडीट आप्टर सिंक’ सुविधा का उपयोग करने का आदेश दिया गया है. साथ ही, पर्यवेक्षकों को प्रगति की समीक्षा करने और सीधे मैदान में जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

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