1.21 लाख लाडली बहनों को ‘डच्चू’!

महिला व बाल कल्याण विभाग में लाभार्थियों के चल रहे चक्कर

अमरावती/दि.29– ‘मुख्य मंत्री माजी लाडकी बहिण’ योजना अंतर्गत नियमों व शर्तो के नाम पर लगातार दूसरी बार लाभार्थी महिलाओं को ‘डच्चू’ दिया गया है. एक परिवार की किसी एक ही महिला को लाभ दिया जायेगा, आयु मर्यादा, घर में चार पहिया वाहन तथा केवायसी में रहनेवाली त्रुटि जैसे कारणों के चलते कई लाभार्थी महिला को योजना से अपात्र करते हुए लाभ के दायरे से बाहर कर दिया गया है. पहले चरण में 21 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु वाली 12 हजार 351 महिला लाभार्थियों सहित कुल 66 हजार 818 महिला लाभार्थियों को अपात्र ठहराया गया था. वहीं अब दूसरे चरण में 55 हजार महिला लाभार्थियों को अपात्र ठहराया गया है. इस तरह से जिले की कुल 1 लाख 21 हजार 818 लाडली बहनों को योजना से बाहर करते हुए उन्हें दिया जानेवाला लाभ बंद कर दिया गया है.
तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्बारा शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री माजी लाडकी बहिण’ योजना में शामिल लाडली बहनों की अब सरकारी स्तर पर जांच पडताल की जा रही है. इस योजना का आर्थिक भार अन्य विभागों पर होने की वजह से अपात्र लाडली बहनों को सूची से हटाने का काम शुरू किया गया है. अमरावती जिले में इस योजना के लिए कुल 7 लाख 20 हजार 575 महिलाओं द्बारा आवेदन किया गया था. जिसमें से 22 हजार 472 आवेदनों को खारिज करते हुए 6 लाख 98 हजार 103 महिलाओं को इस योजना हेतु पात्र माना गया था और उन्हें योजना का लाभ देना शुरू किया गया है. विधानसभा चुनाव के पहले लाडली बहन योजना के लिए सभी महिलाओं से आवेदन करने का आवाहन किया गया था. लेकिन अब दिनोंदिन नियम व शर्त के मानक लगाते हुए लाभार्थी महिलाओं की संख्या कम किया जा रहा है.
अमरावती जिले में एक ही परिवार में इससे अधिक महिलाओं द्बारा इस योजना का लाभ लेेने जाने की बात पडताल के दौरान सामने आयी है. एक परिवार में दो लाभार्थी महिलाएं रहने पर एक का विवाहित और एक का अविवाहित रहना बेहद आवश्यक रहने के चलते इस मानक की पूर्तता नहीं करनेवाली सर्वाधिक 49 हजार 493 लाडली बहनों को योजना के दायरे से बाहर किया गया, ऐसी जानकारी महिला व बाल कल्याण विभाग के सूत्रों से ही पता चली है.
मार्च और अप्रैल महिने का लाभ लाभार्थी महिलाओं को मिलना अपेक्षित रहने के चलते मई माह में लाभार्थी महिलाओं के खाते में 3-3 हजार का अनुदान जमा होना शुरू हुआ. परंतु कई लाभार्थी महिलाओं के खामे में अनुदान जमा न होने के चलते महिलाओं ने अपने अनुदान के लिए महिला व बाल विकास विभाग में चक्कर काटने शुरू कर दिए.

* 4707 महिलाओं के पास चार पहिया वाहन
चार पहिया वाहन रहनेवाली 5 हजार 992 लाडली बहनों की सूची सरकार द्बारा महिला व बाल विकास विभाग को सौंपी गई थी. जिसे आरटीओ कार्यालय के पास पडताल हेतु भेजा गया था. जिसमें से 4 हजार 707 लाडली बहनों के नाम पर 4 पहिया वाहन रहने की बात स्पष्ट होते ही उन्हें लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया गया.

* क्या करें किसी को पता ही नहीं
कई लाभार्थी महिलाओं के बचत खातों में दो माह का अनुदान भी जमा नहीं हुआ. जबकि अन्य कई महिलाओं के खाते में अनुदान की राशि जमा हो चकी है. ऐसे में अनुदान के लाभ से वंचित महिलाओं को समझ में नहीं आ रहा कि अब क्या किया जाए. वहीं दूसरी ओर महिला व बाल कल्याण विभाग में इससे संबंधित कोई सूची उपलब्ध नहीं है. जिसके चलते नाम काटे जाने की ठोस वजह भी पता नहीं चल रही. जिसके चलते लाभ से वंचित महिलाओं में जबर्दस्त संताप की लहर है.

* पात्र रहने के बावजूद सूची से नाम गायब
लाडली बहन योजना का आर्थिक बोझ अन्य विभागों पर पडने की वजह को आगे करते हुए सूची से महिलाओं के नाम हटाने का काम शुरू किया गया. केवायसी के बाद पात्र रहनेवाली कई महिलाओं को मार्च व अप्रैल माह का अनुदान नहीं मिला है. जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का प्रमाण सर्वाधिक है.
अंगवाडी सेविका पर जिम्मेदारी
लाभार्थी लाडली बहनों की गांव निहाय सूची भेजकर अंगणवाडी सेविका द्बारा पडताल की जायेगी. लाडली बहनों के आवेदन भरने की जिम्मेदारी अंगणवाडी सेविकाओं द्बारा ही पूरी की गई थी. जिसके चलते अब पडताल की जिम्मेदारी भी अंगणवाडी सेविका पर ही सौंपी जा रही है. इस बारे में पूछताछ करने पर कुछ अंगणवाडी सेविकाओं द्बारा बताया गया है कि उनके पास केवल आवेदन भ्रने का ही काम था. वहीं लाभार्थियों को पात्र व अपात्र ठहराने का काम सरकारी स्तर पर किया जा रहा है.

* सरकार ने लाडली बहनों को थमाया ‘चॉकलेट’
लाडली बहन योजना के नाम पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस द्बारा राज्य की महिलाओं को ‘चॉकलेट’ देने का काम किया जा रहा है. साथ ही अब जिस तरह से अलग-अलग वजहों को आगे करते हुए इस योजना से महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं. उसे देखते हुए यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि इस योजना को केवल विधानसभा के चुनाव के लिए भी शुरू किया गया था और अपना मतलब निकल जाते ही इस योजना के दायरे को सीमित किया जा रहा है.
– जयश्री वानखडे,
शहराध्यक्ष, महिला कांग्रेस

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