मेलघाट की कुटीर साडी को वैश्विक पहचान
ऑस्ट्रेलियाई विचारक बारबरा ओ नील ने पहनकर की सराहना

अमरावती /दि.1- अमरावती जिले के दुर्गम मेलघाट क्षेत्र की आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं की कला एवं कौशल को अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बडी पहचान मिली है. महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल के विके्ंरदीकरण सोलर चरखा समूह कार्यक्रम के अंतर्गत कस्तुरबा सोलर खादी महिला समिति की महिलाओं द्बारा तैयार की गई कुटीर ब्रांड की साडी ने वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोडी है.
दिल्ली में आयोजित लिव वेल लिव नेचुरली कार्यक्रम के दौरान आस्ट्रेलिया के प्रसिध्द स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक जीवनशैली विशेषज्ञ बारबरा ओ नील को सोलर चरखा कपडे से निर्मित यह आकर्षक साडी भेंट की गई थी. साडी की उत्कृष्ट गुणवत्ता, सुंदरता और बेहतरीन हस्तकला से प्रभावित होकर बारबरा ओ नील ने मुंबई में आयोजित अपने अगले बडे कार्यक्रम में यह साडी पहनकर उपस्थित लोगों को संबोधित किया. धारणी तहसील के मांडू गांव की महिला कारीगरों ने अपने परिश्रम, द़ृढ संकल्प और कलात्मक कौशल के बल पर इस उत्पाद को तैयार किया है. इस साडी को मिली वैश्विक सराहना पूरे महाराष्ट्र के लिए गौरव का विषय बनी है. इस पहल के माध्यम से मेलघाट की महिलाओं को न केवल रोजगार मिला है. बल्कि वे आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ सतत विकास के दिशा में भी आगे बढ रही है. अमरावती के जिला ग्रामोद्योग अधिकारी प्रदीप चेचरे ने कहा कि मेलघाट से दुनिया तक का यह सफर अब केवल एक सपना नहीं रहा. बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हाथों से बुनी गई एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बन चुका है. इससे कुटीर ब्रांड को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्राप्त हुई है.