‘एन्ड्रॉइड-12’ की सख्ती से ‘गुरुजी’ फंसे दिक्कत में
एप आधारित जनगणना के लिए शिक्षकों पर मोबाइल खरीदने का बोझ

अमरावती/दि.28– जनगणना प्रक्रिया के मद्देनजर जिले में शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरी रफ्तार के साथ चल रहा है. जिसके लिए प्रयुक्त होनेवाले मोबाइल एप के लिए कम से कम ‘एन्ड्राइड-12’ मोबाइल हैंडसेट की शर्त को अनिवार्य किया गया है. जिसके चलते कई शिक्षकों के पास इस समय रहनेवाले मोबाइल निष्प्रभावी साबित हो रहे है और उन पर नया मोबाइल खरीदने की नौबत आन पडी है. ‘बीवायओडी’ निति अंतर्गत सरकार द्वारा किसी भी तरह की कोई साधन सामग्री दिए बिना शिक्षकों से खुद उनके ही मोबाइल पर जनगणना का काम करने की अपेक्षा रखी गई है.
आगामी समय में होनेवाली जनगणना के मद्देनजर इस समय जिले की सभी तहसीलों में प्रशिक्षण सत्र चल रहे है. जिसके जरिए शिक्षकों को जनगणना की पूरी प्रक्रिया समझाकर बताई जा रही है. प्रत्येक शिक्षक को एक तय क्षेत्र जनगणना हेतु दिया जाना है और उन्हें गर्मी की छुट्टियों के दौरान अपने अंतर्गत रहनेवाले क्षेत्र के प्रत्येक घर जाकर वहां पर रहनेवाले लोगों की जानकारी को संकलित करना है. यह प्रक्रिया 15 मई से 16 जून के दौरान अमल में लाई जाएगी. जिसके तहत परिवार में सदस्यों की संख्या, उम्र, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय, स्थलांतर व निवास स्थिति सहित विविध जानकारी मोबाइल एप में दर्ज करनी होगी. प्रत्येक घर का जीपीएस लोकेशन, घर का प्रकार, पानी, बिजली व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी को एप पर अपलोड करना होगा. साथ ही कुछ स्थानों पर घरों के फोटो अपलोड करने के निर्देश भी दिए गए है, ऐसी जानकारी कुछ शिक्षकों द्वारा दी गई है. इस पूरी प्रक्रिया के लिए इंटरनेट कनेक्टीवीटी, मोबाइल क्षमता व अद्यावत साफ्टवेयर आवश्यक रहने के चलते शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आन पडा है.
बता दें कि, वर्ष 2027 की राष्ट्रीय जनगणना डिजिटल साधन के जरिए होनेवाली पहली जनगणना है. इस जनगणना के पहले चरण में घरों की गिनती का काम शुरु करने से पहले प्रशिक्षण दिया जा रहा है. डिजिटल साधनों के जरिए जनगणना रहने के चलते प्रत्येक प्रगणक एवं पर्यवेक्षक के पास एन्ड्राईड मोबाइल का रहना आवश्यक है अन्यथा घर एवं परिवारों की गणना हो ही नहीं सकती. जिसके चलते जनगिनती की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है. इस वस्तुस्थिति का विचार कर तथा जनगणना के कामों हेतु आवश्यक रहनेवाला महंगा नया मोबाइल खरीदना संभव नहीं रहने की बात को ध्यान में रखते हुए जनगणना की ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को अद्यावत मोबाइल उपलब्ध कराए जाने की मांग शिक्षक समिति के प्रदेश अध्यक्ष विजय कोंबे, राजन कोरगांवकर व राजेश सावरकर द्वारा की गई है.
* प्रशिक्षण को लेकर नाराजगी
जनगणना का काम सरकारी रहने के बावजूद इसके लिए शिक्षकों द्वारा अपनी जेब से पैसा खर्च क्यों किया जाए, ऐसा संतप्त सवाल शिक्षकों द्वारा उपस्थित किया गया है. ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों पर इसका सर्वाधिक असर पडता दिखाई दे रहा है. जिनके पास अद्यावत मोबाइल नहीं रहने के चलते उन पर आर्थिक बोझ बढ गया है. आवश्यक साधनसामग्री बिना दिए पूरी जवाबदारी शिक्षकों पर डाल दिए जाने के चलते प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों द्वारा अपनी नाराजगी जताई जा रही है और जनगणना संबंधी काम के लिए मोबाइल उपलब्ध करवाकर देने की मांग की जा रही है.





