स्मशान से निकाल कंकाल लाया बैंक में

अधिकारियों के अडियल रवैये से परेशान होकर उठाया कदम

* प्रशासनिक संवेदनहीनता की ओडिसा में घटना
दिल्ली /दि.28- बैंक के कागजी नियमों और प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण एक लाचार भाई को अपनी मृत बहन का कंकाल बैंक में लाने की नौबत आ गई, ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है. ओडिशा के केओंझर जिले के पाटना ब्लॉक की यह घटना इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है और व्यवस्था के अजीब कामकाज पर गुस्सा जताया जा रहा है.
* आखिर क्या है पूरा मामला?
दियानाली गांव के निवासी जितू मुंडा (50) की बड़ी बहन कालरा मुंडा (56) का दो महीने पहले बीमारी के कारण निधन हो गया था. कालरा ने मवेशी बेचकर मेहनत से कमाए 20,000 रुपये ‘ओडिशा ग्रामीण बैंक’ की मालीपोसी शाखा में जमा किए थे. कालरा का कोई वारिस जीवित नहीं होने के कारण, उनके पैसे पाने के लिए जितू मुंडा बार-बार बैंक के चक्कर लगा रहे थे.
* बैंक की शर्त और जितू का चरम फैसला
अशिक्षित जितू मुंडा के अनुसार, उन्होंने कई बार बैंक अधिकारियों को बहन की मौत की जानकारी दी थी. लेकिन बैंक ने उनसे मृत्यु प्रमाण पत्र या ‘खाताधारक को खुद लेकर आओ’ जैसी तकनीकी शर्त रखी, ऐसा आरोप है. इससे परेशान होकर जितू ने आखिरकार श्मशान जाकर बहन की कब्र खोदी और मौत का सबूत देने के लिए उसका कंकाल बोरे में भरकर सीधे बैंक में ले आए.
* पुलिस की मध्यस्थता और मदद का आश्वासन
बैंक में कंकाल देखते ही कर्मचारियों और ग्राहकों में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही पाटना थाना प्रभारी निरीक्षक किरण प्रसाद साहू मौके पर पहुंचे. जितू अशिक्षित है और उसे कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है. बैंक अधिकारी उसे सही प्रक्रिया समझाने में विफल रहे, ऐसा पुलिस ने कहा. इसके बाद पुलिस ने मध्यस्थता करते हुए जितू को बहन के खाते के पैसे दिलाने का आश्वासन दिया और कंकाल को फिर से सम्मानपूर्वक दफनाया गया.
* प्रशासन की भूमिका
इस घटना के बाद स्थानीय गट विकास अधिकारी मानस दंडपत ने मामले का संज्ञान लिया है. कालरा मुंडा के खाते के मूल वारिस की भी मृत्यु हो चुकी होने से कानूनी पेच पैदा हो गया था. लेकिन अब जितू मुंडा ही एकमात्र दावेदार होने के कारण, उन्हें जल्द से जल्द पैसे मिलें, ऐसे निर्देश प्रशासन ने बैंक अधिकारियों को दिए हैं.

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