’मैं कबड्डी का खिलाड़ी हूं, शतरंज का नहीं’

छगन भुजबल का सूचक बयान, बोले मेरी एक ही मांग है...

मुंबई /दि. 8- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा के लिए वरिष्ठ नेता छगन भुजबल इच्छुक थे. हालांकि, राज्यसभा जाने के लिए उन्होंने कुछ शर्तें रखी थीं. उन शर्तों को भाजपा की ओर से ’रेड सिग्नल’ मिल गया. अचानक छगन भुजबल के नाम को दरकिनार कर राजेंद्र जैन की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी गई. कहा जा रहा है कि यह छगन भुजबल के लिए एक बड़ा झटका है. छगन भुजबल ने स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा, भाजपा के सामने प्रस्ताव रखने के बाद, आखिरी एक ही दिन बचा था. आखिरी दिन बस एक ही जवाब आया कि जब मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, तब विचार किया जाएगा. इसलिए भाजपा ने उम्मीदवारी देने से इनकार कर दिया, इन बातों में कोई तथ्य नहीं है.
राज्यसभा की उम्मीदवारी न मिलने के कारण छगन भुजबल के नाराज होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस पर खुद भुजबल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, मैं नाराज नहीं हूं. मैंने कहा था कि ठीक है, जैसा दूसरों को न्याय मिला है. जैसे दूसरों के बच्चे राज्यसभा, लोकसभा में हैं और मंत्री हैं; उसी तरह, मैंने भी इस पार्टी की स्थापना से ही शरद पवार के साथ मिलकर पहल की है. मुझे भी वैसा ही न्याय मिलना चाहिए, यह मांग करते हुए भुजबल ने अपने मन की कसक जाहिर की. जब उनसे पूछा गया कि क्या इस पूरी घटनाक्रम में आपके साथ अन्याय हुआ है? तो भुजबल ने कहा, वह अन्याय मतलब, यह तो चलता ही रहता है. आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों. मैं कबड्डी का खिलाड़ी हूं, शतरंज का नहीं, ऐसा भी छगन भुजबल ने स्पष्ट किया.
भुजबल के नाराज होने की चर्चा इस बीच, उम्मीदवारी न मिलने के कारण छगन भुजबल के नाराज होने की जोरदार चर्चाएं रहीं. हालांकि, बाद में सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया कि छगन भुजबल नाराज नहीं हैं. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था. इस रिक्त हुई सीट पर किसे मौका दिया जाए, इसे लेकर पार्टी में चर्चा चल रही थी. वरिष्ठ नेता छगन भुजबल राज्यसभा के लिए उत्सुक थे, लेकिन अब पार्टी की ओर से राजेंद्र जैन को उम्मीदवार बनाया गया है.
राज्यसभा की सीट पर छगन भुजबल की नियुक्ति न होने के कारण उनके पार्टी से नाराज होने की चर्चाओं के बीच, देवगिरी बंगले पर हुई बैठक के बाद बिना कोई प्रतिक्रिया दिए छगन भुजबल और समीर भुजबल वहां से चले गए. बताया जा रहा है कि छगन भुजबल की ओर से समीर भुजबल को राज्य में मंत्री पद देने की शर्त रखी गई थी, जिसे भाजपा की ओर से ’रेड सिग्नल’ मिल गया था.

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