जी. एच. रायसोनी विद्यापीठ में इंट्रा मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित

अमरावती/दि.13 – जी. एच. रायसोनी विद्यापीठ के विधि विद्यालय ने हाल ही में दो दिवसीय इंट्रा मूट कोर्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया. इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विधि के छात्रों में वकालत कौशल, कानूनी शोध क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, न्यायालय शिष्टाचार और आत्मविश्वास का विकास करना था. प्रतियोगिता ने छात्रों को कानूनी तर्क प्रस्तुत करने, प्रावधानों की व्याख्या करने तथा न्यायाधीशों के प्रश्नों का उत्तर देने का व्यावहारिक मंच प्रदान किया.
प्रतियोगिता का शुभारंभ विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. स्नेहिल जायसवाल तथा विधि विद्यालय के डीन डॉ. नित्यानंद पांडे की उपस्थिति में उद्घाटन सत्र से हुआ. डॉ. जायसवाल ने औपचारिक रूप से प्रतियोगिता का उद्घाटन किया, जिसके बाद डीन ने छात्रों को संबोधित किया. गणमान्य व्यक्तियों ने छात्रों को उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया तथा कानूनी शिक्षा में मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं के महत्व पर बल दिया. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन वकालत कौशल, कानूनी तर्क, शोध क्षमता और व्यावसायिक नैतिकता का विकास करते हैं, जो सफल कानूनी करियर के लिए आवश्यक हैं. प्रथम दिन तीन प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं एडवोकेट प्रथमेश गणेशकर, एड. शीतल पालीवाल तथा एडवोकेट अनिकेत जुंघारे की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी. प्रतियोगिता में तीन-तीन सदस्यों वाली कुल पांच टीमों ने भाग लिया. छात्रों ने न्यायाधीशों के समक्ष अपने तर्क प्रस्तुत कर कानूनी सिद्धांतों की समझ, शोध एवं प्रारूपण कौशल तथा न्यायालयीन प्रस्तुति का प्रदर्शन किया. न्यायाधीशों ने टीमों का मूल्यांकन कानूनी ज्ञान, तर्कों की स्पष्टता, प्रासंगिक कानूनों की व्याख्या, प्रस्तुति कौशल, न्यायालयीन आचरण तथा प्रश्नों के प्रभावी उत्तर देने की क्षमता के आधार पर किया. प्रारंभिक दौरों ने प्रतिभागियों को कानूनी तर्क-वितर्क का वास्तविक अनुभव प्रदान किया तथा उनके आत्मविश्वास व पेशेवर संचार को मजबूत बनाया.
द्वितीय दिन अतिथि एवं न्यायाधीश के रूप में एड. सुयोग माथुरकर तथा एड. कार्तिक गजबिये ने प्रदर्शनों का मूल्यांकन किया. प्रारंभिक प्रदर्शन के आधार पर चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं. इन टीमों ने अधिक आत्मविश्वास के साथ तर्क प्रस्तुत कर अपनी कानूनी समझ, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा वकालत कौशल का प्रदर्शन किया. फाइनल के लिए टीम ‘ए’ तथा टीम ‘डी’ का चयन हुआ. दोनों टीमों ने समर्पण, आत्मविश्वास तथा कानूनी मुद्दों की गहरी समझ के साथ तर्क प्रस्तुत किए. न्यायाधीशों के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के पश्चात टीम ‘ए’ को विजेता तथा टीम ‘डी’ को उपविजेता घोषित किया गया. यह परिणाम छात्रों द्वारा प्रदर्शित कड़ी मेहनत, तैयारी, टीमवर्क तथा वकालत कौशल की मान्यता था. इस दो दिवसीय इंट्रा मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समन्वय सहायक प्रोफेसर एड. शीतल वारंकर ने किया. प्रतियोगिता ने विद्यापीठ के विधि छात्रों के व्यावहारिक अधिगम अनुभव को सुदृढ़ किया. प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं की भागीदारी तथा विद्यापीठ अधिकारियों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को सूचनाप्रद एवं प्रेरणादायक बनाया. छात्रों को न्यायालयीन प्रक्रियाओं की जानकारी मिली, कानूनी शोध एवं प्रारूपण कौशल में सुधार हुआ, मौखिक वकालत क्षमता बढ़ी तथा न्यायिक मंच के समक्ष तर्क प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास विकसित हुआ.





