नसरापूर प्रकरण में न्यायालय का बड़ा फैसला
28 दिनों में आरोप तय: अब रोज होगी सुनवाई

* निर्घृण कृत्य के बाद न्यायालय सख्त
पुणे/दि.28 – पुणे जिले के भोर तहसील में हुए नसरापूर अत्याचार और हत्या मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला लेते हुए आरोपी के खिलाफ महज 28 दिनों में आरोप तय कर दिए हैं. इस गंभीर मामले की अब फास्टट्रैक पद्धति से सुनवाई होगी और रोज ‘इन कैमरा’ तरीके से मुकदमा चलाया जाएगा. न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ प्रथमदृष्टया सबूत होने का निरीक्षण दर्ज किया है, जिससे इस मामले को अब निर्णायक मोड़ मिल गया है. इस घटना से पूरा राज्य दहल गया था, ऐसे में न्यायव्यवस्था द्वारा ली गई तेज भूमिका का स्वागत किया जा रहा है.
इस मामले के आरोपी को पहली बार प्रत्यक्ष रूप से न्यायालय में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान आरोपी के वकीलों ने आरोप तय करने का विरोध किया. लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर दिए. इस मामले में पुलिस ने महज 15 दिनों में आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद लैंगिक जांच रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूत न्यायालय के सामने पेश किए गए. उनकी जांच के बाद न्यायालय ने आगे की सुनवाई रोज करने का फैसला दिया.
1 मई को नसरापूर में यह चौंकाने वाली घटना हुई थी. घर के सामने खेल रही बच्ची को आरोपी गोठे में ले गया और उसके साथ अत्याचार करने का आरोप है. इसके बाद पत्थर से उसकी हत्या कर शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया गया था. दोपहर से बच्ची दिखाई नहीं देने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की. बाद में गोठे में उसका शव मिलने से इलाके में बड़ी खलबली मच गई. सीसीटीवी फुटेज की जांच में आरोपी बच्ची को गोठे की ओर ले जाते हुए दिखाई दिया, जिससे पूरा मामला सामने आया.
इस घटना के बाद गांव में गुस्से की लहर फैल गई थी. आरोपी ने बच्ची को बछड़ा दिखाने का कहकर उसका हाथ पकड़कर गोठे में ले जाने की जानकारी सामने आई. गर्मी की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई इस बच्ची के साथ ऐसा होने से परिवार पूरी तरह टूट गया है. दोपहर साढ़े तीन बजे के सीसीटीवी फुटेज ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया. घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस को घेरते हुए आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. आखिरकार ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.
चौंकाने वाली बात यह है कि इतना गंभीर अपराध करने के बाद भी आरोपी ने न्यायालय में दावा किया कि उसने कुछ गलत नहीं किया. न्यायाधीश ने जब उससे मामले की जानकारी पूछी, तो उसने यह एक मारपीट का मामूली मामला है, ऐसा जवाब दिया बताया जा रहा है. आरोपी के इस बयान से न्यायालय में मौजूद सभी लोगों में गुस्सा फैल गया. पुलिस जांच में आरोपी के खिलाफ पहले भी ऐसे ही दो मामलों की जानकारी सामने आई है. हालांकि सबूतों के अभाव में वह बरी हो गया था, ऐसा भी बताया जा रहा है.





