अश्लील वीडियो मामले में पीडितों व वीडियो का आंकडा संदेहित
पुलिसिया जांच में 18 वीडियो और 39 आपत्तिजनक फोटो बरामद

* अब तक केवल 8 पीड़िताओं की हुई पुष्टि, पहचान को रखा गया है पूरी तरह से गुप्त
अमरावती/दि.16- जुडवां शहर में उजागर अश्लील वीडियो मामले को लेकर आम जनमानस में चल रही चर्चाओं तथा पुलिस द्वारा की जा रही जांच के बीच वायरल वीडियो के आंकड़ों को लेकर एक बड़ा अंतर सामने आ रहा है, जिसने पूरे जिले में हलचल मचा दी है. इस मामले की शुरुआत से ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा यह दावा किया जा रहा था कि पीड़ित लड़कियों की संख्या 50-60 से अधिक है और वायरल किए गए वीडियो की संख्या 100 के पार है, लेकिन पुलिस की अब तक की जांच में केवल 8 पीड़ित युवतियों की ही पुष्टि हो पाई है. साथ ही इस मामले में आपत्तिजनक रहनेवाले 18 वीडियो व 39 फोटो ही बरामद हो पाए है. जिसके चलते आम जनमानस के बीच पीडिताओं सहित वायरल वीडियोज की संख्या को लेकर जारी चर्चा को अब संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है.
बता दें कि, महज 19 साल के आरोपी अयान अहमद तनवीर अहमद पर कई नाबालिग लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फांसते हुए उनका यौन शोषण करने तथा उनके अश्लील व आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने का बेहद गंभीर आरोप लगा है. यह मामला उजागर होने के बाद पुलिस विभाग द्वारा की गई तकनीकी जांच और मोबाइल डेटा की तलाशी में अब तक 18 अश्लील वीडियो और 39 आपत्तिजनक फोटो बरामद किए गए हैं. हालांकि, शुरुआत में जिस तरह से 50-60 से अधिक युवतियों के जीवन से खिलवाड़ की बात फैलाई गई, उसने समाज में भारी रोष पैदा कर दिया था. अब जांच के निष्कर्ष और शुरुआती दावों में मेल न बैठने के कारण आम जनता के मन में संशय की स्थिति बनी हुई है.
इस संवेदनशील मामले में कानून के जानकारों और ग्रामीण जनता का मानना है कि अपराधी चाहे कोई भी हो, चाहे वह अयान हो या खरात, उसे कानून के दायरे में रहकर कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए. लेकिन साथ ही, बिना किसी ठोस प्रमाण के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से जांच की दिशा भटकने का डर भी बना रहता है. फिलहाल, पुलिस अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि सच सामने आ सके.
*जांच का सच और आंकड़ों का मायाजाल
पुलिस जांच में फिलहाल 8 पीड़िताओं की पुष्टि हुई है, जबकि 18 वीडियो साक्ष्य के रूप में मिले हैं. जनप्रतिनिधियों द्वारा बताए गए पीडिताओं और वायरल वीडियो के आंकड़े और वास्तविक साक्ष्यों में जमीन-आसमान का अंतर है. निष्पक्ष न्याय के लिए दावों के बजाय केवल साक्ष्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई होना समय की मांग है.





