स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में तीन साल में 311 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी
303 कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर, आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर उठे सवाल

* सूचना के अधिकार से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
नागपुर/ दि. 9 – देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में पिछले तीन वर्षों के दौरान कर्मचारियों की संलिप्तता वाले धोखाधड़ी के मामलों ने बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैंक के 303 कर्मचारियों की संलिप्तता वाले मामलों में कुल 311 करोड़ 8 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी सामने आई है. यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में एसबीआई के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी एवं उपमहाप्रबंधक राकेश एमा द्वारा उपलब्ध कराई गई है.
* तीन वर्षों में हजारों धोखाधड़ी के मामले
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच बैंक में धोखाधड़ी के हजारों मामले दर्ज किए गए. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,717 मामलों में करीब 2,445 करोड़ 76 लाख रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई. इसके बाद 2024-25 में 13,782 मामलों में 2,122 करोड़ 36 लाख रुपये और 2025-26 में 2,247 मामलों में 1,745 करोड़ 23 लाख रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई. हालांकि कुल मामलों और राशि में धीरे-धीरे कमी दिखाई दे रही है, लेकिन बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता ने मामले को अधिक गंभीर बना दिया है.
* कर्मचारियों की भूमिका से हुआ 311 करोड़ रुपये का नुकसान
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 114 कर्मचारियों से जुड़े मामलों के कारण बैंक को 137 करोड़ 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ. वर्ष 2024-25 में 100 कर्मचारियों की संलिप्तता वाले मामलों में 70 करोड़ 98 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई. वहीं 2025-26 में 89 कर्मचारियों से जुड़े मामलों में 103 करोड़ 6 लाख रुपये की वित्तीय हानि हुई. तीनों वर्षों के आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो 303 कर्मचारियों की संलिप्तता वाले मामलों से बैंक को कुल 311 करोड़ 8 लाख रुपये का नुकसान हुआ है.
* पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मामले
आरटीआई के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2026 के बीच देश में एसबीआई से संबंधित सबसे अधिक धोखाधड़ी के मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए. राज्य में 3,426 मामलों में लगभग 143 करोड़ 67 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सामने आए ये मामले बैंकिंग क्षेत्र में निगरानी और आंतरिक नियंत्रण तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को दर्शाते हैं.
* साइबर धोखाधड़ी में आई उल्लेखनीय कमी
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2023-24 में 13,237 साइबर धोखाधड़ी मामलों में 90 करोड़ 97 लाख रुपये की राशि प्रभावित हुई थी. वर्ष 2024-25 में यह संख्या घटकर 10,260 मामलों और 66 करोड़ 70 लाख रुपये तक पहुंच गई. सबसे उल्लेखनीय कमी वर्ष 2025-26 में दर्ज की गई, जब केवल 83 मामलों में 9 करोड़ 6 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी सामने आई.
* बैंकिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि बैंक का दावा है कि धोखाधड़ी के मामलों और वित्तीय नुकसान में कमी आई है, लेकिन कर्मचारियों की संलिप्तता वाले मामलों ने एसबीआई की आंतरिक निगरानी प्रणाली, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मानव संसाधन स्तर पर भी अधिक कठोर नियंत्रण व्यवस्था लागू करनी होगी. साथ ही ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पारदर्शिता से ही बैंकिंग प्रणाली पर जनता का विश्वास मजबूत रखा जा सकता है.





