खरीददारों और विक्रेता दोनों की टैक्स पडताल प्रारंभ
आयकर विभाग को मिला 25,000 करोड़ के प्रॉपर्टी सौदों का ब्यौरा

* इस साल की गई सर्वे और छापेमारी के बाद मिली जानकारी
नागपुर /दि.13– आयकर विभाग को आखिरकार विदर्भ भर के सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से लगभग 25,000 करोड़ रुपये मूल्य के प्रॉपर्टी लेनदेन का लंबित वित्तीय डेटा प्राप्त हो गया है, जो इस साल की गई कई सर्वे और छापेमारी के बाद मिला है. विभाग अब डेटा का विश्लेषण करेगा ताकि हाई-वैल्यू लेनदेन की पहचान की जा सके और यह जांचा जा सके कि खरीदारों और विक्रेताओं ने अपने टैक्स दायित्वों को पूरा किया है या नहीं.
डेटा जमा होने के साथ ही, विभाग इस प्रक्रिया के अगले चरण में चला गया है. इसकी रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और वेरिफिकेशन टीमें रिकॉर्ड की जांच करेंगी और उनकी तुलना आयकर रिटर्न और अन्य उपलब्ध वित्तीय जानकारी से करेंगी. जिन लोगों के लेनदेन में संभावित गड़बड़ी दिखेगी, उन्हें नोटिस भेजा जा सकता है और उनके वित्तीय लेनदेन और टैक्स देनदारी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि इस प्रक्रिया में एसआरओ और अन्य संस्थाओं द्वारा निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन की रिपोर्ट करने के अनुपालन की निगरानी करना शामिल था. विभाग इन कार्यालयों से लंबित जानकारी प्राप्त करने के लिए लगातार फॉलोअप कर रहा था.
डेटा का प्रस्तुत होना इस प्रक्रिया के एक चरण के पूरा होने का प्रतीक है. हालांकि, अब व्यक्तिगत लेनदेन की जांच शुरू होने वाली है. अधिकारी विवरणों की जांच करेंगे ताकि उन मामलों की पहचान की जा सके जिनमें आगे सत्यापन की आवश्यकता है. रिपोर्ट किए गए लेनदेन और टैक्स रिटर्न में घोषित आय के बीच बेमेल होने पर आगे की पूछताछ हो सकती है. यह कवायद स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन रिपोर्टिंग सिस्टम का हिस्सा है. इस ढांचे के तहत, निर्दिष्ट संस्थानों और अधिकारियों को रिपोर्ट करना अनिवार्य है.
निर्दिष्ट हाई-वैल्यू वित्तीय लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देना. इससे विभाग को रिपोर्ट किए गए लेनदेन की तुलना करदाताओं द्वारा घोषित वित्तीय विवरणों से करने में मदद मिलती है. सूत्रों ने दावा किया कि प्रॉपर्टी लेनदेन इस सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क में 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद और बिक्री शामिल है, जो लागू नियमों के अधीन है. इस तरह के लेनदेन विभाग को उन मामलों की पहचान करने में मदद करते हैं जहां प्रॉपर्टी डील का मूल्य आय या संबंधित पक्षों द्वारा घोषित वित्तीय विवरण से मेल नहीं खा सकता है. बैंक भी कुछ हाई-वैल्यू लेनदेन की रिपोर्ट करते हैं. इनमें चालू खातों में 50 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा और बचत तथा अन्य निर्दिष्ट खातों में एक वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख रुपये या उससे अधिक की जमा शामिल है, जो लागू प्रावधानों के अधीन है. एसआरओ से प्राप्त डेटा विभाग को विदर्भ में प्रॉपर्टी लेनदेन की स्पष्ट तस्वीर बनाने में मदद करेगा. अधिकारी यह तय करने से पहले कि क्या कोई आगे की कार्रवाई आवश्यक है, जानकारी की उपलब्ध रिकॉर्ड से जांच करेंगे.





