रोहनखेड़ा-पर्वतपुर के ग्रामीणों ने बांध का काम रोका
पुनर्वास की मांग हुई तेज

अमरावती/दि.3- पेढ़ी बैराज परियोजना के लिए भूमि देने के बाद भी पुनर्वास न होने से नाराज रोहनखेड़ा और पर्वतपुर के ग्रामीणों ने बांध निर्माण कार्य रोक दिया है. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पहले पुनर्वास, फिर बांध का काम के सिद्धांत पर ही आगे बढ़ा जाएगा.
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 850 एकड़ भूमि अधिग्रहित किए जाने के बावजूद विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है. उनका कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. मौजे रामगांव के ग्रुप नंबर 43 की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि ग्रुप नंबर 119 के अधिग्रहण में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं. 2 जून को उपजिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) को ज्ञापन सौंपने के बाद भी सकारात्मक कार्रवाई न होने से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया. ग्रामीणों का कहना है कि भूमि जाने के बाद उनकी खेती, रोजगार और आजीविका समाप्त हो गई है तथा कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
आंदोलन में सतीश गोटे, किशोर भेलकर, मोना भेलकर, राजेश तायडे, ललिता खडसे, जयश्री देशभ्रातार, रवि कोल्हे, शीतल वाल्के, प्रवीण तायडे, सुनीत खडसे, नीलेश कडू, नितिन रायबोले और आकाश खडसे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक विस्थापितों का उचित पुनर्वास नहीं किया जाता, तब तक बांध निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा. वहीं आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर विस्थापितों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पुनर्वास का मुद्दा जल्द नहीं सुलझाया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा.





