अर्धांगिनी को अब मिली ‘आधी मालकी’
6 हजार से अधिक महिलाओं के नाम चढे ‘सात-बारा’ पर

* ‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना के चलते हुई प्रक्रिया सुलभ
* सौभाग्यवतियों का सम्मान, परिवारों की प्रगति में मील का पत्थर
अमरावती/दि.25- कृषि जमिनों के मालकी हक से सालो-साल वंचित रहनेवाली ग्रामीण क्षेत्र की स्त्रियों को सही मायनों में आर्थिक स्वातंत्र्य देने हेतु राज्य सरकार ने ‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना शुरु की है. जिसके जरिए ग्रामीण स्त्री सक्षमीकरण का नया अध्याय जिले की प्रगति में मील का पत्थर साबित होनेवाला है. इस योजना में शामिल होते हुए जिले के 6 हजार से अधिक परिवारों ने अपने परिवार की महिलाओं का सम्मान किया है और अब उन महिलाओं के नाम सात-बारा के दस्तावेज पर झलकने शुरु हो गए है.
उल्लेखनीय है कि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका बेहद उल्लेखनीय रहती है. वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा लगाकर खेतों में पसीना बहाती है, परंतु जमीन के दस्तावेजों पर उनका नाम कहीं भी नहीं रहता. इसी विषमता को दूर करने हेतु राज्य सरकार ने ‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना लाई है. जिसके तहत पति के नाम पर रहनेवाली कृषि भूमि में पत्नी को समान अधिकार मिले, इस हेतु सात-बारा के दस्तावेज पर पत्नी का नाम सह हिस्सेदार के तौर पर लिखा जाता है. इस योजना के अंतर्गत परिवार के कर्ता पुरुष के साथ ही महिला को मालकी हक मिलने के चलते इसे सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा की दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है. योजना का लाभ लेने की इच्छुक महिलाओं द्वारा इस हेतु संबंधित तलाठी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है.
* घर-घर तक पहुंची योजना
गांव के तलाठी कार्यालय में एक आवेदन और संमती पत्र दिए जाने के बाद यह पंजीयन किया जाता है. राजस्व विभाग की इसी तत्परता के चलते महिलाओं को इस योजना का लाभ मिल रहा है. साथ ही इस योजना के चलते अब महिलाओं को समानता का अधिकार और संपत्ति में समसमान हिस्सा मिलने का रास्ता भी खुल गया है.
क्या है ‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना?
महिलाओं के आर्थिक सक्षमीकरण हेतु राज्य सरकार द्वारा ‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना चलाई जा रही है. जिसका मुख्य उद्देश्य खेत जमीन के सात-बारा दस्तावेज पर पति के साथ पत्नी का नाम भी सह हिस्सेदार के तौर पर दर्ज करना है. जिसके चलते घर की महिलाओं को खेतों में कानूनी मालकी हक मिलने के साथ ही सम्मान भी प्राप्त हो रहा है.
* न पंजीयन शुल्क, न मुद्रांक शुल्क
‘लक्ष्मी मुक्ति’ योजना की सबसे बडी विशेषता यह है कि, यह प्रक्रिया पूरी तरह से निशुल्क है. जिसके लिए किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त खर्च नहीं करना होता. महिलाओं का नाम सात-बारा के दस्तावेज पर दर्ज करने हेतु सरकार ने किसी भी तरह के पंजीयन शुल्क या मुद्रांक शुल्क को नहीं लगाया है.
* तलाठी कार्यालय में करना होता है आवेदन
योजना के लाभ हेतु संबंधित तलाठी कार्यालय में निर्धारित प्रारुप के तहत आवेदन देना होता है. साथ ही पति को अपनी जमीन के सात-बारा दस्तावेज पर अपनी पत्नी का नाम शामिल करने के लिए सहमति पत्र भी देना होता है. इसके साथ ही आधार कार्ड, विवाह पंजीयन प्रमाणपत्र एवं मौजूदा सात-बारा दस्तावेज की जरुरत पडती है.
* अन्य योजनाओं में भी होता है लाभ
महिलाओं का नाम सात-बारा पर दर्ज होने के बाद वे फसल कर्ज, स्वयंरोजगार कर्ज, कृषि अनुदान व महिला सक्षमीकरण योजना के लिए भी पात्र साबित होती है. जिसके चलते उन्हें इन योजनाओं का भी लाभ मिलता है.
* महिलाओं को मालकी हक देते हुए उन्हें आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने के लिहाज से सरकार द्वारा एक बेहद बडा व क्रांतिकारी कदम उठाया गया है. राजस्व विभाग द्वारा इस योजना पर प्रभावी रुप से अमल किया जा रहा है.
– विवेक जाधव
उपजिलाधीश, राजस्व.





