जिप के प्राथमिक शिक्षक व सेवा निवृत्त शिक्षकों का जोरदार प्रदर्शन

हर माह वेतन एक तारीख को करने की मांग

* विभागीय आयुक्त, जिलाधीश, जिप सीईओ व शिक्षणाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
अमरावती/दि.9 – अमरावती जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों ने वेतन और पेंशन का नियमित भुगतान प्रत्येक माह की पहली तारीख को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर मंगलवार को जिला परिषद कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय सांकेतिक धरना आंदोलन किया. यह आंदोलन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित किया गया. धरने में शामिल शिक्षकों का कहना था कि महाराष्ट्र शासन के कर्मचारियों का वेतन नियमित रूप से प्रत्येक माह की पहली तारीख को मिलना चाहिए. राज्य स्तर से वेतन निधि उपलब्ध होने के बावजूद अमरावती जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को वेतन एवं पेंशन समय पर नहीं मिल रही है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
शिक्षकों ने बताया कि वेतन और पेंशन में होने वाली देरी के कारण परिवार के दैनिक खर्च, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार तथा बैंक ऋण की किस्तों का भुगतान प्रभावित होता है. कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह वेतन और पेंशन पर निर्भर है, इसलिए भुगतान में अनियमितता उनके लिए गंभीर समस्या बन गई है. धरना प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए मांग की कि जिला परिषद के सभी प्राथमिक शिक्षकों का वेतन और सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन प्रत्येक माह की पहली तारीख को नियमित रूप से जारी की जाए. उनका कहना है कि समय पर भुगतान होने से परिवारों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक स्थिरता मिलेगी तथा उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है. इस अवसर पर शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन भी जिला परिषद प्रशासन को सौंपा तथा वेतन एवं पेंशन भुगतान व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग की.
ज्ञापन सौंपने वालों में चेतवा कर्मचारी संगठना के अध्यक्ष सत्येंदु अभ्यंकर, मनोज कावरे, प्रवीण शेंद्रे, सुनील बनसोड, ऋषिकेश कोकाटे, हरिश राणे, अशोक कुर्‍हाडे, शैलेश माकोडे, नीलेश चौधरी, अरुण परतेती, किशोर गणवीर, जयप्रकाश चिठोरे, राजेंद्र जाधव, निखिल पाचघरे, चंद्रशेखर मावंदे, प्रवीण बाखडे, विनायक पवार, गणेश राठोड, छत्रपति ढवले, मोहन चवरे, चंद्रशेखर दालू, अनिल भाकरे, नीलेश रसे, घनश्याम अरमल, विकास रेखाते, विनोद खाकसे, शेख अकीम, साहेबराव परतेती, सचिन डोंगरे, प्रकाश ठाकरे, राजू ढेरे, महेंद्र मेटकर, प्रशांत शेंदूरकर, किशोर मानकर, जावेद खान, अब्दूल खलील, सीएस मामनकर, गोपालकृष्ण वारे, पंडित बनसोड, विलास बाबरे, नीलेश चव्हाण, डॉ. मिलिंद वावुरवाघ, राजेंद्र धांडे, चक्रधर रेखाते, भोजराज जाधव, पवन गवई, मदनसिंग दीक्षित, भास्कर आखरे, सुनील डेहनकर, हेमंत मोहोड, अनिल राठोड, विश्वनाथ चव्हाण, विजय पुसलेकर, महादेव राठोड, राजेंद्र नकाशे समेत सैकडों शिक्षकों का समावेश रहा.

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