129 करोड़ का फंड, फिर भी विकास कार्यों पर रोक!
अमरावती मनपा में प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि, विवाद गहराया

अमरावती/दि.30 – अमरावती मनपा को हाल के महीनों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लगभग 129 करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ है. इसके बावजूद वार्ड स्तर के विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं कराए जाने को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच विवाद गहरा गया है.
महापौर श्रीचंद तेजवाणी ने नगर निगम आयुक्त वर्षा लढ्ढा से मांग की थी कि उपलब्ध फंड में से कम से कम 10 करोड़ रुपये पार्षदों को उनके-अपने वार्डों में विकास कार्यों के लिए दिए जाएं. हालांकि आयुक्त ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया. उनका स्पष्ट कहना है कि सरकारी निधि केवल उसी उद्देश्य के लिए खर्च की जा सकती है, जिसके लिए वह मंजूर की गई है. इसके साथ ही आयुक्त ने ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के पुराने बकाया भुगतान की मांग को भी मंजूरी नहीं दी है. इससे नगर निगम प्रशासन और सभी दलों के पार्षदों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है.
* मनपा को मिला फंड
– शहरी नवीनीकरण योजना : 20 करोड़ रुपये.
– बालासाहेब ठाकरे शहरी अस्पताल योजना : 5 करोड़ रुपये.
– 15वां वित्त आयोग निधि : 15.84 करोड़ रुपये.
– अन्य आवश्यक योजनाएं : 88.20 करोड़ रुपये.
– कुल उपलब्ध निधि : लगभग 129 करोड़ रुपये.
* 15वें वित्त आयोग निधि पर विवाद
प्रशासन का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग केवल ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और जलापूर्ति जैसे निर्धारित कार्यों पर ही किया जा सकता है. पूर्व में मनपा को कर्मचारियों के वेतन और सफाई संबंधी खर्चों के लिए बैंक से ओवरड्राफ्ट लेना पड़ा था. ऐसे में उपलब्ध निधि का अन्य मदों में उपयोग नियमों के विरुद्ध होगा.
* क्या बोले जनप्रतिनिधि?
महापौर श्रीचंद तेजवाणी ने कहा कि उपमहापौर, पार्टी नेताओं और स्थायी समिति अध्यक्ष के साथ उन्होंने आयुक्त से मुलाकात कर वार्ड विकास के लिए 10 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से सहयोग नहीं मिला. भाजपा के पार्टी नेता चेतन गावंडे ने कहा कि, पार्षदों को अपने क्षेत्रों में विकास कार्य कराने के लिए निधि मिलनी चाहिए और इसे वार्ड विकास निधि के रूप में वितरित किया जाना चाहिए. वहीं स्थायी समिति अध्यक्ष अविनाश मार्डीकर का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से विकास निधि देना संभव नहीं है, क्योंकि पहले लगभग 31 करोड़ रुपये के ओवरड्राफ्ट का समायोजन करना आवश्यक है. हालांकि प्रशासन कुछ मामलों में राहत देने पर विचार कर सकता है.
* आचार संहिता का भी असर
आयुक्त वर्षा लढ्ढा के अनुसार, निधि वितरण के नियम पहले से निर्धारित हैं और वर्तमान में लागू आचार संहिता के कारण भी निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. अंतिम निर्णय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद ही लिया जा सकेगा. मनपा में अब यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक संघर्ष का नया केंद्र बनता दिखाई दे रहा है, जबकि नागरिकों की अपेक्षा है कि उपलब्ध निधि का उपयोग शीघ्रता से विकास कार्यों में किया जाए.





