‘आरटीई’ के लिए 5 किमी की शर्त, प्रवेश हेतु 25 मार्च तक समय

अदालती आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षा संचालक ने दी जानकारी

पुणे /दि.17 – शिक्षा अधिकार अधिनियम यानि ‘आरटीई’ के अंतर्गत निजी बिना अनुदानित शालाओं में 25 फीसद आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए शुरु रहनेवाली ऑनलाइन प्रक्रिया में एक बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. जिसके तहत मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के निर्देशानुसार शाला की दूरी के संदर्भ में एक किलोमीटर की शर्त को शिथील कर दिया गया है. जिसके चलते अब अभिभावकों को अपने घर से 3 किमी व 5 किमी के दायरे में रहनेवाली शालाओं का पर्याय चुनने का अवसर मिलेगा. साथ ही आवेदन में संशोधन करने या नया आवेदन प्रस्तुत करने हेतु अब 25 मार्च 2026 तक समयावृद्धि दी गई है. इस संदर्भ में प्राथमिक शिक्षा संचालक शरद गोसावी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए जानकारी दी है.
बता दें कि, इससे पहले 12 फरवरी को जारी शासन निर्णयानुसार आरटीई प्रवेश हेतु अभिभावकों को अपने निवासस्थान से केवल एक किमी के दायरे में रहनेवाली शालाओं का ही चयन करने के लिए कहा गया था. इस शर्त को कुछ अभिभावकों द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

* कठिन शर्तों पर हाईकोर्ट का निरीक्षण
– यदि किसी विद्यार्थी के निवासस्थान से एक किमी वाले दायरे के परिसर में कोई शाला ही उपलब्ध नहीं है, तो उस विद्यार्थी को अधिक दूरी पर रहनेवाली शाला में प्रवेश लेने से रोकना अन्यायकारक साबित होगा. जिसके चलते सरकार ने नियमों में संशोधन कर अधिक दूरी पर रहनेवाली शालाओं का पर्याय भी उपलब्ध कराना चाहिए, ऐसा आदेश अदालत द्वारा जारी किया गया है. इस आदेश के चलते शिक्षा विभाग ने आरटीई प्रवेश हेतु ऑनलाइन प्रणाली में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने का निर्णय लिया है.
– साथ ही 16 मार्च 2026 तक जिन अभिभावकों ने आरटीई के तहत प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन भरा है, उनके आवेदन को ‘अनकन्फर्म’ कर दुबारा ‘कन्फर्म’ करने की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है. इस हेतु संबंधित अभिभावकों को पोर्टल पर ‘पॉपअप’ विंडों के जरिए सूचना दी जाएगी. साथ ही न्यायालय के आदेशानुसार संशोधित नियम लागू करते हुए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया को तत्काल शुरु करने का निर्देश भी दिया गया है. जिसके चलते अभिभावकों को काफी बडी राहत मिली है.

* विद्यार्थियों हेतु सभी शालाओं के पर्याय खुले हों
शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत विद्यार्थियों के प्रवेश हेतु सभी शालाओं के पर्याय खुले रहने चाहिए और उनके पास अपने मन मुताबिक शाला में प्रवेश लेने की छूट होनी चाहिए, ऐसा स्पष्ट करने के साथ ही खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि, प्रवेश हेतु वेबसाइट को जल्द से जल्द शुरु किया जाए.

Back to top button