विदर्भ का राइस मिल उद्योग संकट में, निर्यात रुका
बासमती और अन्य चावल किस्मों के रेट गिरे

* खाडी देशों में युद्ध के कारण कस्टम मिलिंग ठप
गोंदिया /दि.12- खाडी देशों में जारी जंग की वजह से अब बुरे प्रभाग शिद्दत से महसूस किये जा रहे हैं. विदर्भ के प्लास्टिक उद्योग के बाद अब राइस मिल अर्थात चावल उद्योग भी संकट में आ गया है. चावल की निर्यात लगभग ठप हो जाने से राइस मिलर्स संकट में बताये जा रहे हैं. बासमती और अन्य सुगंधित चावल के रेट गिर रहे हैं. प्रति किलो 5 रुपए की गिरावट आ जाने की जानकारी मिलर्स ने दी है.
* पडेगी आर्थिक चोट
विदर्भ राइस मिल एसो. के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि, खाडी देशों का युद्ध लंबा खिंचा तो राइस मिल इंड्रस्टी पर भारी परिणाम होने की आशंका है. चावल व्यापारी भी आर्थिक संकट में फंस सकते हैं. जेएनपीटी बंदरगाह पर कई कंटेनर अटके हैं. उसका भी खामियाजा भुगतना पड सकता है.
* सस्ते हुए चावल
बासमती और उष्णा चावल की निर्यात रोके जाने से उसका सीधा प्रभाव दामों पर पडा. बासमती 5 रुपए प्रति किलो कम हो गया. फलस्वरुप व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका है. धान के रेट भी धडाम हो गये है. मार्केट में धान के खरीददार नहीं समान दिखाई दे रहे हैं. राइस मिल सूत्रों ने बताया कि, कस्टम मिलिंग की दरें कम होने से इस बार राइस मिल संचालक मिलिंग के लिए इच्छूक नहीं रह गये. जिससे कस्टम मिलिंग ठप हो गई है.
* गोंदिया से 4 लाख टन निर्याात
पूर्व विदर्भ में धान का सर्वाधिक उत्पादन लिया जाता है. इसीलिए इस क्षेत्र में गोंदिया, भंडारा सहित चंद्रपुर, गडचिरोली तक चावल मिले हैं. जहां से लगभग 4 टन कृष्णा और बासमती चावल खाडी देशों के साथ ही अफरिका तक निर्यात होता है. भारत के बासमती चावल की इजराइल कतर, सउदी अरब सभी जगह काफी डिमांड होती है. किंतु पखवाडे भर से चल रहे युद्ध के कारण चावल उद्योग संकट में आ गया.





