आत्महत्या प्रभावित किसान परिवारों को राज्य सरकार की बड़ी राहत, 25 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर
अमरावती संभाग को सबसे अधिक 8.76 करोड़ रुपये का आवंटन

मुंबई/अमरावती/दि.10- फसल नुकसान, बढ़ते कर्ज, ऋण अदायगी के दबाव और कृषि संकट के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 25 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है. राजस्व एवं वन विभाग ने 9 जून 2026 को इस संबंध में महत्वपूर्ण शासनादेश जारी करते हुए राज्य के विभिन्न संभागों को निधि वितरित करने का निर्णय लिया है.
सरकार का उद्देश्य किसान आत्महत्या के मामलों में मृतक किसानों के आश्रितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. जारी आदेश के अनुसार संबंधित संभागीय आयुक्तों को उनके अधीनस्थ जिलों की मांग के अनुसार यह निधि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
* अमरावती संभाग को मिला सबसे अधिक निधि
राज्य में किसान आत्महत्या की सबसे अधिक घटनाएं विदर्भ क्षेत्र, विशेषकर अमरावती संभाग में दर्ज होती रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अमरावती संभाग के लिए सर्वाधिक 8 करोड़ 76 लाख रुपये मंजूर किए हैं. इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर संभाग को क्रमशः 5.92 करोड़ और 5.75 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.
* देश में सबसे अधिक किसान आत्महत्याएं महाराष्ट्र में
कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार देश में होने वाली कुल किसान आत्महत्याओं में लगभग 40 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र से जुड़े हैं. राज्य में प्रतिदिन औसतन 17 किसान आत्महत्या कर रहे हैं. बीते सात दिनों में 11 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ही 312 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार खेती की बढ़ती लागत, फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलना, लगातार बढ़ता कर्ज, प्राकृतिक आपदाएं और मौसम की अनिश्चितता किसानों को आर्थिक एवं मानसिक संकट की ओर धकेल रही हैं. यही कारण है कि सरकार को आत्महत्या प्रभावित परिवारों के लिए विशेष सहायता पैकेज जारी करना पड़ा है.
* संभागवार निधि वितरण
संभाग मंजूर निधि
अमरावती 8.76 करोड़ रुपये
छत्रपति संभाजीनगर 5.92 करोड़ रुपये
नागपुर 5.75 करोड़ रुपये
नाशिक 3.39 करोड़ रुपये
पुणे 1.06 करोड़ रुपये
कोकण 12 लाख रुपये
* स्थायी समाधान की मांग
किसान संगठनों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि आर्थिक सहायता प्रभावित परिवारों के लिए राहत का काम करेगी, लेकिन किसान आत्महत्याओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है. संगठनों का कहना है कि किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य, सिंचाई सुविधाएं, आसान ऋण व्यवस्था, प्रभावी फसल बीमा तथा कर्ज राहत जैसी योजनाओं का लाभ समय पर मिलना चाहिए. राज्य सरकार के इस फैसले से हजारों किसान परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है, जबकि कृषि संकट के स्थायी समाधान को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है.





