मेलघाट वन्यजीव हत्याकांड के आरोपी अब भी फरार
20 दिन बाद भी मुख्य आरोपियों का सुराग नहीं

* वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
अमरावती/दि.10- मेलघाट टाइगर रिजर्व के चौराकुंड वन क्षेत्र में जहरीला पदार्थ मिलाकर वन्यजीवों की हत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले के मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं. इस घटना में चार भैंसों, चार भेड़ियों, एक दुर्लभ स्केली बिल्ली, दो बंदरों तथा कई पक्षियों की मौत हुई थी. आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, 22 मई को चौराकुंड वन क्षेत्र में जलस्रोत में जहरीला पदार्थ मिलाए जाने से बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जांच शुरू की और 30 मई को एक आरोपी को गिरफ्तार किया. हालांकि, इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी पड़ गई और अन्य मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर हैं. वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि टाइगर रिजर्व जैसे अत्यधिक संरक्षित क्षेत्र में इतनी बड़ी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है. वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी से संबंधित अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है. मामले को नेशनल टाइगर कंझर्वेशन ऑथोरिटी ने गंभीरता से लिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जांच की धीमी गति को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है. वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो इससे वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं.
मेलघाट टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक आदर्श रेड्डी ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि चार से पांच अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है. उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है और जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है. वन्यजीवों की सामूहिक मौत की इस घटना ने मेलघाट में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है. अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि फरार आरोपियों को कब तक गिरफ्तार किया जाता है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है.





