‘वे’ तो मूलत: कांग्रेस-राकांपा की ही
विधायक बच्चू कडू ने पूर्व सांसद राणा पर फिर साधा निशाना

* बोले राकांपा ने उन्हें राज्यसभा में भेजना चाहिए था
अमरावती/दि.10 – शिंदे सेना के नेता तथा पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू की राणा दंपत्ति के साथ अदालत काफी लंबे समय से चली आ रही है और दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोडते. इसी श्रृंखला के तहत अब शिंदे सेना के विदर्भ विभागीय नेता तथा पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने एक बार फिर राणा दंपत्ति, विशेषकर पूर्व सांसद नवनीत राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि नवनीत राणा मूलत: कांग्रेस व राकांपा से ही वास्ता रखती है. ऐसे में राकांपा ने राज्यसभा में भेजने का मौका छोडना नहीं चाहिए था. विधायक बच्चू कडू द्बारा तंज कसने के अंदाज में कही गई इस बात की गूंज अमरावती की स्थानीय राजनीति सहित मुंबई स्थित मंत्रालय तक सुनाई दी है.
उल्लेखनीय है कि अमरावती के राजनैतिक क्षेत्र में कब क्या होगा इसका अंदाजा दिन रात राजनीति करनेवाले लोग ही नहीं लगा सकते. साथ ही अमरावती में किस बात को लेकर कब कौन सा राजनीतिक बम फटेगा इसका भी कोई भरोसा नहीं रहता. ज्ञात रहे कि इस समय जहां एक ओर अमरावती में विधान परिषद के चुनाव की गहमागहमी चल रही है. वहीं मुंबई में महाराष्ट्र के कोटे के तहत रहनेवाली राज्यसभा की एक सीट को लेकर भी जबर्दस्त उठापटक वाला माहौल है. अजीत पवार गुट वाली राकांपा के नेता व तत्कालीन उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के विगत जनवरी माह में हुए असमय निधन के चलते उस समय राज्यसभा की सांसद रहनेवाली सुनेत्रा अजीत पवार ने अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा देते हुए राज्य में उप मुख्यमंत्री का पद संभाला था. ऐसे में सुनेत्रा पवार के इस्तीफे की वजह से रिक्त हुई राज्यसभा की सीट के लिए सांसद बनने के इच्छुकों के बीच जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा चल रही थी. महायुति के तहत राकांपा के कोटे में रहनेवाली इस सीट के लिए दावेदार के तौर पर भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा भी इच्छुक बताई जा रही थी. जिन्होंने इसी सिलसिले में विगत दिनों राकांपा नेत्री व उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से भेंट भी की थी. परंतु नवनीत राणा को राकांपा की ओर से दावेदारी नहीं मिली. बल्कि उनके स्थान पर राकांपा द्बारा राजेंद्र जैन को राज्यसभा हेतु टिकट दी गई.
इसी पूरे राजनैतिक घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने कहा कि नवनीत राणा वैसे भी मूल रूप से कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ी रही हैं. उनका मानना है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को उन्हें राज्यसभा भेजने का अवसर नहीं गंवाना चाहिए था. कडू के इस बयान को अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार कडू का यह वक्तव्य ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य की राजनीति में नेताओं के दल-बदल और नए समीकरणों की लगातार चर्चा हो रही है.
खास बात यह रही कि बच्चू कडू यहीं नहीं रुके. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि नवनीत राणा चाहें तो उनके लिए राजनीतिक विकल्प खुले हैं. कडू ने कहा कि चाहे शिंदे सेना हो या प्रहार, उन्हें साथ लेने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उनके इस बयान को नवनीत राणा के लिए एक तरह की ‘ओपन ऑफर’ के रूप में देखा जा रहा है. कडू के इस बयान के बाद नवनीत राणा या उनके पति विधायक रवि राणा की ओर से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
गौरतलब है कि अमरावती की राजनीति पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुर्खियों में रही है. नवनीत राणा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई थी, जबकि बाद में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ उनके संबंधों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं. ऐसे में बच्चू कडू का यह बयान आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसे बयान भविष्य के संभावित गठबंधनों और समीकरणों की ओर संकेत कर सकते हैं. फिलहाल सभी की निगाहें नवनीत राणा की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं.