सफाई ठेका ही गैरकानूनी! स्थायी में ‘आधी मंजूरी’ ही मिली, ‘कोणार्क’ पर गठित कमिटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट
‘टेंडर’ और ‘एग्रीमेंट’ में जानबुझकर फर्क

* ठेकेदार को करोडों का लाभ पहुंचाने वाले प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह
* कानूनी रुप से भी ठेके में जबरदस्त गडबडी के आरोप
* दंड के प्रावधान हैं बेहद कम, समिति ने नए दंड सुझाए
अमरावती/दि.18 – इस समय जहां एक ओर शहर में कचरे और गंदगी की समस्या को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर पूरे शहर की साफ-सफाई हेतु अमरावती मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी को दिया गया एकल व संयुक्त ठेका भी विवादों में घिरा हुआ है. इसी बीच ‘कोणार्क’ मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैं. समिति की रिपोर्ट के अनुसार, सफाई ठेके को स्थायी समिति से केवल ‘आधी मंजूरी’ ही प्राप्त हुई थी, इसके बावजूद आगे की प्रक्रिया पूरी कर ठेका लागू कर दिया गया. यह प्रक्रिया नियमों के विपरीत बताई जा रही है, जिससे पूरे ठेका सिस्टम की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं. स्वच्छता समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ‘टेंडर’ और ‘एग्रीमेंट’ के दस्तावेजों में जानबूझकर अंतर रखा गया. इस अंतर के चलते ठेकेदार को करोड़ों रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप है. समिति ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रशासन की भूमिका की जांच की आवश्यकता जताई है. इसके अलावा समिति ने अपनी रिपोर्ट में कानूनी पहलुओं पर भी कई खामियां उजागर की हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेका प्रक्रिया में नियमों का पालन ठीक से नहीं किया गया और दंड के प्रावधान भी बेहद कमजोर रखे गए, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है. समिति ने अपनी सिफारिशों में ठेका प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, सख्त दंडात्मक प्रावधान लागू करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. इस पूरे मामले के सामने आने के बाद नगर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिपोर्ट के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है.
बता दें कि, विगत दिसंबर माह में मनपा प्रशासन द्वारा पूरे शहर की साफ-सफाई करने तथा कचरा संकलित करते हुए उसे कंपोस्ट डिपो तक पहुंचाने के काम हेतु एकल पद्धति से संयुक्त ठेका देने हेतु करीब 365 करोड रुपयों के काम की निविदा प्रकाशित की थी. जिसके लिए कोणार्क कंपनी की ओर से आए प्रस्ताव को मान्य करते हुए कोणार्क कंपनी को जनवरी माह के दौरान सफाई ठेका दिया गया था. परंतु अमरावती शहर के पूरे 22 प्रभागों की साफ-सफाई का ठेका हासिल करनेवाली कोणार्क कंपनी द्वारा अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया जा रहा है. जिसके चलते कोणार्क कंपनी को प्रशासक राज के दौरान बेहद हडबडी में दिए गए सफाई ठेके को लेकर उठनेवाले सवालियां निशान और भी बडे होते चले गए. यही वजह रही कि, अमरावती महानगर पालिका का नया सदन अस्तित्व में आते ही साफ-सफाई के मुद्दे पर चर्चा करने हेतु विगत 28 फरवरी को मनपा की विशेष सभा बुलाई गई थी और ऐसा मनपा के इतिहास में पहली बार हुआ था कि, साफ-सफाई जैसे मनपा के मूलभूत काम पर चर्चा करने के लिए विशेष सभा बुलाई गई हो. उसी विशेष सभा में सर्वसम्मती के साथ इस पूरे मामले का अध्ययन करने तथा सुझाव सिफारिशें देने हेतु अभ्यास गट के तौर पर मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे की अध्यक्षता के तहत स्वच्छता समिति का गठन किया गया था. जिसकी जारी माह में ही 6 अप्रैल, 13 अप्रैल व कल 17 अप्रैल को एक के बाद एक तीन बैठकें हुई तथा इन तीनों बैठकों में समिति सदस्यों की ओर से आए सुझावों व प्रस्तावों को ध्यान में रखते हुए समिति द्वारा अपनी सिफारिशें व रिपोर्ट को तैयार किया गया, जिन्हें अब आगामी सोमवार 20 अप्रैल को होने जा रही मनपा की अगली आमसभा में रखने हेतु महापौर श्रीचंद तेजवानी एवं मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा के सुपूर्द कर दिया गया है. जिसके चलते अब सभी में इस बात को लेकर उत्सुकता देखी जा रही है कि, आखिर स्वच्छता समिति ने अपने रिपोर्ट में कौनसे निष्कर्ष निकाले है तथा अब उस रिपोर्ट पर मनपा की आगामी आमसभा में कौनसा निर्णय लिया जाता है.
बता दें कि, स्वच्छता समिति के अध्यक्ष एवं मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे की अध्यक्षता में गत रोज हुई बैठक में समिति ने शहर को साफ-सुथरा बनाए रखने हेतु किए जानेवाले कई उपाय सुझाए. साथ ही साथ कोणार्क कंपनी के साथ किए गए सफाई ठेका करार में भी कई संशोधन किए जाने की जरुरत प्रतिपादित की. समिति ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि, मनपा की ओर से प्रकाशित निविदा सूचना में उल्लेखित शर्तों तथा मनपा द्वारा कोणार्क कंपनी के साथ किए गए ठेका करार की शर्तों में काफी अधिक फर्क है तथा यह विसंगती जानबुझकर रखी गई है, ताकि ठेकेदार कंपनी को इसका फायदा मिल सके. स्वच्छता समिति ने इस बात की ओर विशेष ध्यान दिलाया कि, सफाई ठेके को लेकर प्रकाशित निविदा सूचना में स्पष्ट उल्लेख था कि, ठेकेदार कंपनी द्वारा अप्रैल 2025 के बाद बने नए वाहनों की उपलब्धता करानी होगी. जिसके चलते नए कोरे वाहन खरीदने में समर्थ व सक्षम नहीं रहनेवाले कई इच्छुक ठेकेदारों ने इस निविदा प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लिया. जबकि कोणार्क के साथ ठेका करार करते समय मनपा प्रशासन ने इस शर्त को बदल दिया तथा अप्रैल 2023 के बाद बने वाहनों के प्रयोग को मंजूरी दे दी. जिसके चलते कोणार्क कंपनी द्वारा 2-3 साल पुराने वाहनों को कचरा संकलन के काम में लगाया गया.
इसके साथ ही समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि, जोननिहाय ठेके की तुलना में संयुक्त व एकल ठेके की लागत 11 करोड रुपयों से अधिक है. परंतु इस सफाई ठेके में फवारणी व धुवारणी के कामों का समावेश नहीं किया गया है, यानि फवारणी व धुवारणी पर मनपा को अलग से पैसा खर्च करना पडेगा. यदि उस खर्च को भी जोडा जाए, तो शहर में साफ-सफाई का काम पहले की तुलना में काफी अधिक महंगा सौदा साबित हो रहा है. लेकिन हैरत की बात है कि, इतना ज्यादा पैसा खर्च करने के बावजूद शहर में ढंग के साफ-सफाई ही नहीं हो रही और कोणार्क कंपनी द्वारा सही तरीके से काम भी नहीं किया जा रहा. जिसके लिए कोणार्क कंपनी पर लगाए जानेवाले दंड का प्रावधान भी बेहद अत्यल्प है, यानि कोणार्क कंपनी पर लगाई जानेवाली पेनॉल्टी बेहद कम है. जिससे कोणार्क कंपनी को कोई विशेष आर्थिक फर्क भी नहीं पडता. ऐसे में बेहद जरुरी है कि, कोणार्क कंपनी पर लगाई जानेवाली पेनॉल्टी की राशि को बढाया जाए. इसके लिए भी समिति द्वारा मनपा प्रशासन को 25 सुझाव दिए गए है.
* जिस दिन हाईकोर्ट का ऑर्डर, उसी दिन निविदा कैसे हुई जारी
स्वच्छता समिति द्वारा अपने अध्ययन में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया है कि, अमरावती मनपा क्षेत्र में साफ-सफाई के लिए एकल व संयुक्त ठेका दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका का निपटारा मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ द्वारा 7 अक्तूबर 2025 को करते हुए मनपा के पक्ष में आदेश जारी किया गया था और खास बात यह भी है कि, ठीक उसी दिन मनपा प्रशासन द्वारा एकल व संयुक्त पद्धति से सफाई ठेका देने हेतु निविदा जारी की गई थी, यानि प्रशासन द्वारा सोची-समझी रणनीति अथवा साजिश के तहत सफाई ठेके को लेकर काम किया जा रहा था और कोणार्क कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से निविदा सूचना एवं ठेका करार के नियमों व शर्तों में जानबुझकर विसंगतियां छोडी गई. जिसका कोणार्क कंपनी द्वारा भरपूर फायदा उठाया जा रहा है और इसका खामियाजा कचरे व गंदगी की समस्या के तौर पर अमरावती शहर के आम नागरिकों को उठाना पड रहा है. जिसके लिए पूरी तरह से सफाई ठेकेदार सहित मनपा प्रशासन जिम्मेदार है.
स्वच्छता समिति ने अपनी तीसरी और अंतिम बैठक के बाद सभी सदस्यों की ओर से आए सुझावों को ध्यान में रखते हुए समिति ने अपनी सिफारिशों को संकलित कर महापौर तथा मनपा आयुक्त के समक्ष अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर दी. जिस पर अब आगामी 20 अप्रैल को होनेवाली मनपा की आमसभा में विचार-विमर्श किया जाएगा तथा आमसभा की सहमति के अनुसार शहर में साफ-सफाई की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिहाज से कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा. स्वच्छता समिति के अध्यक्ष तथा मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे की अध्यक्षता के तहत आज बुलाई गई स्वच्छता समिति की तीसरी व अंतिम बैठक में समिति सदस्य के तौर पर मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर, गटनेता ज्ञानेश्वर उर्फ नाना आमले, शेख हमीद शेख वाहिद, डॉ. राजेंद्र तायडे, स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे, मिलिंद चिमोटे, अनिल अग्रवाल, भोजराज काले एवं पार्षद संजय नरवणे, बबलू शेखावत, प्रशांत वानखडे, दिनेश बूब, मंगेश मनोहरे, अजय जयस्वाल, नजीब खान, नूतन भुजाडे व सुरेखा लुंगारे की उपस्थिति रही.
समिति की बैठक में यह निष्कर्ष भी निकाला कि, प्रशासक राज के दौरान काफी हद तक मनमाने व जल्दबाजी वाले तरीके से काम किया गया. जिसके चलते मौजूदा ठेका करार में कुछ नए नियमों व शर्तों का समावेश किया जाना बेहद जरुरी है. जिसे लेकर स्वच्छता समिति ने मनुष्यबल एवं कचरा संकलन हेतु प्रयुक्त होनेवाले वाहनों सहित साफ-सफाई के कामों को लेकर कई सुझाव एवं सिफारिशों पर विचार-विमर्श किया है. स्वच्छता समिति के मुताबिक प्रत्येक प्रभाग के अनुसार आवश्यक मनुष्यबल निश्चित कर जरुरी स्थानों पर अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त किए जाने चाहिए. प्रभागनिहाय शिकायत निवारण केंद्र शुरु करते हुए नागरिकों के लिए हेल्पलाइन एवं मोबाइल एप आधारित शिकायत निवारण प्रणाली को कार्यान्वित किया जाना चाहिए. शहर में नियमित फवारणी व धुवारणी करने के साथ ही लेंडेन पावडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए. साथ ही सभी सब्जी बाजार, सार्वजनिक शौचालय व मैदान के लिए स्वतंत्र स्वच्छता योजना चलाई जानी चाहिए. इन सभी कामों हेतु नियुक्त अधिकारियों सहित ठेकेदार पर नियमित मॉनिटरिंग रखते हुए उनके काम के अनुसार देयक अदा किए जाने चाहिए. इन सभी सुझावों एवं सिफारिशों को स्वच्छता अभ्यास गट के अध्यक्ष एवं मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे द्वारा अब मनपा प्रशासन के सुपूर्द कर दिया गया है. जिन पर आगामी 20 अप्रैल को होनेवाली आमसभा में विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसकी ओर सभी की निगाहें लगी हुई है.
* 25 प्रकार के नए दंड सुझाए गए
खास बात यह भी रही कि, सफाई ठेकेदार द्वारा काम में की जानेवाली अलग-अलग तरह की कोताही व लापरवाही को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कोताही व लापरवाही के लिए स्वच्छता समिति ने 25 तरह के दंड प्रावधानों को लेकर सुझाव दिया है. साथ ही इस बात को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है कि, मनपा प्रशासन द्वारा ठेका करार में जिन दंड प्रावधानों को शामिल किया गया, वे काफी अपर्याप्त व अत्यल्प है. जिनका सफाई ठेकेदार पर कोई विशेष आर्थिक प्रभाव नहीं पडता. यही वजह है कि, सफाई ठेकेदार द्वारा अपने काम सहित दंड को लेकर बार-बार अनदेखी की जा रही है. ऐसे में बेहद जरुरी है कि, ठेकेदार पर प्रत्येक कोताही के लिए कडी दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
* 26 नई शर्तें भी सुझाई गई
स्वच्छता समिति ने अपने द्वारा किए गए अध्ययन में यह निष्कर्ष भी निकाला कि, ठेका करार में जिन शर्तों का समावेश किया गया है, वे सभी शर्तें ठेकेदार के लिहाज से ही फायदेमंद है तथा ठेका करार में अमरावती मनपा एवं शहर के नागरिकों के हितों की अनदेखी की गई है. जिसके चलते अब अमरावती मनपा सहित शहरवासियों के फायदे को देखते हुए इस ठेका करार की शर्तों में संशोधन किया जाना चाहिए. इस बात के मद्देनजर समिति ने मनपा प्रशासन को ठेका करार में शामिल करने हेतु 26 नई शर्तें भी सुझाई है.
* क्यों अधुरी मंजूरी प्राप्त हैं सफाई ठेका
स्वच्छता समिति ने अपने अध्ययन में यह भी पाया कि, यह सफाई ठेका भले ही एकल व संयुक्त है, परंतु इसे ‘अ’ व ‘ब’ ऐसे दो हिस्सों में दिया गया है. जिसमें से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से कचरा संकलित करते हुए उसे मनपा के सुकली स्थित कंपोस्ट डिपो तक पहुंचाने वाले ‘अ’ पार्ट को स्थायी समिति की मंजूरी प्राप्त है. वहीं सफाई ठेके के पार्ट ‘ब’ अंतर्गत शहर के सभी 22 प्रभागों में घर-घर जाकर कचरा संकलित करने और प्रत्येक प्रभाग में 54 कामगार लगाते हुए 20 कामगारों से नालियों की साफ-सफाई करवाने एवं शेष कामगारों से दैनंदिन कचरा संकलित करवाने के काम का समावेश है. परंतु इस सफाई ठेके के पार्ट ‘ब’ को स्थायी समिति की मंजूरी ही प्राप्त नहीं है. इसके चलते कोणार्क कंपनी को दिए गए एकल व संयुक्त ठेके की वैधता पर भी स्वच्छता समिति द्वारा गंभीर आक्षेप उठाए गए है.

* ठेके की कानूनी वैधता को जांचा जाए
शहर के वरिष्ठ विधिज्ञ एवं मनपा के स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे ने स्वच्छता समिति की बैठकों में हिस्सा लेते हुए इस ठेके के साथ जुडे कानून पहलुओं पर विशेष जोर दिया. साथ ही सफाई ठेके की कानूनी वैधता की जांच-पडताल किए जाने की जरुरत भी बताई. एड. प्रशांत देशपांडे के मुताबिक एक अभ्यास गट के तौर पर स्वच्छता समिति ने सफाई ठेके के तमाम तकनीकी व कानूनी पहलुओं को अच्छी तरह से देखा, जाना और समझा है. जिसके बाद स्वच्छता समिति में शामिल सर्वदलिय पार्षदों के विचारों एवं सुझावों को ध्यान में रखते हुए अपनी रिपोर्ट व सिफारिशें तैयार की है. जिसके अब मनपा प्रशासन के सुपूर्द कर दिया गया है. जिस पर आगे का निर्णय आमसभा को लेना है.

* निविदा सूचना और ठेका करार की शर्तों में फर्क कैसे?
मनपा के स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल ने कोणार्क कंपनी को मनपा द्वारा दिए गए सफाई ठेके को लेकर बेहद गंभीर आपत्ति उठाते हुए कहा कि, अमूमन निविदा सूचना में जिन शर्तों का उल्लेख रहता है, उन्हीं शर्तों के आधार पर किसी भी इच्छुक एजेंसी को ठेका दिया जाता है एवं निविदा प्रक्रिया में पात्र रहनेवाली एजेंसी या कंपनी के साथ उन्हीं शर्तों के आधार पर ठेका करार किया जाता है. परंतु हैरत की बात है कि, सफाई ठेके की निविदा में दर्ज शर्तों एवं ठेका करार में शामिल की गई शर्तों में जमीन-आसमान का फर्क है. जिसके तहत मनपा प्रशासन ने ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराए जानेवाले वाहनों के उत्पादन वर्ष में बदलाव करने के साथ ही ठेकेदार द्वारा प्रभागों में लगाए जानेवाले कामगारों व वाहनों की संख्या को ही गोल कर दिया. साथ ही साथ अर्नेस्ट मनी को दो साल में वापिस लौटाने की शर्त में छेडछाड करते हुए एक ही आर्थिक वर्ष के भीतर ठेकेदार को अर्नेस्ट मनी वापिस मिलने का रास्ता खोल दिया गया. जिसके चलते ठेकेदार को ब्याज के तौर पर सालाना लाखों रुपयों का फायदा हो रहा है. इसके अलावा ठेका करार में फवारणी-धुवारणी जैसे कामों का समावेश ही नहीं है. जिस पर मनपा को अलग से पैसे खर्च करने होंगे, यानि करोडों रुपयों का सफाई ठेका देने के बावजूद मनपा पर फवारणी व धुवारणी के कामों पर होनेवाले खर्च का अतिरिक्त बोझ पडेगा. इन सभी बातों की ओर स्वच्छता समिति द्वारा मनपा प्रशासन का ध्यान दिलाया गया है.
* आमसभा में उठ सकती है मनपा प्रशासन पर कार्रवाई की मांग
उल्लेखनीय है कि, परसों सोमवार 20 अप्रैल को ही अमरावती महानगर पालिका की अगली आमसभा होने जा रही है. जिससे ठीक पहले कल शुक्रवार 17 अप्रैल को स्वच्छता समिति की तीसरी व अंतिम बैठक हुई. जिसमें समिति ने अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें मनपा प्रशासन के सुपूर्द की. जिसमें प्रमुख तौर पर यह कहा गया है कि, अमरावती मनपा प्रशासन ने बेहद हडबडी में साफ-सफाई का ठेका कोणार्क कंपनी को आवंटित किया और ऐसा करते समय मनपा एवं अमरावती शहरवासियों के हितों की अनदेखी करते हुए ठेकेदार को फायदा पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया. अब तक यह आरोप दबी हुई जबान में लगाया जा रहा था, जिस पर अब स्वच्छता समिति की रिपोर्ट के जरिए एक तरह से अधिकारिक मुहर लग गई है. ऐसे में इस बात के पूरे आसार है कि, परसों 20 अप्रैल को होनेवाली मनपा की आमसभा में पार्षदों द्वारा मनपा प्रशासन पर कार्रवाई की मांग उठाई जा सकती है. जिसके चलते परसों होनेवाली मनपा की आमसभा की ओर सभी की निगाहें लगी हुई है.





