शासकीय कर्मचारियों की हड़ताल में फूट
राज्य कर्मचारी संघटना और जिला परिषद महासंघ के बीच बढ़ा मतभेद

नागपुर/ दि. 21- पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस)को लागू करने और अपनी अन्य 18 प्रमुख मांगों को लेकर राज्य के शासकीय कर्मचारियों ने मंगलवार, 21 अप्रैल से बेमुदत हड़ताल का आगाज किया है. हालांकि, इस आंदोलन के पहले ही दिन कर्मचारी संगठनों में स्पष्ट फूट नजर आ रही है, जिससे राज्य सरकार के खिलाफ जारी इस संघर्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
हड़ताल के ऐलान के बाद से ही कई कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन से किनारा कर लिया था, वहीं कुछ संगठनों ने समर्थन देने के बावजूद प्रत्यक्ष भागीदारी से परहेज किया. अब कुछ महत्वपूर्ण संगठनों द्वारा हड़ताल से माघार लेने के निर्णयों ने इस आंदोलन की धार को कमजोर कर दिया है.
इस आंतरिक कलह का मुख्य कारण जिला परिषद (झेडपी) कर्मचारी महासंघ का असंतोष माना जा रहा है. जिला परिषद के कर्मचारी, जो मुख्य रूप से ग्राम विकास विभाग के अंतर्गत आते हैं, का आरोप है कि राज्य स्तरीय चर्चाओं में उनके मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है. राज्य कर्मचारी संघटना द्वारा सरकार को सौंपी गई 18 मांगों की सूची में जिला परिषद कर्मचारियों की विशिष्ट समस्याओं का समावेश न होने के कारण यह तनाव पैदा हुआ है. जिला परिषद के अंतर्गत 17 अलग-अलग संगठन काम करते हैं, जिनकी कई मांगें वर्षों से प्रलंबित हैं. मुख्य हड़ताल में अपनी मांगों को स्थान न मिलने के चलते जिला परिषद कर्मचारियों ने इस आंदोलन से अलग रहने का निर्णय लिया है.
इस बिखराव के चलते अब सरकार पर दबाव बनाने के बजाय कर्मचारी संगठनों के बीच का आपसी तालमेल और समन्वय एक बड़ी चुनौती बन गया है. फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इस आंतरिक विवाद के बीच राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच कोई ठोस समाधान निकल पाएगा या आंदोलन का यह दौर इसी तरह के बिखराव के साथ आगे बढ़ेगा.





