पूर्व सीजेआई भूषण गवई पहुंचे बागेश्वर धाम
आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से सहपरिवार की भेंट

* दौरे को लेकर शुरु हुआ विवाद, अंधश्रद्धा बनाम वैज्ञानिक सोच पर बहस तेज
नागपुर/छतरपुर /दि.22- भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के मध्यप्रदेश स्थित बागेश्वर धाम दौरे ने एक बार फिर नागपुर से जुड़े पुराने विवाद को हवा दे दी है. पूर्व सीजेआई गवई ने धाम प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात कर आध्यात्मिक चर्चा की और वहां चल रहे धार्मिक-सामाजिक कार्यों की सराहना की.
जानकारी के अनुसार, पूर्व सीजेआई गवई अपने परिवार के साथ बागेश्वर धाम पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने धाम परिसर में पूजा-अर्चना की और धीरेंद्र शास्त्री से करीब आधे घंटे तक बातचीत की. सूत्रों के मुताबिक, चर्चा में धार्मिक गतिविधियों, समाजसेवा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर संवाद हुआ.
बता दें कि, पूर्व सीजेआई गवई का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब बागेश्वर धाम और धीरेंद्र शास्त्री पहले ही विवादों के केंद्र में रह चुके हैं. विशेष रूप से नागपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हुआ था. उस समय महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने शास्त्री के चमत्कार और कथित दिव्य शक्तियों के दावों को चुनौती दी थी. समिति ने उनके दावों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की मांग करते हुए इसे अंधविश्वास फैलाने वाला बताया था. नागपुर प्रकरण के दौरान स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि समर्थक और विरोधक आमने-सामने आ गए थे. एक पक्ष ने इसे धार्मिक आस्था का विषय बताया था. वहीं दूसरे पक्ष ने इसे अंधश्रद्धा और कानून के उल्लंघन से जोड़कर देखा था. इस दौरान अंधश्रद्धा विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी उठी थी.
वहीं अब सीजेआई जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति का बागेश्वर धाम जाना और सार्वजनिक रूप से सराहना करना कई सवाल खड़े कर रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता है. लेकिन सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के ऐसे कदम सामाजिक संदेश भी देते हैं. यह पूरा मामला एक बार फिर उसी बहस को सामने लाता है कि, क्या आस्था और परंपरा को प्राथमिकता दी जाए या फिर वैज्ञानिक सोच और तार्किकता को बढ़ावा दिया जाए. न्या. भूषण गवई का बागेश्वर धाम दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श का केंद्र बन गया है. नागपुर में हुए विवाद की पृष्ठभूमि में यह घटना आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है.





