जमीन की एनए (अकृषक) रजिस्ट्री अब एक क्लिक पर
राज्य सरकार का दमदार फैसला

मुंबई./ दि.22- राज्य में गैर-कृषि उपयोग के लिए जमीन का अकृषक परवाना अनिवार्य है. इससे पहले राज्य सरकार ने कृषि भूमि के आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक अकृषक अनुमति की शर्त को स्थायी रूप से खत्म कर दिया. यह निर्णय फरवरी महीने में लिया गया था. स्थानीय प्राधिकरण को निर्देश दिए गए थे कि निर्माण नक्शे को ही छ- अनुमति के रूप में माना जाए. इस पूरी प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
जमीन की एनए प्रक्रिया अब और आसान
जमीन को अकृषक बनाने की प्रक्रिया अब बेहद आसान हो गई है. 7/12 पर इससे संबंधित ऑनलाइन एंट्री तुरंत हो जाएगी. राज्य सरकार ने ’बिल्डिंग परमिशन मैनेजमेंट सिस्टम’ विकसित किया है. इस प्रणाली के जरिए जमीन को अकृषक करने के लिए प्रीमियम (अधिमूल्य) ऑनलाइन भरा जा सकेगा. इस नई प्रणाली का उद्घाटन राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंत्रालय में किया. इस प्रणाली के कारण नागरिक एक क्लिक पर ऑनलाइन तरीके से कन्वर्जन प्रीमियम भर सकेंगे और इसकी एंट्री सीधे 7/12 (सातबारा) पर हो जाएगी.
एक क्लिक पर विकास अनुमति
पिछले शासन आदेश को अब बीपीएमएस प्रणाली का साथ मिल गया है. नागरिकों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए ारहर्रींर्रीीीं.ारहरीरीहीींर.र्सेीं.ळप वेबसाइट पर जाना होगा. उनके संदेहों का समाधान और सवालों के जवाब वहां मिल जाएंगे. नागरिकों को जमीन पर विकास अनुमति या निर्माण नक्शा मंजूरी के लिए स्थानीय प्राधिकरण के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. एकमुश्त कन्वर्जन प्रीमियम भरने के बाद एक ही क्लिक पर पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. महाआईटी ने अद्यतन प्रणाली तैयार की है. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन करके यह कानून लाया जा रहा है और इसमें सुझाव भी लिए जाएंगे.
देवस्थान इनाम जमीन के संबंध में कानून
देवस्थान इनाम जमीनों के लंबित मुद्दे को सुलझाने के लिए राज्य सरकार आगामी विधानमंडल सत्र में कानून लाएगी. इसकी तैयारी शुरू हो गई है. राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुलेे ने जानकारी दी कि नागरिकों के सुझाव और आपत्तियों के लिए कानून का मसौदा जल्द ही वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा. सरकार देवस्थान जमीनों के लिए स्थायी समाधान निकालने के लिए सकारात्मक है और नए कानून की प्रक्रिया लागू करते समय जनभावना और तकनीकी पहलुओं पर विचार किया जाएगा. मंत्री ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों और संबंधित पक्षकारों को अपनी राय रखने का मौका देने के लिए यह जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी.
कोंकण के फल बागवानों को राहत
इस बीच, कोंकण के फल बागवानों के लिए एक राहत भरा फैसला लिया गया है. राजस्व मंत्री ने निर्देश दिए कि फल बागों के फसल-पानी की एंट्री हर साल करने के बजाय हर तीन साल में की जाए, इसके लिए जमाबंदी विभाग और बागवानी विभाग को संयुक्त प्रस्ताव पेश करना चाहिए. इससे किसानों की हर साल की प्रशासनिक परेशानी कम होने की संभावना है. साथ ही, नर्सरी संचालकों को मिट्टी उपलब्ध कराते समय उस पर कोई रॉयल्टी न ली जाए, ऐसा प्रस्ताव पेश करने के निर्देश भी राजस्व मंत्री ने दिए हैं. इस फैसले से राज्य में फल बागवानी और नर्सरी व्यवसाय को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा.
इनाम जमीन कानून जल्द ही लागू होगा
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इन सभी गतिविधियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में साढ़े चार लाख हेक्टेयर जमीन देवस्थान इनाम में है. वे काश्तकारों और कब्जेदारों के नाम पर हैं, लेकिन उनका हस्तांतरण बंद है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसके लिए कानून लाने के निर्देश दिए थे. अगले तीन दिनों में ’देवस्थान इनाम जमीन कानून’ वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा. काश्तकारों और कब्जेदारों के अधिकार क्या होंगे, इस पर सरल कानून होगा. मंत्री ने घोषणा की कि कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र में जमीनें हस्तांतरित नहीं हो रही हैं और विकास कार्य रुके हुए हैं, जिसके लिए यह कानून महत्वपूर्ण है. अंतिम कानून जुलाई महीने में आएगा.